Kerala Nipah Virus : मरने के बाद जब अपनों ने किया किनारा तो डॉक्टर ने निभाया इंसानियत का फर्ज

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Kerala Nipah Virus : डॉ गोपकुमार ने निपाह से मरने वाले 12 लोगों का किया अंतिम संस्कार

Kerala Nipah Virus : यूं तो हम लोग मानते है कि डॉक्टर हमारा देवता होता है, वो हमें नया जीवन देता है.

लेकिन आज हम आपको जिस डॉक्टर के बारे में बताने जा रहे हैं उनकी कहानी थोड़ी अलग है. इस डॉक्टर ने मरीजों की जान बचाने के साथ साथ एक ऐसा फर्ज भी निभाया है जो शायद उसका था भी नहीं.
दरअसल केरल में कुछ दिनों पहले निपाह वायरस के कारण कई लोगों की जान चली गई. इनमें से कई ऐसे थे जिनके रिश्तेदारों ने इस खतरनाक वायरस के डर से इनकी लाश स्वीकार ने तक से मना कर दिया था.
फिर ऐसे में इन मृत लोगों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाई डॉ आर एस गोपकुमार ने.
केरल के कोझिकोड निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ आर एस गोपकुमार ने 12 ऐसे लोगों की अंतिम यात्रा करवाने का फैसला लिया जिनकी मौत के बाद उनके परिजन उन्हें लावारिस छोड़कर चले गए थे.
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41 वर्षीय गोपाकुमार ने मीडिया से अपनी बातचीत में बताया कि उन्होंने ना सिर्फ शवों को कंधा दिया बल्कि उनका अंतिम संस्कार भी धार्मिक रिती रिवाज के साथ किया.
गोपकुमार ने कहा कि वो बहुत दुखी थे कि मृतक के अंतिम संस्कार करने के लिए उसके प्रियजनों में से कोई भी नहीं था.
उन्होंने बताया कि हमने अंतिम संस्कार करने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वो चाहते थे कि हर व्यक्ति की अंतिम यात्रा गरिमापूर्ण हो, और ऐसा करना ना सिर्फ उनके अंदर कि कोई अच्छाई थी बल्कि उनका कर्तव्य भी था.
गौरतलब है कि निपाह वायरस के चलते केरल में अब तक 17 लोगों की जान जा चुकी है. पिछले महीने अकेले कोझिकोड क्षेत्र में ही 14 लोगों की जान गई जबकि पास के मलप्पुरम में तीन लोगों को इस बिमारी के चलते अपनी जान गंवानी पड़ी.
लाशों से भी होता है संक्रमण का खतरा
बता दें कि नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) के विशेषज्ञों की निगरानी में इस वायरस से ग्रसित लोगों का अंतिम संस्कार काराया जाता है क्योंकी इस वायरस के फैलने का खतरा जितना इंसान के जीवित होने से होता है उतना ही उसके शव से भी.
इसका उदाहरण देते हुए गोपकुमार ने बताया कि उन्होंने 61 वर्षीय मूसा के अंतिम संस्कार की देखरेख की थी, जिनके दो बेटे और भाई की पत्नी निपा वायरस का शिकार हो गई थीं. इसकी वजह यह थी कि शव को नहलाते वक्त उनके परिवार वाले इससे संक्रमित हो गए थे.
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इसके बाद से ही अंतिम संस्कार में और ज्यादा सर्तकता बर्ती जाने लगी है.यही नहीं वायरस के डर से ही कई बार अस्पताल वाले भी इस तरह की प्रकिया करने से इंकार कर देते हैं.
लेकिन गोपकुमार ने ना सिर्फ खुद ऐसे लोगों का अंतिम संस्कार किया बल्कि उन्हें अस्पताल के बाकि कर्मचारियों को भी ऐसा करने के लिए राजी किया.
डॉ गोपकुमार की इस इंसनियत से एक बात तो साफ हो जाती है कि डॉक्टर मरीज के लिए मरने के बाद भी अपने फर्ज को नहीं भूलता