बड़ा फैसला : अब ट्रांसजेंडर की शिकायत पर भी दर्ज होगी सैक्सुअल हैरेसमेंट की FIR

Transgender File Sexual Harassment Complaints
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Transgender File Sexual Harassment Complaints : IPC की धारा 354A के तहत दर्ज होगी शिकायत 

Transgender File Sexual Harassment Complaints : ट्रांसजेंडर हमारे देश का एक ऐसा वर्ग है जो हमेशा से ही अपने कभी ना मिलने वाले हक की लड़ाई को लड़ता आ रहा है.

किसी ने इन्हें अभिषाप की नजर से देखा तो कोई इन्हें मात्र एक मनोरंजन की वस्तु मानते हैं, इस समुदाए को अपने अधिकार पाने के लिए क्या क्या सहना पड़ा है, ये किसी से नहीं छिपा है.
और शायद इसी का नतीजा है कि अब लोगों ने इनके प्रति अपनी नजर को बदला है,अदालत से लेकर सरकारें तक सभी ने एक सुर में इनकी खोई हुए प्रतिष्ठा को वापस दिलाने में एक साथ कदम बढ़ा रही हैं
इसी क्रम में शुक्रवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने  इन ट्रांसजेंडरों को सैक्सुअल हैरेसमेंट की एफआईआर दर्ज करने का हक देकर उन्हें एक बार फिर बराबरी का ऐहसास दिलाया है.
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा की खंडपीठ ने दिल्ली पुलिस को कहा कि ट्रांसजेंडर जब छेड़छाड़ संबंधी IPC की धारा 354ए के तहत अपनी शिकायत देगा तो पुलिस उसकी एफआईआर दर्ज करेगी.
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उन्होंने यह फैसला दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली एक ट्रांसजेंडर छात्रा की शिकायत के बाद सुनाया.
याचिका में ट्रांसजेंडर ने कहा कि कॉलेज में उसका कुछ छात्रों ने यौन शोषण किया और जब वह अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास गई तो वहां उसकी एफआईआर नहीं दर्ज की.
छात्रा ने अपनी याचिका में दावा किया है कि पुलिस ने उसकी शिकायत पर विचार करने से मना कर दिया, क्योंकि वह महिला नहीं है.
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि हालांकि जन्म के समय वह पुरूष थी लेकिन बड़े होने के बाद उसने लिंग बदलवाने वाली सर्जरी कराने का निर्णय किया.
हालांकी पुलिस ने बताया कि दिल्ली पुलिस आयुक्त ने मामले में निर्देश जारी करते हुए कहा है कि ‘‘भारतीय दंड संहिता की धारा 354 ए के तहत अगर कोई ट्रांसजेंडर शिकायत दर्ज कराता है तो उसे नालसा मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के आलोक में कानून के तहत दर्ज किया जाना चाहिए .

क्या है धारा 354A

महिलाओं के साथ होने वाली छेड़छाड़ या उत्पीड़न के मामले में पुलिस अक्सर यही धारा दर्ज करती है.
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इन मामलों में महिला की मर्यादा और मान सम्नान को क्षति पहुंचाना या फिर गलत मंशा के तहत के उसके साथ किसी प्रकार की शारीरिक हिंसा के समय में इस धारा के तहत FIR दर्ज हुआ करता है.
बता दें कि इस धारा के तहत अगर आरोपी पर दोष सिद्ध होता है तो उसे 2 साल तक की कैद या जुर्माना या फिर दोनों ही सजा हो सकती है.