अच्छी पहल, अनाथों को 1 फीसदी आरक्षण देने वाला महाराष्ट्र बना देश का पहला राज्य

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Maharastra Orphans Reservation : इस हक के लिए एक अनाथ महिला ने निभाई नायिका की भूमिका

Maharastra Orphans Reservation : हमारा देश आज कल दिनों दिन आरक्षण की आग में झुलसता जा रहा है, समाज में इसने एक ऐसी लकीर बना डाली है जो लोगों को आपस में बांटने का काम कर रही है.

ऐसे में इसी आरक्षण का सहारा लेकर महाराष्ट्र सरकार ने एक खास वर्ग को नई पहचान और हक दिलाने की पहल करी है.
दरअसल महाराष्ट्र ने अपने प्रदेश के अनाथ बच्चों को सरकारी नौकरी और कॉलेज में दाखिले के लिए 1 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया है.

महिला व बाल विकास मंत्री पंकजा मुंडे ने बताया कि राज्य में माता-पिता नहीं होने के कारण अनाथ बच्चों को अपनी जाति के बारे में पता नहीं होता है. इस बात का ध्यान रखते हुए सरकार ने ऐसे अनाथ बच्चों को नौकरियों में आरक्षण का लाभ देने का फैसला लिया है.

उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन करते समय जाति के कॉलम में अनाथ बच्चे क्या लिखें, इसको लेकर दुविधा रहती है.
ऐसे अनाथ बच्चों को किसी विशिष्ट श्रेणी में शामिल नहीं किया जा सकता. इस कारण उन्हें शिक्षा, आर्थिक, सामाजिक सहूलियत और लाभ से वंचित रहना पड़ता है और उनके लिए भविष्य में भी मुश्किलें होती हैं.
लेकिन महाराष्ट्र सरकार के फैसले से अब अनाथ बच्चे खुले श्रेणी के पदों के लिए आवेदन कर सकेंगे.
सरकार की तरफ से बताया गया कि अनाथों को दिया जाने वाला आरक्षण सामान्य वर्ग के तहत ही लागू किया जाएगा यानी सरकार को जाति आधारित आरक्षण का कोटा बढ़ाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी जो पहले ही 52 फ़ीसदी तक पहुंच गया है.
इसलिए अब सामान्य वर्ग के लिए उपलब्ध सीटों में से एक फ़ीसदी सीटें अनाथों के लिए आरक्षित रहेंगी.
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अनाथ अमृता बनीं आरक्षण की नाय‍िका
अनाथों को आरक्षण दिलाने की पहल करने वाली नायिका बनने का काम किया है अमृता करवंदे ने.
अमृता ने अपनी जिंदगी तीन साल की उम्र से गोवा के एक अनाथ आश्रम से शुरू की थी मगर 18 साल की होते ही उन्हें अचानक अनाथालय छोड़ने को कह दिया गया.
इसके बाद वह अकेले ही पुणे चली आईं जहां उन्होंने ग्रैजुएशन के बाद महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग की परीक्षा दी लेकिन नतीजे आने पर उनका अनाथ होना आड़े आ गया.
दरअसल परीक्षा में सफल होने के लिए क्रीमीलेयर ग्रुप को 46 प्रतिशत और नॉन क्रीमीलेयर को 35 प्रतिशत कट ऑफ चाहिए था जिस वजह से अमृता को यह नौकरी नहीं मिल पाई.
इस बात का मलाल लिए अमृता काफी सोचने के बाद अकेले ही मुंबई निकल पड़ीं और लगातार कई दिनों तक मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मिलने की जुगत लगाती रहीं.
आखिरकार फडणवीस के सहयोगी श्रीकांत भारतीय से उनकी बात हुई और उन्होंने मुख्यमंत्री से अमृता की मुलाकात करवाई.
बता दें कि ये मुलाक़ात अक्टूबर, 2017 में हुई थी और ठीक तीन महीने बाद यानी जनवरी 2018 में महाराष्ट्र सरकार ने अनाथों के लिए सरकारी नौकरी में एक फ़ीसदी आरक्षण का प्रावधान लाने का एलान कर दिया.
इसी के साथ यह अनाथों को आरक्षण देने वाला देश का पहला राज्य भी बन गया है.