Inclov Mobile App : दिव्यांगों के लिए बने इस खास डेटिंग ऐप से जीवनसाथी तलाशने में मिल रही मदद

inclov mobile app
inclov

Inclov Mobile App : कई लोगों को मिल चुके हैं हमसफर

Inclov Mobile App : हम जब भी कभी अपने आस पास दिव्यागों को देखते हैं तो उनके प्रति हमारे दिल में अपने आप हमदर्दी जाग उठती है.

लेकिन हमारी नजर हमेशा उनके शरीर के उस हिस्से तक ही सीमित रह जाती है जो अक्षम है. हम कभी ये सोच नहीं पाते कि शारीरिक अक्षमता के अलावा भी उनके लिए बड़ी समस्या खुद के लिए जीवनसाथी का ना मिल पाना भी रहता है.
जानकारी के लिए आपको बता दें कि पूरे देश भर में लगभग 2.62 करोड़ दिव्यांग रहतें हैं जिनमें से केवल 5 प्रतिशत की ही शादी हो पाती है.
दिव्यांगों के बीच इसी समस्या का समाधान करने के लिए कल्याणी खोणा ने पहला मैचिंग, डेटिंग फॉर डिफरेंटली एबल्ड एप बनाया जिसका नाम उन्होंने इनक्लोव रखा है. इस नए ऐप के लांच होने के बाद अब विकलांग लोग भी अपने लिए सही हमसफर ढूंढने में इसका भरपूर लाभ ले रहे हैं.
इस ऐप की एक और सबसे बड़ी खासियत है कि यह एक स्क्रीन रीडर और टॉकबैक की मदद से दृष्टिहीन लोगों के लिए पूरी तरह से सुलभ है.
यह भी पढ़ें – Super Woman Lily : करोड़ों कमाने वाली स्टार यूट्यूबर लिली, हर फरियादी की करती हैं मदद
इसके अलावा अभी हाल ही में इसे कई रिजनल भाषाओं में भी लांच किया गया है, ताकि किसी को भी इसे समझने में   दिक्कत का सामना ना करना पड़े.
inclov mobile app
inclov mobile app
कल्याणी खोणा की खोज है इनक्लोव
इस ऐप की संस्थापक सदस्यों में से एक 24 वर्षीय कल्याणी खोणा की इस ऐप को बनाने में काफी अहम भूमिका रही है.
खोणा मानती हैं कि आज भी हमारे बीच तकरीबन दो तिहाई दिव्यांग अकेले रहते हैं उनके पास साथी तलाश करने का न ही कोई विकल्प है और न ही कोई सुविधा.
उन्होंने बताया कि वर्तमान में जितनी भी डेटिंग और शादी के लिए मैच मेकिंग साइट चल रही हैं उन्होंने इन लोगों के बारे में अब तक नहीं सोचा.
खोणा कहती हैं कि विकलांगता जब महिलाओं के साथ होती है तो परिवार इन्हें और भी बड़ा बोझ मानता है. और आम परिवारों में तो इनकी शादी होना ही अपने आप में घर वालों के लिए बड़ी चुनौती रहती है.
यह भी पढ़ें MP Widow Remarriage: मध्य प्रदेश में विधवा से शादी करने पर पति को मिलेंगे 2 लाख रुपए
क्राउडफंडिंग से जुटाए गए पैसे
आपको बता दें कि इनक्लोव नाम की इस ऐप की शुरूआत के लिए क्राउडफंडिंग की मदद से पैसे जुटाये गये हैं.
वहीं भारत में अब तक इसके तकरीबन 19 हजार रजिस्टर्ड यूजर्स हैं, जिसमें 80 फीसदी पुरुष हैं. खोणा का दावा है कि यह सभी तरह की दिव्यांग लोगों के लिए दुनिया का इकलौता पहला डेटिंग ऐप है.
कई लोगों को मिल चुके हमसफर
मिस व्हीलचेयर की रनरअप और नेशलन लेवल की शूटर रह चुकी 31 साल की श्रेया बताती हैं कि पिछले आठ साल से वो अपने लिए एक सही हमसफर ढ़ूढ़ रही थी. लेकिन उनकी इस मुश्किल का हल उन्हें इनक्लोव से मिला. इस ऐप से 10 दिन के अंदर ही उन्हें अपने लिए जीवनसाथी मिल गया.
ऐसी ही कहानी मीनाश्री की भी है, 31 साल की इस स्कूल टीचर को भी तमाम कोशिशों के बाद इसी ऐप पर अनूप के रुप में अपना हमसफर मिल गया जो आईएमए से ग्रेजुएट हैं. दोनों इसके लिए इनक्लोव को धन्यवाद देते हैं.
यह भी पढ़ें – Eco Friendly Marriage : भारत को स्वच्छ बनाने के लिए केरल में शुरू हुई इको फ्रेंडली शादियां
सिर्फ मैच मैकिंग नहीं आत्मविश्वास भी बढ़ा रहा इनक्लोव
इनक्लोव से जुड़े सूर्या बताते हैं कि कुछ साल पहले तक वो नाइट क्लब जानें के बारें में सोच भी नहीं सकते थे. लेकिन इनक्लोव के दिल्ली में हुए सेमीनार की पार्टी में पूरी रात नाचें.
उन्होंने बताया कि उस रात के बाद से उनके अंदर एक अलग तरह का आत्मविश्वास आ गया, और अब वो अपनी विकलांगता पर शर्म और झिझक दोनों को ही खुद से दूर कर चुके हैं.
गौरतलब है कि इनक्लोव इस तरह के सेमीनारों का आयोजन भी कराती है जहां विकलांग लोग आकर मिल सकें, एक दूसरे से जान पहचान बढ़ा सकें. अब तक इस तरह के 25 सेमीनार आयोजित किए जा चुके हैं.

For More Hindi Positive News and Positive News India Follow Us On FacebookTwitter, Instagram, and Google Plus