Dadi Ki Rasoi : नोएडा जैसे महंगे शहर में सिर्फ 5 रूपए में यह शख्स भर रहा गरीबों का पेट

dadi ki rasoi

Dadi Ki Rasoi : सामाजिक कार्यों का हैं मसीहा

Dadi Ki Rasoi : तमिलनाडु में अम्मा कैंटीन की सफलता के बाद देश की अधिकतर राज्य सरकारें भी अपने यहां किफायती दरों में भोजन उपलब्ध कराने के मॉडल पर काम करने में जुटी हैं .

लेकिन आज हम आपको एक ऐसी कैंटीन के बारे में बताने जा रहे हैं जो कोई सरकार की योजना नहीं बल्कि एक इंसान की सोच का नतीजा है.
इस कैंटीन की खास बात यह है कि यहां सभी लोगों को सिर्फ पांच रुपये में भोजन दिया जाता है.
हो सकता है आपको हमारी इस बात पर यकीन ना हो कि नोएडा जैसे मंहगे शहर में सिर्फ पांच रूपए में खाना. लेकिन यह सच है और इस नेक काम को पूरा कर रहे नोएडा के ही सामाजिक कार्यकर्ता अनूप खन्ना जी .
दादी की रसोई नाम से चला रहे कैंटीन
अनूप खन्ना की ‘दादी की रसोइ‘ नाम से शुरू की गई इस पहल की मदद से हर रोज लगभग 500 जरूरतमंद अपना पेट भर रहे हैं.
तकरीबन 2 साल पहले अनूप जी ने किफायती दर पर देसी भोजन देने की अपनी कोशिश की शुरुआत की थी. जिसके मेन्यू में आपको दाल, चावल, रोटी से लेकर हर रोज अलग तरह की सब्जी मिलती है.
आपको बता दें कि दादी की रसोई के नोएडा में दो जगह स्टाल लगाए जाते हैं जो हर दिन सुबह 10 बजे से 11.30 बजे तक सेक्टर 17 और 12 बजे से 2 बजे सेक्टर 2 में भोजन प्रदान करता है.
वहीं उनकी इस स्टाल पर छात्रों से लेकर कर्मचारियों तक हर कोई खाना लेने के लिए लाइन में खड़ा होता है.
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पिता थे स्वतंत्रता सेनानी
अनूप खन्ना ने द लॉजिकल इंडियन से दादी की रसोई के बारे में बात करते हुए बताया कि वो बचपन से ही विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं.
उनके पिता स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदार थे और उन्हें महात्मा गांधी और  मुहम्मद अली जिन्ना के साथ काम करने का अवसर भी मिला था. इसी से प्रेरणा लेकर वो भी शुरू से ही सामाजिक स्तर पर काम करना चाहता थे.
उन्होंने बताया कि दादी की रसोइ का नाम उनकी बेटी साक्षी खन्ना ने सुझाया था. अनूप बताते हैं कि उन्होंने शुरूआत में रसोईघर की स्थापना के लिए 30,000 रुपये का निवेश किया था.
मगर आज समय के साथ धीरे धीरे कई लोगों ने भी उनकी इस कोशिश में अपना दान किया है.
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लोगों का मिल रहा सहयोग
उन्होंने बताया कि लोग कई तरह से अपने स्तर पर दान कर रहे हैं जैसे दुकानदार मुझे कम कीमत पर कच्चा माल देते हैं, कई लोग विशेष अवसरों पर जैसे जन्मदिन, शादी की सालगिरह में बचे हुए भोजन को हमें दान देते हैं
अनूप खन्ना का मानना है कि किसी को कभी कुछ मुफ्त में मांगना नहीं चाहिए. इसी वजह से वो लोगों को खाना खिलाने के लिए 5 रुपए का शुल्क वसूलते हैं और खाने की गुणवत्ता से कोई समझौता भी नहीं करते .
अनूप ने कहा कि उनके अनुसार, किसी भी व्यक्ति के लिए भोजन, कपड़ा और चिकित्सकिय सुविधा काफी आवश्यक है. इसलिए उनका यह उद्देश्य यह है कि वो इन तीन चीजों को एक सस्ती कीमत पर समाज के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों तक पहुंचाने का प्रयास करें.
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कई और सामाजिक कार्यों का कर रहे संचालन
अनूपप्पा खन्ना ने ‘सदभावना स्टोर‘ की भी शुरुआत की है, जो हर जरूरत वाले लोगों को कपड़े, जूते और किताबें प्रदान करता है.
इस पहल ने दूसरों से बहुत समर्थन प्राप्त किया है. इसी के साथ ही वो नोएडा में प्रथम प्रधान मंत्री जन आयुध केंद्र का भी संचालन करते हैं, और किसी त्रासदी में राहत सामग्री के साथ साइट तक पहुंचकर मदद करते हैं
अनूप अपने जीवन में एक आदर्श वाक्य का पालन करते हैं जो उन्हें सिखाता है कि हर छोटा कदम भी हमारे समाज में बड़ा बदलाव लाते हैं. वो अपने इसी वाक्य को जीवन की मूल धारना मानते हुए  सदैव अपनी सामाजिक सेवा जारी रखने का वादा करते हैं.
गौरतलब है कि अनूप के इस वाक्य से हमें भी सीख लेनी चाहिए और यह कोशिश करनी चाहिए कि हम भी छोटे स्तर पर ही सही मगर समाज को सशक्त करने के लिए कुछ काम जरूर करें.

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