अंग्रेजों के जुल्म ने किया था अलग, 72 साल बाद एक दूसरे से फिर मिले पति-पत्नी

Kerala Old Couple Love Story

Kerala Old Couple Love Story : 1946 में अंग्रेजों के खिलाफ हुए एक आंदोलन के बाद दोनों बिछड़ गए थे

Kerala Old Couple Love Story : अंग्रेजों के जुल्म ने हमारे देशवासियों को किस तरह और कितना प्रताड़ित किया इसके बहुत से उदाहरण आपको इतिहास की किताबों या फिर किसी बुजुर्ग की जुबानी सुनने को मिल जाएंगे.

ना जाने कितने लोगों को उनकी यातनाओं के कारण अपने परिवार से बिछड़ना पड़ा जिसका दर्द आज भी उनके घरवालों के दिलों में मौजूद हैं.
ऐसे ही अंग्रेजों के एक जुल्म का ताजा उदाहरण देखने को मिला है केरल में, जहां एक बुजुर्ग दंपति 72 साल की जुदाई के बाद 2018 में फिर से मिलें है.
93 वर्षीय ईके नारायणन नाम्बियार की जब शादी हुई थी तो वो मात्र 17 वर्ष के थे और उनकी पत्नी शारदा 13 साल की थी.
शादी के 10 महीने बाद ही वर्ष 1946 में नारायणन और उनके पिता रमन नांबियार ने मिलकर कावुमबाई आंदोलन का नेतृत्व किया था और फिर दोनों अंडर ग्राउंड हो गए.

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2 महीने बाद जब अंग्रेज पुलिस ने दोनों को पकड़ा तो उन्हें जेल भेज दिया गया और तो और उनकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस कभी भी उनके घर पहुंच जाती थी.
जिसके चलते शारदा अपने मायके चली गई और फिर दोबारा वो कभी उस घर में नई आई.
Kerala Old Couple Love Story
PC – News Minute
नारायण के भतीजे मधु कुमार ने मीडिया को बताया कि इन लोगों के जेल जाने के बाद हमारे घर को भी जला दिया गया.
मगर किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था तभी तो 72 साल बाद केरल के पारासिनिकादवू में शारदा के बेटे भार्गवन के घर पर नारायणन और शारदा की एक बार फिर मुलाकात हुई.
बता दें की अब नारायणन की उम्र 93 साल हो चुकी है वहीं उनकी पहली पत्नी शारदा अब 89 वर्ष की हो चली हैं.
अपनी पहली मुलाकात में दोनों की ही आंखें भरी हुई थीं और हजारों अनकही बातों के बावजूद दोनों एकदम चुप बैठे थे.
भावनाओं के आवेग के बीच नारायणन अपनी पहली पत्नी शारदा के पास चुपचाप बैठे रहे.
गौरतलब है की इस बारे में दोनों के परिवारों को पहली बार पता चला तो सबने मिलकर रामायणन और शारदा की दोबारा मुलाकत कराने का मन बनाया.
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हालांकी पहले तो शारदा मिलने के लिए तैयार नहीं हुई लेकिन फिर बड़े मान मनौअल के बाद वो राजी हो गई और फिर दोनों ही परिवार के मिलन समारोह के लिए भोज का भी आयोजन किया गया.
दोनों परिवार मिले और मिलने के बाद जल्द ही फिर से मिलने का वादा भी किया. आपको बता दें कि दूसरी शादी के बाद शारदा 30 साल पहले ही विधवा हो चुकी हैं और अभी उनके कुल 6 बच्चे हैं जिनमें से चार ही जिंदा है.
वहीं नारायणन ने भी जेल से बाहर आने के बाद दोबारा घर बसा लिए आज उनकी पोती शांता कवुमबाईदिसंबर 30′ के नाम से किसानों के संघर्ष पर एक किताब भी लिख चुकी हैं.