देवरिया शेल्टर हाउस : “दो वक़्त का खाना और गंदे काम” पूरी सच्चाई आपको रुला देगी

Deoria Shelter Home Story

Deoria Shelter Home Story : शर्म आती है खुद को इस दरिदों की बस्ती में बेबस जीता देख !! 

Deoria Shelter Home Story : “हमें बचा लो…ये लोग हमसे गंदे काम कराते हैं, हमें जानवरों की तरह रखते हैं. कोई मदद करो हमारी, हमें यहां जबरन अपनों से बड़े गैर मर्दों से सम्बन्ध बनाना होता है. 

ये शब्द हैं एक शेल्टर हाउस में रह रहीं कुछ बच्चियों के, वहीं बच्चियां जो या तो अनाथ हैं या हालात की मजबूर. बेशक, जगह का नाम शेल्टर मां विंध्यवासिनी बालिका संरक्षण गृहहाउस है लेकिन यहां किसी वैश्यालय से भी बत्तर स्थिति देखने को मिली है.
यहां यहसे शर्मनाक यह है कि इस शेल्टर होम की संचालिया खुद एक महिला है जिसका नाम गिरिजा त्रिपाठी है.
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गिरिजा त्रिपाठी
हम छत पर चली जाएँ तो हमें जबरन पीट-पीटर नीच बुला लेते 
 दरअसल, ये कहानी है देवरिया में बच्चियों के शेल्टर होम की, यहां बेघर बच्चियों को दो वक़्त की रोटी और सिर पर छत के बदले अपनी रूह तक बेचने को मजबूर किया जाता है.
हालात की मारी इन मासूम बच्चियों की पीड़ा मानो जन्म के बाद से कभी कम ही नहीं हुई या यूं कहिये ये सब झेलना उनके लिए रोज़ का काम बन गया था.
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“बड़ी और छोटी मैडम सामूहिक विवाह समारोहों का भी आयोजन करवाती हैं जिसमें हमें जिस्म के भूखे भेड़ियों के आगे डाल दिया जाता है” 
जब इन बच्चियों से मिलने गोरखपुर से 181 हेल्पलाइन की काउंसलर्स आयी तो अनाथ होने की सज़ा  काट रही लड़कियों ने वो बातें बतायीं जिनको सुनकर मात्र हर किसी की आत्मा सिहर उठेगी.
डरे और सहमे हुए क़दमों से एक मासूम ने कॉन्सलर के पास जाकर बताया “दीदी यहां हमारी बड़ी और छोटी मैडम सामूहिक विवाह समारोहों का भी आयोजन करवाती हैं और हमपर अपने से दोगुनी उम्र के मर्दों के साथ शादी करने का दबाव डालती हैं”  इतना कहने के बाद बच्ची डर गयी और चुप हो गई.
हम मेडिकल टेस्ट नहीं कराएंगे
शेल्टर हाउस की आड़ में बच्चियों पर हो रहे इस अत्याचार का जब पर्दफ़ाश हुआ तो बच्चियों का मेडिकल करने की मांग उठी लेकिन दो ने मेडिकल तक कराने से मना कर दिया. इसका वजह डर है या कुछ और ये तो अभी साफ़ नहीं है लेकिन ये वाकई डरावना है.
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दो वक़्त ही मिलता है खाना
शेल्टर होम में  बच्चियों के अपने जिस्म के बदले खाना तो मिलता था लेकिन सिर्फ दो टाइम, सुबह नाश्ते में सुखी रोटी और अचार और रात को जो बच जाए वो.
संस्थान से छुड़ाई गईं लड़कियों ने कहा कि मैडम हम लोगों से दिनभर झाड़ू-पोछा और बर्तन साफ कराती थी. फिर रात में कई लग्जरी गाड़ियां आती थीं जिसमें वो हमें गोरखपुर और अन्य जगहों पर भेजती थी.
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वहां कमरे में एक लड़की और दो लड़के रहते थे सुबह जब हम वापस आते तो मैडम हमें धमकाते हुए कहती की अगर किसी से बाहर कुछ बोला तो जान से मार देंगे
  स्थानिय नागरिको ने बताया कि शेल्टर होम के सामने एक ठेका भी है जहां दिनभर शारबी रहते हैं और पास ही एक बेहद बदनाम होटल भी है.
उन्होंने बताया कि पिछले तीन साल से इस शेल्टर होम की गतिविधियां संदिग्ध लगने लगी थी मगर यहां जिला प्रशासन और पुलिस के इतने बड़े-बड़े अफसर आते-जाते थे तो किसी की कुछ कहने की हिम्मत नहीं होती थी.
कहाँ जा रहा  देश ? एक आम नागरिक  के नाते यदि किसी  में थोड़ी भी इंसानियत बची होगी तो उसके मन में इस समय ये सवाल ज़रूर होगा !!
और जवाब ?? जनाब, जहां बकरियों का रेप हो जाता है वहां आप कैसे कोई उम्मीद कर सकते हैं ?
अरे !! जिस देश में अँधेरा होते ही रात के सन्नाटे में बेटियां डर-डर के जीने लग जाएँ ऐसे देश का विकास कैसे होगा ?
और, वो बच्चियां जो शेल्टर हाउस में थीं उनका क्या ? शर्म आती है खुद के इस दरिदों की बस्ती में बेबस जीता देख !!