World Ozone Day 2018 : आज का दिन है उसके नाम जो करती है हमारी पृथ्वी का संरक्षण

World Ozone Day 2018
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World Ozone Day 2018 : इस बार ओज़ोन डे की जागरूकता थीम Keep Cool And Carry On रखा गया है.

World Ozone Day 2018 : ओजोन गैस समूची मानव जाति के लिए रक्षक कही जाती है, 1955 से हर साल 16 सितंबर के दिन वर्ल्ड ओज़ोन डे के रूप में मनाया जाता है.

इतने सालों से मनाए जा रहे इस दिन की खास बात यह है कि हर बार इसे मनाने के लिए एक थीम रखी जाती है और इस बार 2018 की थीम ‘कीप कूल एंड कैरी ऑन’ रखी गई है.
कैसे और क्यों शुरू हुआ वर्ल्ड ओज़ोन डे
इस दिवस को मनाने का सिलसिला 62 साल पहले ही शुरु हो गया था लेकिन 19 दिसंबर 2000 को ओजोन परत की कमी के चलते मॉन्ट्रियल कन्वेंशन पर हस्ताक्षर करने के लिए इस दिवस को संयुक्त राष्ट्र द्वारा नामित कर लिया गया.
बता दें कि मॉन्ट्रियल कन्वेंशन विश्वभर के हानिकारक पदार्थों और गैसों को समाप्त करके ओजोन परत(Ozone Layer) की रक्षा करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ट्रीटी है, जो संरक्षण का काम करती है.
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इस दिवस को ओजोन परत पर होने वाली हानि को लेकर जागरुकता बढ़ाने के लिए शुरू किया गया था,
जिसमें पर्यावरण के महत्व और इसे सुरक्षित रखने के महत्वपूर्ण साधनों के बारे में लोगों को जागरुक किया जाता है. सरल शब्दों में कहें तो इसे मनाने का उपलक्ष्य वायुमंडल में ओजोन की परत का संरक्षण करना है.
क्या है ओजोन परत
ओजोन परत ओजोन अणुओं की एक परत है जो विशेष रूप से 20 से 40 किलोमीटर के बीच के वायुमंडल के समताप मंडल परत में पाई जाती है. ये एक ऐसी परत है जिसके बिना पृथ्वी पर जीवन संभव नहीं है.
वैज्ञानिकों के अनुसार ओजोन परत के सुरक्षित न होने से मनुष्यों, पेड़-पौधों और जीव प्राणियों यानि प्रत्येक जीवत वस्तु का जीवन खतरे में पड़ जाएगा.
 ओज़ोन परत की कमी या उसमें किसी प्रकार के छेद पड़ जाने से प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, जैसे सर्दियों की तुलना में अधिक गर्मी होती है, सर्दियां अनियमित रूप से आती हैं और ग्लेशियर पिघलने शुरू हो जाते हैं.
बता दें कि सूर्य की धरती की तरफ आने वाली पैराबैगनी किरणों का लगभग 99 फीसदी भाग ओजोन मंडल द्वारा सोख लिया जाता है.
जिससे पृथ्वी पर रहने वाले प्राणी वनस्पति तीव्र ताप एवं विकिरण से सुरक्षित रहते हैं.
यही कारण है कि इस लेयर को ओजोन मंडल या ओजोन परत का सुरक्षा कवच और जीवनदान कहा जाता है.
ओजोन लेयर से संबंधित कुछ तथ्य
वायुमंडल में पायी जाने वाली ये ओजोन लेयर है सूरज की हानिकारक किरणों यानि अल्ट्रावॉयलट किरणों से कई लाख सालों से मनुष्य की सुरक्षा करती आ रही है, लेकिन पिछले कई सालों पहले इस लेयर में एक छेद हो गया था जो अब और फैलता जा रहा है.
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लेयर की नाजुक परत में यह छिद्र बहुत ही गंभीर स्थिति में है जिसके कारण मनुष्य के जीवित रहने के लिए ली जाने वाली ऑक्सीजन में तीखी गंध के साथ जहर घुल रहा है.
बता दें कि पृथ्वी से ऊपर 15 से 50 किमी के दायरे में स्ट्रैटोस्फियर परत है ओजोन लेयर यहीं पायी जाती है. इस केमिकल फॉर्म्युला में O3 कहते हैं.
अंटार्कटिका के नजदीक एक क्षेत्र में स्थित वातावरण में यह ओजोन लेयर काफी हल्की हो गई है जो छेद की तरह दिखाई देती है.
यदि ये छेद लगातार ऐसे ही बढ़ता रहा तो पृथ्वी पर सभी प्राणी कई तरह के गंभीर रोगों जैसे कैंसर से पीड़ित हो जायेंगे और यही नहीं समस्त पेड़ पौधे नष्ट हो जायेंगे.