बांग्लादेश में बेसहारा रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद करने को पहुंचे भारतीय सिक्ख वॉलियंटर्स

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भारत में जब भी किसी तरह की प्राकृतिक आपदा आई हो या कोई और मुश्किल का सामना देश के लोग कर रहे हों तो आपको हमेशा कुछ सिक्ख लोग मदद करते दिख जाएंगे.
इस सिक्ख दल का नाम है ‘खालसा इंटरनेशनल’.
एक बार फिर इस दल ने लोगों के प्रति अपने सेवा भाव के नजरिए से इंसानियत की परिभाषा को सही साबित किया है. इस बार उनकी यह मदद बांग्लादेश के लोगों के लिए बड़ा सहारा बनकर सामने आई है.
बांग्लादेश-म्यांमार सीमा पर रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों की मदद करने के लिए भारत से पहुंचे इन सिक्ख वॉलियंटर्स ने गुरुवार से ‘गुरु लंगर’ शुरु कर दिया है.
वहीं बांग्लादेश सरकार ने भी इस टीम को शरणार्थियों के लिए राहत कार्य शुरू करने की अनुमति दे दी है.
‘द खालसा एड’ टीम के सदस्यों ने सीमावर्ती शहर तेकनाफ में अपना कैंप लगा रखा है. जहां से वो सभी
रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों तक खाने पीने की चीज पहुंचा रहे हैं.

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शुरू हो गया है ‘गुरु लंगर ‘
टीम के सदस्य अमरप्रीत सिंह ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि हमारी टीम ने शरणार्थियों के लिए लंगर और पानी की व्यवस्था शुरू कर दी है.
उन्होंने कहा कि पहले टीम पैक फूड आइटम और पानी की बोतलें शरणार्थियों को बांट रही थी. मगर गुरूवार को सरकार की अनुमति मिलने के बाद से हमने शाहपुरी द्वीप पर लंगर सेवा शुरू कर दी है.
उन्होंने कहा कि टेकनफ कस्बा (जहां रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में रह रहे हैं) बांग्लादेश की राजधानी ढाका से 10 घंटे की दूरी पर है, जहां से हम इनके लिए खाने-पीने का सामान ला रहे हैं. लेकिन हमारे लिए बारिश एक बड़ी समस्या बन रही है.
इस दल के दूसरे सदस्य जीवनजोत सिंह ने कहा कि दस दिनों तक पैदल चलकर ये लोग म्यांमार से यहां पहुंचे हैं, इनकी हालत बहुत खराब है. इन लोगों को तत्काल रूप से खाना-पानी और रहने की जगह देने के लिए ही हम यहां पहुंचे हैं.
उन्होंने ये भी जानकारी दी कि खालसा की एक और टीम बहुत जल्दी ही टेनकफ पहुंचेगी और रोहिंग्याओं की मदद के लिए जुटेगी ताकि सभी की मदद की जा सके.
खालसा ने और लोगों से भी मदद करने को कहा
खालसा इंटरनेशनल ने लोगों से भी रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद करने की अपील की है.
गौरतलब है कि यूनाइटेड नेशन ने रोहिंग्या मसले पर मानवाधिकार उल्लंघन के लिए म्यांमार की निंदा की है.
आपको बता दें कि पिछले वर्ष के अंत में भी ऐसे ही उग्रवादी हमले के बाद वहां हुई हिंसा के बाद लगभग 80,000 रोहिंग्या वहां से भागकर बांग्लादेश आए थे.
रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों पर भारत में भी कई जगहों पर प्रदर्शन हुए हैं. प्रदर्शनकारी रोंहिग्या शरणार्थियों को भारत में पनाह देने की वकालत कर रहे हैं.
वहीं भारत सरकार का कहना है कि रोंहिग्या मुसलमानों को उनके देश वापस भेज दिया जाएगा.