छत्तीसगढ: नक्सलवादी क्षेत्र दंतेवाड़ा में आदिवासी महिलाएं चलाएंगी E-Rikshaw

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E-Rikshaw : नक्सलवादी क्षेत्र की आदीवासी महिलाओं की एक पहल

वर्तमान में बड़े शहरों में कम दूरी के लिए e-rikshaw मीडिल क्लास लोगों के ट्रांस्पोर्टेशन का बड़ा अहम हिस्सा बन गया है.
सिर्फ बड़े शहर ही क्यों अब तो ये e-rikshaw नक्सलवाद का गड़ कहे जाने वाले दंत्तेवाड़ा में भी ,लोगों के आने जाने का मुख्य साधन बन गया है.
और उससे भी बड़ी रोचक बात यह है कि दंत्तेवाड़ा के इन सभी e-rikshaw को चलाने वाले कोई पुरूष नहीं बल्कि वहां की आदिवासी महिलाएं रहेंगी
दंतेवाड़ा की दंतेश्वरी सेवा ट्रांसपोर्ट सिस्टम
आपको बता दें कि जिले की प्रख्यात देवी दंतेश्वरी देवी के ही नाम से इस जिले का नाम दंतेवाड़ा पड़ा है. और अब इसी नाम से वहां की महिलाओं को रोजगार मुहैया कराने के लिए ‘दंतेश्वरी सेवा’ ट्रांसपोर्ट सिस्टम के तहत इस e-rikshaw को चलवाने की योजना है.
भारत के खतरनाक नक्सल प्रभावित क्षेत्र कहे जाने वाले दंतेवाड़ा के जिला एडमिनिस्ट्रेशन की कोशिश है कि दंतेश्वरी सेवा के जरिए वो आदिवासी महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार मुहैया करा सकें.
मुफ्त में बांटे जाएंगे e-rikshaw
दंतेवाड़ एडवांस नेटवर्क एंपावर्ड ग्रुप से जुड़ी आदिवासी महिलाओं को इस मुहीम के तहत मुफ्त में ई-रिक्शा बांटा जाएगा. इस पूरी योजना का 80 प्रतिशत खर्च सरकार उठाएगी वहीं बाकि 20 प्रतिशत सेल्फ हेल्प ग्रुप द्वारा दिया जाएगा.
जिला क्लेक्टर सौरभ सिंह और जिला चीफ एक्सेक्यूटिव ऑफिसर गौरव सिंह ने बताया कि इस योजना के पहले फेस का शुभारंभ मुख्यमंत्री रमन सिंह करेंगे. शुरूआत में 51 ई- रिक्शा महिलाओं को बांटे जाएंगे .जिसे बाद में जरूरत के हिसाब से धीरे धीरे और बढ़ाया जाएगा.
हर तरह की सुविधा से लैस है ये रिक्शा
इस इ-रिक्शा में यात्री से लेकर ड्राइवर तक क लिए हर तरह की जरूरी सुविधा मुहैया कराने की पूरी कोशिश की गई है.
शहर में 10 चार्जिंग स्टेशन बनाए जाएंगे जहां इन इ-रिक्शा को चार्ज किया जा सकेगा. ई-रिक्शा चालक को एक मैप दिया जाएगा जिससे वह अपने चार्जिंग स्टेशन और रूट के बारे में पता लगा सकती हैं.
इसके अलावा ई-रिक्शा में जीपएस ट्रैकिंग मशीन, मेडिकल किट के अलावा उनको एक स्मार्टफोन भी दिया जाएगा ,जिसका बटन दबाते ही मुश्किल समय में वह सीधे पुलिस स्टेशन को अपनी परेशानी से अवगत करा सकती हैं
गर्भवती महिलाओं की भी मिलेगी मदद
आपको बता दें कि इस योजना से जुड़े अधिकारी एक और स्कीम पर काम रहे हैं.
जिसका उद्देश्य जिले की गर्भवती महिलाओं को इस ई-रिक्शा से लाभ पहुंचाने का है. ताकि वो अपनी प्रसव पीड़ा में अस्पताल पहुंचने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकें .
ऐसे में ये ई-रिक्शा एंबुलेंस के तौर पर जिले की सभी गर्भवती महिलाओं को मुफ्त में मदद करेंगी . हालांकि ई-रिक्शा चालक इसकी फीस अस्पताल प्रशासन से प्राप्त कर सकती हैं.
गौरतलब है कि इस कोशिश से नक्सलवाद के डर में जी रही औरतों को खुद के पैरों पर खड़े होने का अच्छा मौका मिल जाएगा. ऐसे में वह इस अंधेरे से निकलकर खुशहाली की सुबह देख सकेंगी.