भारत में पीने लायक पानी की उपलब्धता में आ रही तेजी से कमी – नासा

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Nasa Fresh Water Warning : भारत के उत्तरी क्षेत्र में फसल की सिंचाई बड़ा कारण

Nasa Fresh Water Warning : भारत में स्वच्छ जल संकट को लेकर अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने अपने विस्तृत अध्ययन के माध्यम से हमें आगाह करने का काम किया है.

नासा ने अपने इस अध्ययन में दुनिया के उन स्थानों का पता लगाया है जहां पीने लायक ताजे पानी की उपलब्धा में बदलाव देखा जा रहा है.
इस अध्ययन में नासा ने भारत को भी उन संवेदनशील स्थानों में शामिल किया है जहां पानी के स्त्रोतों के अधिक मात्रा में दोहन के कारण स्वच्छ पानी की उपलब्धता में तेजी से गिरावट दर्ज की गई है.
बता दें कि नासा का इस तरह का ये पहला अध्ययन है जिसमें उसने धरती की निगरानी का इस्तेमाल करने वाले सैटेलाइट का प्रयोग किया है.
नासा के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर के वैज्ञानिकों द्वारा मानव गतिविधियों के आधार पर किए गए इस अध्ययन में यह सामने आया है कि जल संकट का सामना ना करने वाले धरती के उन भागों में स्वच्छ पानी की उपलब्धा बढ़ रही हैं. जबकि पानी की कमी वाले इलाके और सूखते जा रहे हैं.
वैज्ञानिकों ने इसके पीछे मानव जल प्रबंधन और जलवायु परिवर्तन समेत कई कारणों का दोषी माना है.
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फसल की संचाई बड़ा कारण
अंतराष्ट्रीय अंग्रेजी अखबार द गार्जियन मे छपि रिपोर्ट के मुकाबिक कैलिफोर्निया और ऑस्ट्रेलिया के अलावा उत्तरी- पूर्वी भारत और पश्चिम एशिया के देशो को जल स्त्रोतों के अत्यधिक दोहन करने के मामले में संवेदनशील स्थान माना है.
वहीं इस अध्ययन के अनुसार भारत के उत्तर भारत में गेहूं और धान जैसी फसलों की सिंचाई के लिए भूजल का दोहन वहां पानी की उपलब्धता में तेजी से गिरावट का मुख्य कारण बन रहा है.
वैज्ञानिकों ने माना कि इसी वजह वहां हालात इस तरह पहुंच चुके हैं कि बारिश के बावजूद भी भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है.
जानकारी के लिए बता दें कि इस अध्ययन को पूरा करने के लिए नासा और जर्मन एयरोस्पेस सेंटर के संयुक्त मिशन ग्रैविटी रिकवरी एंड क्लाइमेट एक्सपेरिमेंट (ग्रेस) अंतरिक्ष यान के 14 साल के अभियान से मिले डाटा का उपयोग किया गया है.
गौरतलब है कि नासा की ये रिपोर्ट हमें आगाह करती है कि अगर पानी के स्त्रोतों के बड़ी मात्रा में दोहन करना हम बंद नहीं करते हैं तो आगे भविष्य में इसके अंजाम शायद बहुत बुरे हो सकता है.