डॉक्टर की नौकरी छोड़ HIV बच्चों के लिए काम कर रहीं डॉ. सना

HIV Volunteer Sana Shaikh
फोटो साभार - फेसबुक

HIV Volunteer Sana Shaikh : 19 साल की उम्र से ही HIV पीड़ित लड़की की वित्तीय जिम्मेदारी निभा रही सना 

HIV Volunteer Sana Shaikh : आज के वक्त में बहुत मुश्किल होता है जब आप लाखों कमाने वाली आराम की नौकरी छोड़कर कुछ ऐसा करें जो बिना लाभ के औरों के लिए समार्पित हो.

यह सोचना और भी मुश्किल तब हो जाता है जब आप एक युवा हैं और अपनी करियर के शुरूआती पड़ाव में है.
अपनी महत्वकांक्षाओं को भूलाकर समाजसेवा को अपनाना आसान नहीं होता और जो ऐसा करते हैं वो वाकई में इज्जत नवाजने लायक लोग होते हैं. ऐसी ही कहानी है डॉ सना शेख की.
सना को बचपन से ही डॉक्टर बनना था और इसकी तैयारी भी उन्होंने कम समय में ही शुरू कर दी थी.
बता दें कि ऐसा करने की प्रेरणा उन्हें अपने पिता से मिली थी, उन्हें लगता था कि डॉक्टर का जीवन सरल सीधा और विनम्रता सीखाता है.
इसीलिए जैसे ही सना ने अपना स्कूल पूरा किया, वो डॉक्टर बनने के लिए मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने पहुंच गई.
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डॉक्टरी की पढ़ाई के दौरान ही सना ‘साथी’ नाम के एनजीओ से जुड़कर उनके साथ काम करने लगी, जो घर से भागने वाले बच्चों की मदद करती है.
HIV पीड़ित लड़की को लिया गोद

ह्यूमन्स ऑफ बॉम्बे पर छपि पोस्ट के मुताबिक सना एनजीओ के साथ काम करने के दौरान ही एक 11 वर्षीय लड़की से मिली जो किसी से भी बात नहीं करना चाहती थी और ना ही खाना खाती थी. लेकिन वो उसे बड़े प्यार से समझाकर सही रास्ते पर लेकर आईं.

मगर कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि उस लड़की को एचआईवी है और फिर इसके बाद उन्होंने उसे वित्तीय रूप से अपनाने का फैसला किया.
हालांकी उस समय सना मात्र 19 साल की थी मगर उन्होंने उस लड़की की पूरी जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया और तब से आज तक वह उनके लिए उनकी बेटी की तरह है.
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नौकरी छोड़ एड्स नियंत्रण संगठन में शामिल हुई
डॉक्टरी से स्नातक होने के बाद पर सना एक कॉर्पोरेट अस्पताल में शामिल हो गई, लेकिन दस दिनों के भीतर ही उन्हें एहसास हुआ कि वह खुश और संतुष्ट नहीं है जैसे की वह एनजीओ के लिए काम करते वक्त होती थी.
इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ने का फैसला किया और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन में शामिल हो गईं. जहां वो नियमित आधार पर 100-120 टर्मिनल बीमारी से ग्रसित बच्चों के लिए काम करती है.
सना फिलहाल एमबीए की पढ़ाई को पूरी कर रही है ताकी इस डिग्री के बाद वो एक फाइनेंशियल तौर पर किसी कंपनी के साथ जुड़कर एनजीओ के लिए बेहतर काम कर सकें.
सना मानती है कि इस तरह के सामाजिक कामों से जनता के जीवन में सुधार करने की क्षमता है.

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