इस बार की अमरनाथ यात्रा कितनी है सुरक्षित, आप भी जानिए

Amarnath Yatra Security Arrangements

Amarnath Yatra Security Arrangements : हर आतंकी के लिए अभेद है सुरक्षा कवच

Amarnath Yatra Security Arrangements : हिंदु धर्म के पवित्र धार्मिक स्थानों में से एक अमरनाथ की यात्रा के लिए लगभग हर हिंदु के दिल में बड़ी तमन्ना होती है, यही कारण है कि हर साल लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए जाते हैं.

आपको बता दें कि इस साल भी अमरनाथ यात्रा 27 जून से शुरू हो गई है, जो 26 अगस्त रक्षाबंधन के दिन तक चलने वाली है. कल रवाना हुए पहले जत्थे में 2,334 पुरुष, 520 महिलाएं, 21 बच्चे और 120 साधु शामिल हैं.

गौरतलब है कि अमरनाथ यात्रा पर हर साल आतंकी खतरा बना रहता है जिसके मद्देनजर इस बार भी सेना ने यात्रा के लिए सुरक्षा के पुख्ते इंतजाम किए हैं.

बात दें कि इस बार की सुरक्षा व्यवस्था पहले के मुकाबले और कड़ी की गई है, आइए जानते हैं कि कितनी चाक चौबंद है यात्रा.
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रक्षामंत्री ने खुद लिया सुरक्षा इंतजामों का जायजा
अमरनाथ की यात्रा को लेकर सरकार कितनी गंभीर है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि खुद रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने इस यात्रा की सुरक्षा इंतजामो का जाएजा लिया.
इनके अलावा सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत ने भी सुरक्षा का मुआयना किया है, ताकि कोई चूक न रह जाए. वहीं इस बार
अभेद्द है सुरक्षा कवच
बता दें कि अमरनाथ की यात्रा में आने वाले हर पड़ाव और स्थान को हाई टैक सुरक्षा से ढंक दिया गया है.
राज्य में लगे राष्ट्रपति शासन के कारण सुरक्षा बलों की तैनाती में किसी तरह की कोई कमी नहीं रखी गई है.
यात्रियों को सही सलामत दर्शन कराने के लिए करीब 40 हज़ार पुलिसकर्मियों की तैनाती हुई है, जिसमें जम्मू-कश्मीर पुलिस, पैरामिलिट्री, नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स और सेना के जवानों की तैनाती की गई है.
किसी भी गतिविधि पर नजर बनाए रखने के लिए हेलीकॉप्टर, यूएवी (ड्रोन विमान), सर्विलांस कैमरा इस्तेमाल किए जा रहे हैं.
वहीं ऐसा पहली बार हुआ है कि यात्रा में जाने वाले वाहनों पर रेडियो फ्रिक्वेंसी आईडेंटीफिकेशन (आरएफआईडी) टैग, यानी ट्रैकिंग चिप लगाई जाएगी जिससे सभी वाहनों पर नजर रखी जा सके.
इसके अलावा सीएरपीएफ ने अपने मोटसाइकिल दस्ते को कैमरा और अन्य जीवनरक्षक उपकरणों से लैस कर दिया है ताकि जररूत पड़ने पर ये किसी भी जगह तुरंत पहुंच कर लोगों की मदद कर सके.
इन सब के अलावा भी पहली बार यात्रा के दौरान एनएसजी कमांडो को बुलाया गया है.
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कई बार हो चुके हैं मॉक ड्रिल 
सरकार इस बार अमरनाथ यात्रा में कोई चुक नहीं करना चाहती है यही वजह वजह है कि नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (एनडीएमए) ने अमरनाथ यात्रा की तैयारियों का आंकलन करने के लिए मंगलवार को मॉक ड्रिल भी किया.
गृहमंत्रालय के मुताबिक इस ड्रिल में एसएसबी , एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, राष्ट्रीय राइफल्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, थल सेना, पुलिस, स्वास्थ्य, असैन्य, रक्षा, परिवहन, अग्निशमन और आपात सेवाओं जैसे अहम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया.
2 लाख लोगों ने कराया पंजीकरण
अब तक मिली जानकारी के मुताबिक अमरनाथ यात्रा के लिए करीब 2 लाख लोगों ने पंजीकरण करा रखा है. वहीं पिछले साल की बात करें तो 2 लाख 60 हजार यात्रियों ने अपमरनाथ की यात्रा करी थी.
हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि इस बार की यात्रा में पिछले साल के मुकाबले ज्यादा लोग शामिल होंगे क्योंकी इस बार की य़ात्रा 60 दिनों तक चलने वाली जबकि 2017 में ये सिर्फ 45 दिन ही चली थी.
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क्यों की जाती है अमरनाथ यात्रा
दरअसल अमरनाथ यात्रा का मुख्य उद्देश्य भगवान शंकर के बर्फ से बने लिंग के दर्शन के लिए होता है.
श्रीनगर से करीब 145 दूरी पर अमरनाथ गुफा है जहां भगवान शंकर का लिंग बर्फ से अपने आप बनता है. समुद्र तल से 3,978 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गुफा 160 फुट लंबी,100 फुट चौड़ी और काफी ऊंची है.
ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव साक्षात श्री अमरनाथ गुफा में विराजमान रहते हैं.शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव ने इसी गुफा में माता पार्वती को अमरत्व का ज्ञान दिया था.
वहीं पुराणों के मुताबिक बाबा अमरनाथ का दर्शन काशी में दर्शन से दस गुना, प्रयाग से सौ गुना और नैमिषारण्य से हजार गुना पुण्य देने वाला रहता है.