लखनऊ में तैनात होमगार्ड के बेटे ने पहले ही प्रयास में पास करी IES परीक्षा

Home Guard Son Shivam Qualifies IES Exam
फोटो साभार - सोशल

Home Guard Son Shivam Qualifies IES Exam : शिवम ने इस परीक्षा में 114वीं रैंक हासिल करी है

Home Guard Son Shivam Qualifies IES Exam : मन में उपर उठने के सपने और उसे पाने के लिए बुलंद हौसले हो तो शायद कामयाबी किसी के लिए भी अछूति नहीं रहेगी.

इन बातों को एक बार फिर सच साबित कर दिया है यूपी के नौजवान युवक शिवम मिश्रा ने, जिन्होंने पहली ही बार में भारतीय इंजीनियरिंग सर्विस(IES) जैसी कठिन परीक्षा पास कर ली है.
इंटौजा के आलादातपुर के रहने वाले शिवम ने इस परीक्षा में 114वीं रैंक हासिल करी है.उन्होंने ये रैंक इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग श्रेणी में हासिल करी है.
बता दें शिवम एक लोअर मीडिल क्लास से आते हैं इनके पिता दुर्गेशचंद्र मिश्रा लखनऊ में एसएसपी आवास पर होमगार्ड हैं.
शिवम के लिए ये कामयाबी इसलिए भी काफी माएने रखती हैं क्योंकी उनकी कक्षा 8 तक की पढ़ाई गांव के स्कूल में हुई थी.
पढ़ें – मिलिए 96 साल की उम्र में परीक्षा टॉप करने वाली केरल की दादी से, बन चुकी हैं मिसाल
परिवार के सदस्यों का रहा अहम योगदान
अपनी इस सफलता का श्रैय शिवम ने माता ,पिता दादा व चाचा को दिया है.उन्होंने बताया कि उनकी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने में पिता और चाचा दोनों का बड़ा हाथ है. वहीं बेटे के इस उपलब्धि पर परिवार में खुशी की लहर दौड़ पड़ी है.
परिवार के साथ साथ लखनऊ पुलिस ने भी अपने ऑफिशियल ट्विटर अकाउंट से शिवम को बधाई दी है.

http://

बता दें कि शिवम ने बीटेक में चारों साल को मिलाकर 82.4 फीसदी अंक हासिल किए थे.उनकी विज्ञान और गणित पर शुरू से ही अच्छी पकड़ थी शायद इसी वजह से उन्हें ये परीक्षा पास करने में आसानी हुई.
क्या और किस पैटर्न पर होती है IES परीक्षा
IES यानि की भारतयीय इंजीनियरिंग सेवा की परीक्षा ता आयोजन संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) कराता है.
इस परीक्षा को पास करने वाले लोगों की नियुक्ति भारतीय रेलवे, भारतीय रक्षा, इंजीनियरिंग सेवा, सेंट्रल वाटर इंजीनियरिंग, सेंट्रल इंजीनियरिंग सेवा और बोर्डर रोड इंजीनियरिंग सेवा आदि में क्लास 1 ऑफिसर के पदों पर होती है.
इस परीक्षा में शामिल होने के लिए आयु 21 से 30 वर्ष के बीच होनी चाहिए .इसके लिए आपके पास किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए.
पढ़ें – दुनिया में सबसे ज्यादा महिला पायलट भारतीय, वैश्विक औसत दोगुना
पूरी परीक्षा 1300 अंको की होती हैं.जिसमें पहला पेपर अंग्रेजी विषय का 200 अंको का होता है जबकि दूसरा, तीसरा और चौथा पेपर सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रोनिक इंजीनियरिंग इन विषयों पर आधारित होता है और यह तीनों ही पेपर 300-300 अंकों के होते हैं.
इसके बाद छात्रों को इंटरव्यू और साक्षात्कार भी देना होता है, जो 200 अंको का होता है. यह इंटरव्यू लिखित परीक्षा से पहले किया जाता है.
बता दें कि इंजीनियरिंग सेवा परीक्षा यानी IES भारत में सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है इसे पास करने के लिए छात्रों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है.