दोस्त की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए बनवाया गरीबों के लिए कैंसर अस्पताल

Cancer Hospital For Poors
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Cancer Hospital For Poors : दोस्त की अंतिम इच्छा थी की वो गरीबों के लिए कैसर अस्पताल बनाए

Cancer Hospital For Poors : कहा जाता है कि दोस्ती वो रिश्ता है जिसमें कोई स्वार्थ नहीं छिपा होता है,इसके बीच आपसी प्यार की गहराई इतनी अधिक होती है कि उसे दुनिया को कोई भी यंत्र माप नहीं सकता.

एक ऐसा ही उदाहरण देखने को मिला कर्नाटक के बेंगलुरू शहर में जहां अपने दोस्त की आखिरी इच्छा पूरी करने के लिए 76 साल के व्यक्ति ने गरीबों की मदद के लिए केंसर अस्पताल खोला है.
दरअसल आर के सिपानी के दोस्त और उनके साले धनराज दागा कि यह इच्छा थी कि वो गरीबों के लिए एक मुफ्त कैंसर अस्पताल खोले.
लेकिन इससे पहले की उनकी ये इच्छा पूरी वो स्वर्ग सिधार गए. करीब तीन साल पहले 73 साल के दागा की हार्ट अटैक की वजह से मृत्यु हो गई और कैंसर अस्पताल बनाने का उनका सपना भी उनके साथ ही चला गया.

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लेकिन वो कहते हैं ना कि सच्चा दोस्त वही है जो अपने दोस्त की हर इच्छा पूरा करे आरके सिपानी ने भी कुछ ऐसा ही किया.
उन्होंने अपने दोस्त की मौत के बात ठान लिया की वो उसकी गरीबों के लिए मुफ्त कैंसर असप्ताल खोलने की इच्छा जरूर पूरी करेंगे.
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R.K Sipani
इसके बाद वो दागा के परिवार के साथ किडवाई अस्पताल गए जहां उन्होंने सिपानी और दागा ब्लॉक बनाने के बारे में वहां के डायरेक्टक से बात की, और तब तक दम नहीं लिया जब तक वो बन नहीं गया.
लगभग 64,000 स्कावयर फीट में फैले इस ब्लॉक को शनिवार को राज्य के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने उद्घाटन कर मरीजों के लिए शुरू कर दिया है.
बता दें कि आर के सिपानी का परिवार कंस्ट्रक्शन बिजनेस में है और गरीबों के लिए एक चैरिटेबल होम भी चलाते हैं,ये लोग करीब 30 साल बेंगलोर में रह रहे हैं.
उदघाटन करने आए सीएम ने उनकी अगली चैरिटेबल होम की परियोजना के लिए सरकारी जमीन देने का भी ऐलान किया.
सीएम ने इस दौरान भरोसा दिलाया की “आपको वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल के लिए महान कार्य के लिए हम पूरी तरह से तैयार है.
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गौरतलब है कि सिपानीसेवाल सदन नाम से बेंगलोर के चन्नासंद्र में चैरिटेबल होम चलता है, जिसमें इस परिवार के अलावा RVM फाउंडेशन भी मदद करती है.
2012 में शुरू हुए इस होम में अब करीब 400 लोग रहते हैं.ज्यादातर इसमें दिमागी रूप से कमजोर और घर से निकाले गए बुढ़े नागरिक हैं जिनके इसके अलावा रहने का कोई दूसरा सहारा नहीं है.