सराहा- एक ऐसा मोबाइल ऐप जिसमें बोलने की पूरी आजादी, वो भी बिना अपना नाम बताए

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हर मुद्दों पर बिना अपनी पहचान बताए खुलकर बात करने की आजादी देने वाला सराहा ऐप अब पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया है.
डिजिटल इंडिया को प्रमोट करने वाले इस ऐप को ,सऊदी अरब के प्रोग्रामार जैन अल-अबिदीन तावफीफ ने तैयार किया है. जून में आए इस ऐप ने महज 2 ही महीने में युवाओं के स्मार्टफोन में अपनी जगह बना ली है. अब तक लाखों युवा इस ऐप को डाउनलोड कर इसका काफी इस्तेमाल करने लगे हैं.
क्या है सराहा ऐप?
सराहा एक सोशल मेसेंजर ऐप है जहां लोग हर मुद्दे पर अपनी बात को खुलकर एक दूसरे से साझा कर सकते हैं. इस ऐप की सबसे खास बात यह है कि इसमें लोग अपनी पहचान को छिपाने के लिए स्वतंत्र रहेंगे. डेवलपर्स ने साराह मैसेजिंग ऐप में संदेश भेजने वाले का नाम न छापने की गारंटी दी. इस ऐप की मदद से आपको अपने कर्मचारी और दोस्तों से एक निजी तरीके से बात करने में मदद मिलेगी.
ऐप का दुरुपयोग
इस ऐप के माध्यम से नफरत करने वाले लोगों को एक नया तरीका मिल गया है. वो अपनी पहचान छिपाकर इसका दुरुपयोग कर रहे है. मीडिया रिसर्चर अनुषी जैन का मानना है हम नफरत के युग में ​​रहते है. औऱ ये सराहा ऐप सोशल मीडिया पर हमसे घृणा करने वाले लोगों का एक प्लेटफार्म बन चुका है.
उन्होंने कहा कि हर जगह नफरत का माहौल है, और जब यह नाम न छापने का लाभ दे रहा है तो इसकी लोकप्रियता बढ़ती जा रही है. जिन लोगों को दूसरों को धमकाना होता है .वह अब इसी ऐप का सहारा लेते हैं.
गुड़गांव की एक ग्राफिक्स पेशेवर अमृता यूसुफ का कहना है कि उनके सराहा प्रोफाइल पर दोस्तों और सहकर्मीयों ने उन्हे एक खूबसूरत संदेश दिया था. मगर एक महिला होने के नाते उन्हें ट्रोल कर दिया गया. और उनसे लोगों ने महिला संबंधित अत्यधिक गलत बातें पूछ डाली.

साइन अप से पहले शर्तों को पढ़ें

दिल्ली के मनोचिकित्सक अंकित काताल का मानना ​​है कि ऐसे एप के लिए साइन अप करते समय उपयोगकर्ताओं को सभी के लिए तैयार रहना चाहिए.सराहा ऐप ईमानदार प्रतिक्रिया के लिए है, और ईमानदारी का मतलब किसी भी तरह से अच्छा नहीं है. उन्हें इस बात से भी अवगत होना पड़ेगा कि समाज में नफरत करने वाले लोगों की संख्या भी कम नहीं है.
इस ऐप से युवाओं को केवल अच्छे संदेश प्राप्त होने की उम्मीद है. जिसे वो अपनी सोशल मीडिया पर साझा कर सकें.