#FreePeriods : लंदन में फ्री पीरियड्स अभियान के लिए आगे आईं भारतीय मूल की अमिका जॉर्ज

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#FreePeriods : फ्री सैनिटरी नैपकिन के लिए है ये कैंपेन

#FreePeriods : ब्रिटेन में अमिका जॉर्ज ने स्कूल में पढ़ रही गरीब बच्चियों के लिए मासिक धर्म में फ्री पीरियडस अभियान की शुरूआत की है.

कुछ समय पहले इंग्लैंड के लीड्स शहर में 10 साल की एक लड़की के हर महीने एक-एक सप्ताह तक स्कूल से गायब रहने की खबर अखबार में छपि थी.
जिसका कारण उस अंग्रेजी अखबार में उसके होने वाले मासिक धर्म में उसके गरीब परिवारों का सैनिटरी नैपकिन खरीदने में असमर्थ होना बताया गया था .
वहीं जब नार्थ लंदन में रहने वाली  केरल राज्य की 18 वर्षीय अमिका जॉर्ज ने इस खबर को पढ़ा तो वो सकते में आ गई और उन्होंने तुरंत ही इस समस्या से निपटने के लिए कुछ करने का अपना मन बना लिया.
आपको बता दें कि अंग्रेजी अखबार में छपने वाली 10 वर्षीय लड़की की कहानी असामान्य नहीं थी. दुनिया भर में लाखों ऐसी लड़कियां हैं जो गरीबी के चलते मासिक धर्म के दौरान होने वाली पीड़ा को नहीं झेल पाने के कारण हर महीने कई दिनों तक स्कूल से गायब रहती हैं, जिसका असर उनकी शिक्षा पर पड़ता है.
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गरीबी के चलते सैनिटरी नैपकिन न खरीद पाने में के कारण एक सप्ताह स्कूल न जाने वाली लड़कियों के लिए अमिका ने एक बेतहर प्रयास करते हुए फ्री पीरियड्स कैंपेन की शुरूआत की है.
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इस तरह कैंपेन को मिली सफलता
इस अभियान के लिए अमिका ने ब्रिटेन सरकार को एक लिखित याचिका दायर की, जिसमें अमिका ने सरकार को मुफ्त स्कूल भोजन की जगह स्कूलों में पढ़ने वाली सभी बच्चियों को फ्री सैनिटरी नैपकिन देने की मांग रखी थी .
इस याचिका में उन्होंने लिखा कि एक जवान लड़की को अपने पीरियड्स में अंडरवीयर के अंदर मोजे और टॉयल्ट पेपर रखना किसी भी समाज के लिए अस्वीकार है. इसके साथ- साथ वो उनके स्वास्थ्य के लिए भी काफी खतरनाक साबित हो सकता है.
आपको बता दें इस याचिका के समर्थन में अमिका का लोगों ने भी पूरा साथ दिया. एक अनुमान के मुताबिक अब तक 1,39,458 से अधिक लोग उनकी इस याचिका पर हस्ताक्षर कर चुके हैं.
यही नहीं पिछले महीने यूके के कई प्रदशर्नकारियों ने डाउनिंग स्ट्रीट के सामने इकट्ठा होकर सरकार से लड़कियों के लिए मुफ्त सैनिटरी नैपकिन देने की मांग की. इस प्रदर्शन में यूके तमाम बड़े पॉलिटीशियन, एक्टर-एकट्रैस, मॉडल, खिलाड़ी भी शामिल थे.
गौरतलब है कि अमिका इस अभियान के साथ सक्रिय रूप से शामिल है और अब दुनिया भर से उन्हें समर्थन मिल रहा है. वह अपने इस अभियान को ब्रिटेन से आगे बढ़ाना चाहती हैं ताकि यह दुनिया भर की सांसदों तक पहुंच सकें.
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भारत में भी लोगों को करेंगी जागरूक
अमिका का कहना है कि वह भारत में प्रचारकों के साथ जुड़ना चाहती हैं, ताकि सभी लड़कियां की पहुंच मासिक धर्म के उत्पादों तक पहुंच सकें.
उन्होंने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि हम अपनी रूढीवादी सोच को पीछे नहीं छोड़ पा रहे हैं. जिसकी वजह से भारत में अब भी हजारों लड़कियां पूरी तरह से स्कूल छोड़ देती हैं ताकि उन्हें किसी के सामने शर्मसार ना होना पड़े.

साभार  – द हिंदू