दिल्ली की ये बेटी अपनी कोशिश से कुछ यूं भर रही भूखों का पेट

Delhi Girl Double Roti Project

Delhi Girl Double Roti Project : हर हफ्ते लगभग 300 से 400 भूखे लोगों को खिला रहे हैं

Delhi Girl Double Roti Project : आजकल देश का युवा जहां नेटफ्लिक्स पर वीडियो देखने से लेकर पबजी(PUBG) जैसे खेलों में अपने आप को खपाए हुए हो.

देश को सोशल मीडिया पर पोस्ट लिख लिख कर ही बदलने की सोच रखता हो, वहां अगर किसी युवा की देश में बदलाव लाने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने की खबर आए तो आश्चर्य सा होता है.
कुछ ऐसा ही आश्चर्य करने वाला काम कर रही हैं गुरुग्राम के श्री राम स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 10 की 16 वर्षीय छात्रा तायरा भार्गव, ये बेटी कुछ अपने ही तरीके से जरूरतमंदों की भूख मिटाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है.
दरअसल एक मुद्दा ये भी है कि हममें से कई लोग बदलाव लाने की ख्वाहिश तो रखते हैं, लेकिन शुरू कहां से करें यहां पर आकर अक्सर गाड़ी को ब्रेक लग जाता हैं.
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लेकिन द बैटर इंडिया के साथ बातचीत में तायरा ने अपने डबल रोटी अभियान की शुरुआत के साथ ही सारे संबंधित पहलुओं पर भी अपने विचार रखे हैं.
कब आया ये अभियान शुरू करने का ख्याल
इस सवाल के जबाव में तायरा बताती हैं कि पिछले साल जब वो एक शादी में गई थी तभी वहां उनके मन में ख्याल आया कि जो इस प्रकार के उत्सवों और कार्यक्रमों के बाद खाना बच जाता है उसका क्या होता होगा!
जब वह ये देखने के लिए अंत तक रूकी तो ये देकर हैरान रह गई कि बचा हुआ खाना जो लगभग 250 भूखे लोगों का पेट भर दे उसको फेंक दिया गया गया, इसके बाद से ही तायरा के मन में इसके लेकर कुछ करने का विचार आया.
 Delhi Girl Double Roti Project
इस पहल का नाम डबल रोटी रखने की वजह
तायरा बताती हैं कि लगभग आठ महीने पहले उन्होंने शहर की एक बेकरी को अपने साथ मिलाकर हफ्ते में तीन दिन ब्रैड की सप्लाई करने की बात की .
अपने अभियान का नाम डबल रोटी रखने के बारे में बोलते हुए कहा कि डबल रोटी शब्द का हिंदी में अर्थ रोटी से है वह इस नाम से दो मुद्दों को संबोधित करना चाहती थी भूखों की भूख मिटाने के अलावा ये भी सुनिश्चित करना था कि बचा हुआ खाना बेकार ना जाए.
तायरा ने इस अभियान की शुरुआत अपने भाई की मदद से की थी वो बताती हैं कि मेरा भाई इस समय जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय में है, लेकिन जब भी वह यहाँ होता है, वह हमेशा मेरी मदद करता है”
कैसे संभालती है सारा काम
वह बताती हैं कि एक लॉजिस्टिक कंपनी की मदद से, वह सुनिश्चित करती हैं कि बेकरी से ब्रेड को उठाया जाए और शहर के दो या तीन अलग-अलग घरों और बोर्डिंग स्कूलों में भेजा जाए, जहां से ये जरूरतमंदो तक पहुंच सके.
वह बताती हैं कि अभी तो हम हर हफ्ते लगभग 300 से 400 भूखे लोगों को खिला रहे हैं, लेकिन और ज्यादा पैसे जुटाने के साथ ही आशा है कि हम और ज्यादा लोगों तक पहुंच जाएंगे और शहर में और अधिक भोजन दुकानों के साथ टाइअप करेंगे.
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छोटी सी कोशिश लाएगी बदलाव
वहीं दूसरी तरफ तायरा के बोर्ड की परीक्षाएं भी नजदीक हैं लेकिन फिर भी वह इस पहल के लिए कोई कमी नहीं होने देना चाहती हैं.
गौरतलब है कि भारत लगभग 1 करोड़94 लाख कुपोषित लोगों का घर है, और इस तरीके की पहल को इस पहाड़ जैसी संख्या को नीचे लाने में अभी एक लंबा रास्ता तय करना है.
यदि आप तायरा तक पहुंचने की इच्छा रखते हैं, तो आप उसे tairabhargava@gmail.com पर ई-मेल कर सकते हैं, वेबसाइट पर जा सकते हैं, या (ketto page) केटो पेज के माध्यम से इस पहल में अपना योगदान कर सकते हैं।