शिक्षक बनने के सपने को पूरा करने के लिए गांव की गलियों में दूध बेच रही नीतू

फोटो साभार-हिन्दुस्तान टाइम्स
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भारत में लड़कियों की पढ़ाई-लिखाई के प्रति हमारी क्या मानसिकता है यह किसी से छिपी हुई बात नहीं है. बचपन से ही उन्हें अपनी पढ़ाई को जारी रखने के लिए अनेक प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. कुछ पारिवारिक गरीबी के कारण विवश रहती हैं तो कुछ को समाज की उस मानसिकता के आगे झुकना पड़ता है जिनमें लड़कियों की जगह स्कूल नहीं रसोई घर में समझी जाती है.
राजस्थान में रहने वाली 19 वर्षीय नीतू शर्मा भी कुछ इसी मानसिकता से गुजर चुकी हैं. बचपन से ही शिक्षक बनने की ख्वाहिश रखने वाली नीतू के सपने को उस वक्त झटका लगा जब उनके पिता बनवारी लाल शर्मा ने उन्हें पैसों के अभाव में आगे पढ़ाने के लिए मना कर दिया. मगर उस वक्त नीतू ने हिम्मत हारने की बजाए यह तय कर लिया कि वो किसी भी हालात में अपनी पढ़ाई को नहीं छोंडेगी.
उन्होंने अपनी पढ़ाई को जारी रखने के लिए गावों में घर -घर जाकर दूध बेचना का काम शुरू किया. और उनके इस काम में मदद की उनकी बड़ी बहन सुषमा ने.
आज भी दोनों बहनें सुबह 4 बजे उठकर एक गांव से दूसरे गांव लोगों के घरों में दूध पहुंचाने का काम कर रही हैं. इस काम को पूरा करने के लिए दोनों बहनें बाइक का सहारा लेती हैं.
 एक बार सुबह के दूध पहुंचानें के कोटे को पूरा करने के बाद नीतू अपने रिश्तेदार के घर में बाइक छोड़कर राजस्थान स्टेट सर्टिफिकेट कोर्स में कंप्यूटर सिखने के लिए जाती है. वहीं दोपहर 1 बजे घर आने के बाद दोनों बहनें फिर शाम को दूध की डिलिवरी करने के लिए निकल जाती हैं.
नीतू के घर में उनसे बड़ी पांच बहने हैं जिनमें से दो बहनों की शादी हो चुकी है. जबकि उनसे छोटा एक भाई भी है जो अभी 10वीं में पढ़ रहा है.
नीतू ने क्रमशः 10 और 12 की परीक्षाएं 56% और 58% के साथ ,सीनियर सेकेंडरी स्कूल से उत्तीर्ण की है. जबकि उनकी बेचलर की पढ़ाई अभी दूसरे साल में चल रही है.
नीतू का सपना पाइपलाइन विषय में एक शिक्षक बनने का है, जिसके लिए वो बैचलर ऑफ एजुकेशन की अपनी पढाई को पूरा कर रहीं है.
हिंदुस्तान टाइम्स को दिए अपने इंटरव्यूह में नीतू ने कहा कि इस पृथ्वी में ऐसा कोई भी काम नहीं हो जिसे किया नहीं जा सकता है.
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने बाइक पर बैठकर लोगों के घर-घर जाकर दूध पहुंचाने का काम शुरू किया तो लोगों ने उनका बहुत मजाक बनाया. यहां तक की उनके पिता ने भी इस काम का काफी विरोध किया. आज भी उनका मानना है कि लड़कियों का इस तरह घूमना-फिरना सही नहीं है.
उन्होनें कहा कि मगर मेरा शिक्षक बनने के सपना दृढ़ था , जिसे मैंने कभी टूटने नहीं दिया.
नीतू रोजाना सुबह शाम मिलाकर 90 लीटर दूध लोगों के घरों तक पहुंचाती हैं. जिसकी वजह से उन्हें 12,000 रुपए की हर महीने आमदनी हो जाया करती हैं.