दृष्टिबाधित दिव्यांग अब मोबाइल ऐप के माध्यम से किताब भी सुन सकेंगे

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कहते हैं शिक्षा एक ऐसी चीज है जो कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करती.मगर यह भी सच है कि मानव जीवन में शिक्षा ग्रहण करने के सबको एक समान अवसर नहीं मिलते.जिसका सबसे बड़ा उदाहरण है हमारे समाज के दिव्यांग लोग. जिन्हें पढ़ाई लिखाई करने के लिए अंगिनत परिश्रम का सामना करना पड़ता है.
इसी परिश्रम को कुछ हद तक कम करने के लिए दिव्यांग विशेषज्ञों की एक टीम ने ‘हियर टू रीड’ नाम का एक मोबाइल ऐप बनाया है. इस ऐप के माध्यम से ना देख सकने वाले दृष्टिबाधित लोग अपनी स्थानीय भाषा में किसी भी किताब को ऑडियो में सुन सकेंगे.
इस ऐप का विकास अमेरिका के कार्नेगी मेलन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं, दिव्यांग विशेषज्ञों और आईआईटी दिल्ली के अधिकारियों ने मिलकर किया है. इस ऐप का प्रमुख उद्देश्य दृष्टिबाधित लोगों के लिए आसानी से किताब मुहैया कराना है. जिसे वो देखकर नहीं सुनकर पढ़ सके.
इस ऐप को बनाने वालों ने दावा किया है कि यह देश में अपनी तरह की पहली किताब है.
परियोजना का हिस्सा रहे दिव्यांग विशेषज्ञ होमियार मोबिदजी ने महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु जैसे राज्य के शिक्षा बोर्ड और एनसीईआरटी तथा एनआईओएस के लिए दसवीं और बारहवीं कक्षा के दृष्टि बाधित छात्रों के लिए पाठ्य पुस्तक बनाई है.
एक रिपोर्ट केअनुसार भारत में दृष्टिबाधित लोगों की जनसंख्या 1 करोड़ 20 लाख है.जबकि पूरे विश्व में इनकी जनसंख्या 3 करोड़ 90 लाख है.
भारत में आज भी दृष्टिबाधित बच्चे अपनी आबादी का केवल 5 प्रतिशत ही स्कूल जा पाते हैं.
भाषा के इनपुट से