शिवलिंग पर चढ़ाए गए दूध को बर्बादी से कुछ यूं रोक रहा बेंगलुरु का गंगाधारेश्वर मंदिर

Solution For Milk Waste In Temple
demo pic

Solution For Milk Waste In Temple : मंदिर में अगर आप दूध चढ़ाएंगे तो प्रसाद में आपको छाछ मिलेगा

Solution For Milk Waste In Temple : हमारा भारत बहुत ही प्राचीन और विभिन्न परंपराओं को अपने साथ लेकर चलने वाला देश है.

एक सेक्यूलर मुल्क होने की वजह से यहां रहने वाले हर धर्म के लोगों की अपनी आस्था और परंपरायें हैं जिसमें सैकड़ों साल से लोगों का विश्वास वैसे का वैसा ही बना हुआ है.
आपने आमतौर पर देखा होगा कि हिंदू धर्म में भगवान शिव को खुश करने के लिए लोग मंदिरों में शिवलिंगो पर दूध चढ़ाते हैं जो इसी तरह नालियों में बहकर ज्यादातर व्यर्थ हो जाता है.
हालांकी कुछ लोग इसे आस्था का विषय मानते हुए दूध की इस बर्बादी पर कोई सवाल नहीं उठाते मगर वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो समय के साथ बदलते हुए इस तरह दूध को शिवलिंगों पर ना चढ़ाने की सलाह देते हैं.
वहीं कुछ मंदिरों में चढ़ाए हुए इस दूध का सही उपयोग भी किया जाने लगा है, ऐसा ही कुछ बंगलुरू के गंगाधारेश्वर मंदिर में भी हो रहा है.
पढ़ें – अंग्रेजों के जुल्म ने किया था अलग, 72 साल बाद एक दूसरे से फिर मिले पति-पत्नी
बंगलुरू के गंगाधारेश्वर मंदिर में अगर आप दूध चढ़ाएंगे तो प्रसाद में आपको छाछ मिलेगा.
दरअसल इस मंदिर में रोज श्रद्धालु कई लीटर दूध चढ़ाते हैं जो पहले नालियों में बहकर बर्बाद हो जाता था, लेकिन अब मंदिर प्रशासन ने इसके लिए एक नया तरीका खोज निकाला है.
Solution For Milk Waste In Temple
buttermilk
अब इस मंदिर में श्रद्धालु जो भी दूध चढ़ाएंगे उसका छाछ बनाकर उन्हें ही प्रसाद में बांट दिया जाता है.
बंगलुरू मिरर से बात करते हुए मंदिर प्रमुख ईश्वरनंदा स्वामी बताते हैं की मैं बहुत दिनों से इस बात को लेकर सोच कर रहा था कि हम श्रद्धालुओं की किस तरह बेहतर सेवा कर सकते हैं.
तभी मेरा ध्यान अपने हां चढ़ाए जाने वाले दूध की बार्बादी पर पड़ा फिर मैंने तय किया कि हम मंदिर में चढ़ने वाले दूध का छाछ बनाकर भक्तों में बांटेंगे.
उन्होंने कहा की हम मंदिर प्रशासन की मदद से भक्तों द्वारा दूध को भगवान पर चढ़ाते वक्त विशेष सावधानी बरतते हैं ताकी सिंदूर या हल्दी जैसी कोई चीज इसमें न मिले.
पुजारियों की यह जिम्मेदारी होती है कि दूध पूरी तरह से स्वच्छ रहे इसके बाद हम एक बहुत सफाई वाले तरीके से दूध को फरमेंट करते हैं जिससे ये छाछ बन जाता है.
पढ़ें – जानें कौन है सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने वाली दो महिलाएं,कैसे किया दर्शन
इस प्रक्रिया में एक दिन का समय लगता है इसलिए हम मंगलवार को छाछ बांटते हैं. इस छाछ की सफाई और शुद्धता पर बहुत ध्यान दिया जाता है और फूड एक्सपर्ट से लगातार सलाह ली जाती है.
उनके ऐसा करने के बाद से लोगों की इस मंदिर में दिलचस्पी और बढ़ गई है और ज्यादा दान आने लगा है. इस तरह से श्रद्धा को जरूरत से मिलाकर नई मिसाल तैयार की गई है.
गौरतलब है की अगर देश के सभी मंदिरों में ऐसी व्यवस्था शुरू हो जाए तो शायद हम अपने आने वाले समाज के लिए एक अद्भुत उदाहरण पेश कर सकते हैं.