Raipur Old Age Home: अपनों से ठुकराए बेसहारा बुजुर्गों को सहारा दे रहे रायपुर के 720 नौजवान

Raipur Old Age Home
फोटो साभार-फेसबुक

Raipur Old Age Home: हताश बुजर्गों के लिए बने श्रवण कुमार

Raipur Old Age Home: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के 720 से अधिक युवाओं का दल शहर के उन बेसहारा बुजुर्गों को सहारा दे रहा है, जिनके बच्चे बुढ़ापे के अंतिम पड़ाव में अपने माता-पिता को छोड़ चुके हैं.

ये नौजवान इन बेसहारा बुजुर्गों के लिए किसी श्रवण कुमार से कम नहीं.
 गौर करने वाली बात यह है कि ये नौजवान इन हताश बुजुर्गों को इतना प्यार देते हैं कि इन्हें खुद के बच्चों द्वारा दी गई पूर्व में यातनाएं याद ही नहीं रहती. अब ये सभी लोग इन युवाओं को ही अपने बच्चे समझकर खुश रहते हैं.
720 नौजवान सदस्य कर रहे निस्वार्थ सेवा
इन युवाओं ने ब्राह्मण युवा पहल नामक एक संस्था बनाई है, जिसमें करीब 720 सदस्य शामिल हैं.
संस्था के मुखिया रोहित कुमार कहते हैं कि बुढ़ापा जिंदगी का वो पड़ाव रहता है जिसमें अगर इंसान को दुख मिले तो उसके लिए जिंदगी काटना मुश्किल हो जाता है.
उन्होंने बताया कि रायपुर में सैकड़ों परिवार ऐसे हैं जिनके बच्चे पैसे कमाने के चक्कर में अपने बूढ़े माता-पिता को भूल चुके हैं.
ऐसे में जब वह इन बुजुर्गों की हालत देखते थे तो उन्हें बहुत तरस आता था. इसके बाद उन्होंने ऐसे बेसहारा बुजुर्गों की सेवा करने की ठानी.
रोहित बताते हैं कि उन्होंने इस नेक काम की शुरूआत वर्ष 2011 में की थी. उन्होंने जब इसके बारे में अपने दोस्तों को बताया तो वे भी इस काम में जुड़ते चले गए. और आज उनके साथ करीब 720 नौजवान जुड़ चुके हैं. जो रोजाना 2-2 परिवारों को समय देते हैं.
अस्पताल ले जाते हैं, सब्जी भी लाते हैं
ये नौजवान बुजुर्गों को बिल्कुल भी अकेलापन महसूस नहीं होने देते. सभी नौजवान इन बुजुर्गों को अपना पूरा समय देते हैं. जब किसी बुजुर्ग की तबियत खराब होती है, तो उसे अस्पताल भी ले जाते हैं.
उनके लिए रोजाना समय पर साग-सब्जी, आटा दाल सहीत खाने की सभी जरूरी चीजों का इंतजाम भी यही नौजवान करते हैं.
इतना ही नहीं, बुजुर्गों को मनोरंजन करने के लिए उनके साथ चैस, लूडो, कैरम, बैडमिंटन जैसे इंडोर गेम्स भी खेलते हैं.
बदकिस्मती के बावजूद चेहरे पर मुस्कान
वर्तमान में इन बुजुर्गों की संख्या हजार से अधिक पहुंच चुकी है. हालांकि शुरू में ये हताश रहते थे, इनको अपनी किस्मत पर रोना आता था.
लेकिन जब से इन नौजवानों ने इन बेसहारा बुजुर्गों को सहारा दिया है, तब से इन्हें अपनी किस्मत से कोई शिकायत ही नहीं रही. और आज इन बुजुर्गों के चेहरे पर हर समय मुस्कान ही नजर आती है.