सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं को मुफ्त कोचिंग दे रहे राजस्थान के ये दंपती

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फोटो साभार- फेसबुक
आज के जमाने में सरकारी नौकरी की जरुरत और अहमियत दोनों ही बहुत ज्यादा हैं. इसमें कोई शक नहीं कि बेहतर और सुरक्षित भविष्य के लिए हर युवा की पहली पसंद सरकारी नौकरी ही रहती है.
यही कारण है कि सरकारी विभाग के एक पद के लिए हजारों में आवेदन किए जाते है. इसी के सहारे बहुत से कोचिंग सेंटरों की दुकानें चल रही हैं.
युवाओं के बीच बढ़ती बेरोजगारी का ऐसा आलम है कि वो इन कोचिंगों की फीस में ही हजारों रूपए खर्च कर देते हैं. गांव में रहने वाले युवा के लिए यह और मुश्किल हो जाता है. क्योंकि अच्छी कोचिंग करने के लिए उन्हें गांव से शहर आना पड़ता है, जिसमें उनके रहना खाना का खर्च और बढ़ जाता है.
लेकिन वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो शिक्षा को व्यवसाय बनाने की बजाए इसमें सुधार करने की पहल कर रहे हैं.
जयपुर से 55 किमीं दूर दोसा जिले के एक छोटे से गांव में रहने वाले दंपति विनोद और सीमा भी कुछ इसी तरह का प्रयास वर्षों से कर रहे हैं. ये दोनों इसी गांव में रहकर सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं के भविष्य की तस्वीर बना रहे हैं.
पिछले छह सालों से विनोद और उनकी पत्नी गांव के और आसपास के बच्चों को मुफ्त शिक्षा दे रहे हैं ताकि वह सरकारी नौकरियों की परिक्षाएं पास कर सके.
कहां से हुई शुरूआत
बिहार के आनंद कुमार के ‘सुपर 30’ से प्रेरित होकर विनोद ने ‘निशुल्क गाइडंस क्लास’ की शुरुआत की.
2011 में 43 बच्चों के साथ शुरू हुई उनकी कोचिंग में पढ़ने वाले अब तक 300 बच्चे सरकारी नौकरी का सपना पूरा कर चुके हैं.
स्क्रीन टेस्ट के माध्यम से मिलता है प्रवेश
इस कोचिंग में पढ़ने के लिए छात्रों को पहले एक स्क्रीन टेस्ट देना पड़ता है. जिसमें से 60 बच्चों का चुनाव उनके अंको के आधार पर विनोद और उनकी पत्नी के द्वारा किया जाता है.
इसके बाद उनकी कोचिंग में 3 महीने का एक बैच शुरू होता है. जिसमें हर दिन चार घंटों की क्लास में छात्रों को गणित, सामान्य ज्ञान, अंग्रजी और रिसनिंग सिखाई जाती है.
इंडियन एक्सप्रेस को दिए अपने इंटरव्यूह में विनोद और मीना बताते हैं कि वो अपनी कोचिंग में किसी भी छात्र से कोई फीस नहीं वसूलते. बल्कि वो अपनी ही सैलरी से बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्चा उठाते हैं.
विनोद बताते हैं कि वो हर महीने लगभग 20 हजार रुपए पढ़ाने की जगह के किराए और बाकी कोचिंग के अन्य जरूरी कामों पर खर्च करते हैं.
विनोद कहते हैं कि ‘निशुल्क गाइडंस क्लास’ की सफलता की गवाही उसके छात्रों का प्रदर्शन है, और यही मेरी असली कमाई भी.
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आपको यह जान कर हैरानी होगी कि युवाओं के हित में इतना सफल काम करने के बावजूद विनोद ने अब तक इसे किसी  एनजीओ के तौर पर भी रजिस्टर नहीं करवाया है. और ना ही इस कोचिंग को चलानें में किसी बाहरी की मदद ले रहे हैं.
आईएस बनना चाहते थे विनोद
विनोद बताते हैं कि उनका खुद का जीवन बहुत से आभावों से गुजरा था. उन्होंने उधार लेकर अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की थी. उनका सपना आईएस बनने का था. जिसके लिए वो 3 बार इंटरव्यू राउंड तक भी पहुंचे लेकिन उसके आगे नहीं बढ़ पाए.
विनोद ने गरीब बच्चों को शिक्षा ना मिल पाने के दर्द को समझते हुए ही अपनी निशुल्क कोचिंग की शुरूआत की. क्योंकि वह नहीं चाहते थे की पैसों के अभाव में कोई और सपना अपना दम तोड़े.
हालांकि विनोद ने जब मुफ्त में छात्रों को पढ़ाना शुरू किया तो गांव के लोगों ने उनकी इस पहल का खूब मजाक उड़ाया. मगर आज वही लोग उन्हें अपने गांव की शान मानते हैं.
आज दोसा जिले के हर इंसान के दिल में उनके लिए इज्जत है और दिल में भरोसा कि कोई है जो आज भी मानवता को खुद में जिंदा रखे हुए है.
विनोद जो कुछ भी कर रहे हैं वह एक सीख है हमारे लिए और उन तमाम लोगों के लिए जो शिक्षा को व्यवसाय बनाए बैठे हैं.
विनोद औऱ उनकी पत्नी मानी की कमाई आप को उनकी जेब में नहीं मिलेगी क्योंकि उनकी कमाई तो उन आंखों की चमक में है जिनके सपनों को विनोद ने पूरा किए हैं.