University Of America की लेक्चरार बीना जोशी ने उठाया गरीब बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा

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University Of America: 17 सालों से गरीब बच्चों को निशुल्क पढा रहीं

University Of America: University Of America की हवाई यूनिवर्सिटी में लेक्चरार रह चुकी 74 वर्षीय बीना जोशी तंगहाल बच्चों का भविष्य संवारने में लगी लगी हुई हैं.

बीना जोशी पिछले 17 वर्षों से देहरादून के गरीब बच्चों की शिक्षा का जिम्मा संभाल रही हैं.
उनकी बच्चों की शिक्षा के प्रति समर्पित भाव का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने घर का नाम भी “आओ पढ़ें” रखा हुआ है. जिसकी पहली मंजिल में बने छह कमरों को उन्होंने गरीब बच्चों की कक्षा के लिए सौंप दिया है.

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बीना ने ‘’शाला’’ (घर) को बनाया ‘’पाठशाला’’
देहरादून की इंदिरा नगर निवासी बीना जोशी वर्ष 2000 से गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं.
बीना ने बताया कि उनके पति डॉ. भूषण कुमार जोशी कुंमाऊ यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड कुलपति हैं.
बीना बताती हैं कि जब वो 1998 में अपने पति के रिटायरमेंट के बाद देहरादून आई तो घर पर खाली रहने लगी, जो उन्हें काफी अखड़ता था. क्योंकि बीना जोशी का शिक्षा के क्षेत्र में 40 सालों का अनुभव रहा है, इसलिए उनसे घर पर खाली बैठा नहीं गया.
इसके बाद उन्होंने अपना मन लगाने के लिए समीप के चार गरीब बच्चों को घर पर पढ़ाना शुरु किया. कुछ समय बाद बीना को इस नेक काम में इतना आनंद मिलने लगा कि उन्होंने अपनी कक्षा को एक वृहद रुप दे दिया.
आज बीना जोशी शास्त्रीनगर की मलिन बस्तियों के 35 बच्चों को रोजाना पढ़ा रही हैं. इसके लिए उन्होंने वेतन के आधार पर तीन शिक्षक भी रखे हुए हैं. जो गणित, इंग्लिश व कंप्यूटर साइंस के विषय पर विशेष ध्यान देते हैं.
बच्चों की लगातार संख्या को देखते हुए जोशी ने अपने घर की पहली मंजिल को पाठशाला का रूप दे दिया है. उनके परिवार का कोई भी सदस्य मंजिल में बने इन छह कमरों का उपयोग नहीं करता है. क्योंकि इनका उपयोग सिर्फ बच्चों की कक्षाओं के लिए ही किया जाता है.
बच्चों का रखा जाता है खास ख्याल
ऐसा नहीं है कि बीना जोशी की पाठशाला में बच्चों की शिक्षा पर ही ध्यान दिया जाता है. इसके अलावा वहां बच्चों के खेल-कूद, खान-पान, मनोरंजन आदि पर भी विशेष ध्यान रखा जाता है.

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हर तीन माह में बच्चों की पार्टी
जब बच्चों की क्लास खत्म हो जाती है तो बच्चों को पोषणयुक्त आहार के रूप में फल, रस, दूध, अंडा आदि दिया जाता है. इसके अलावा प्रत्येक तीन माह में बच्चों के लिए पिकनिक और पार्टी का भी आयोजन कराया जाता है.
खुद से मेहनत करके जुटाती हैं पैसा
दिलचस्प बात तो यह है कि संपन्न परिवार से होने के बावजूद बीना जोशी बच्चों के खातिर 74 साल की उम्र में भी मेहनत कर रही हैं.
बीना ने बताया कि उन्होंने प्राइवेट कॉलेजों में सेवाएं दी हैं, जिस कारण उनकी पेंशन नहीं है.
बीना कहती हैं कि बच्चों की कक्षा में प्रतिमाह 20,000 रूपये का खर्चा आता है. इसके लिए वह स्वयं चना मसाला, मीट मसाला, हल्दी, धनिया पाउडर, दालों की बड़ियां बनाकर बेचती हैं. और इससे आने वाले पैसों से वह कक्षा का संचालन करती हैं.
इसके अलावा अमेरिका में फार्मास्युटिकल्स कंपनी में कार्यरत उनका बेटा भी अपने वेतन का कुछ हिस्सा गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए भेजता रहता है.
हवाई यूनिवर्सिटी समेत देश के बड़े कॉलेजों में रह चुकी लेक्चरार
बीना जोशी ने बताया कि वह हवाई यूनिवर्सिटी में अमेरिकन्स को हिंदी विषय पढ़ा चुकी हैं. वहां वह दो साल रहने के बाद वापस भारत आ गई. और यहां पर उन्होंने लखनऊ के प्रतिष्ठित काल्विन तालुकदार कॉलेज व अन्य में वर्षों तक अपनी सेवाएं दी.