जानिए बकरीद पर सिर्फ बकरे ही क्यों होतें है कुर्बान ? इस ईद पर क्या है सरकारी निर्देश

Bakrid Eid Al Adha 2018
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Bakrid Eid Al Adha 2018 : ईद दो तरह की होती हैं एक “ईद-उल-फितर” यानी मीठी ईद और दूसरी “ईद-उल-अधा” यानि बकरीद

Bakrid Eid Al Adha 2018 : जैसे हिन्दुओं में होली और दिवाली सबसे बड़े त्योहार होते हैं, ठीक वैसे ही मुस्लिम समाज में ईद का बड़ा महत्व है.

ज्ञात हो ईद दो तरह की होती हैं एक ईद-उल-फितर यानी मीठी ईद और दूसरी ईद-उल-जुहा यानि बकरीद जो 22 अगस्त को है.
इस दिन देशभर में बकरों की कुर्बानी दी जाती है. अब यहां सवाल यह है कि आखिर ईद पर बकरे की क़ुरबानी क्यों दी जाती है ?
जानिये कैसे मनाई जाती है बकरीद ? 
मुलमानों के हर त्यौहार की तरह इस पर भी सबसे पहले नए कपड़े पहने जाते हैं और नमाज़ अदा की जाती है. इसके बाद कुर्बानी के तौर पर किसी जानवर मुख्य तौर पर बकरे को हलाल किया जात है.
कहा जाता है कि बकरे के गोश्त को तीन हिस्सों में बाँट दिया जाता है जिसके बाद उसको खाया जाता है. बता दें पहला हिस्सा गरीबों के लिए होता है तो दूसरा दोस्त के लिए और आखिरी घर में खाया जाता है.
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कैसे शुरू हुआ कुर्बानी देने का सिलसिला ? 
इस्लाम के जानकारों के अनुसार सबसे पहली क़ुरबानी हजरत इब्राहिम ने दी थी, पुराने मुसलमान बताते हैं कि इब्राहिम की 90 वर्ष की उम्र तक कोई औलाद नहीं हो रही थी जिसके कारण उसने खुदा से इबादत की. इसके बाद खुदा ने उन्हें एक औलाद दी जिसका नाम इस्माइल था.
कुछ समय बाद इब्राहिम को सपना आया कि खुदा ने उनसे सबसे प्यारी चीज़ मांगी है. उन्होंने एक-एक करके सभी जानवरों की कुर्नाबी दी लेकिन उन्हें सपना आना अभी भी जारी थी.
अब इब्राहिम समझ गए थे कि खुदा उनसे किसी और की नहीं बल्कि उनकी औलाद इस्माइल की कुर्बानी मांग रहे हैं, उन्होंने बिना वक़्त जाया किये इस्माइल को तैयार किया और उसे कुर्बानी के लिए ले जाने लगे.
वहीं रास्ते में ही उन्हें एक शैतान मिला जिसने उनसे कुर्बानी देने को मना किया लेकिन इब्राहिम पक्का इरादा बना चुके थे उन्होंने इस्माइल को लिटाया और आँखों पर पट्टी बांधकर कुर्बानी दी.
जब आँख खोली तो इब्राहिम को दिखा…
इब्राहिम ने जब आँखों से पट्टी हटाई तो देखा कि इस्माइल सही-सलामत खेल रहा है और एक बकरी की कुर्बानी हो गयी है, उन्होंने तुरंत खुदा को शुक्रिया कहा.
इब्राहिम के इसी फैसले से खुश होकर खुदा ने उन्हें पैगंबर बना दिया, उसी दिन से हर साल ईद के मौके पर  बकरे की कुर्बानी दी जाती है.
बकरीद को लेकर योगी सरकार ने दिए हैं ख़ास आदेश  
सीएम योगी ने ईद-उल-जुहा को लेकर पुलिस को सख्त आदेश दिए हैं कि किसी भी प्रकार की ढील ना बरती जाए, सीएम योगी ने वीडियो प्रेस  कॉन्फ्रेंस  के ज़रिये पुलिस को आदेश दिया है कि जहां मिश्रित लोग रहते हैं वहां पुलिस गश्त लगाए और शान्ति सुनिश्ति करें
साथ ही उन्होंने यह भी अपील करी है कि किसी भी प्रकार के प्रतिबंधित जानवर खासकर गौवंश की कुर्बानी ना हो. इसके अलावा खुले में कोई भी कुर्बानी खुले में नहीं होनी चाहिए और नालियों या सड़कों पर खून बहता हुआ नहीं दिखना चाहिए.
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उत्तराखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला 
ईद को लेकर उत्तराखंड हाई कोर्ट ने साफ़ आदेश दिया है कि किसी भी खुले स्थान में कुर्बानी नहीं दी जाए, यह सिर्फ बूचड़खानों में ही हो. हाई कोर्ट ने भी कहा है खुले नाले व नालियों में खून नहीं बहना चाहिए फिर चाहे वो किसी भी धर्म से हो.
फिलहाल, ईद पर इस तरह से बेजुबान जानवर की कुर्बानी देना गलत है, हर साल न जाने कितने ही ऐसे बेजुबान बकरों को मार दिया जाता है. कई बार इसको लेकर आवाज़ भी उठायी गयी है लेकिन धर्म के आगे किसी की नहीं चली….  “ईद मुबारक”