जानिये क्या है भारत – पाक के बीच करतारपुर साहिब गुरूद्वारा विवाद, फिर क्यों उठा मुद्दा

Gurdwara Darbar Sahib Kartarpur Pakistan

Gurdwara Darbar Sahib Kartarpur Pakistan : अगर इस पर सहमति बनती है तो पाकिस्तान बिना वीजा के कराएगा दर्शन

Gurdwara Darbar Sahib Kartarpur Pakistan : आपको याद तो होगा ही कि कुछ समय पहले पंजाब सरकार मे मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में गए थे. 

उसके कुछ समय बाद ही पाकिस्तान की तरफ से बयान आया है कि सिखों के धर्म स्थल करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के लिए भारत की ओर से आने वाला द्वार खोल दिया जाएगा.
बता दें कि अगर ऐसा होता है तो भारतीय सिख गुरुद्वारे के दर्शन बिना किसी वीजा के कर सकेंगे, लेकिन इसमें कितनी सच्चाई है जानिए स्पेशल रिपोर्ट में  

Gurdwara Darbar Sahib Kartarpur Pakistan

नवजोत सिंह सिद्धू के बयान के बाद उठा मुद्दा  
दरअसल पाकिस्तान से लौटने के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने एक बयान में कहा था कि “गुरु नानक देव की 550 वीं जयंती पर पाकिस्तान भारत के लिए करतारपुर गुरुद्वारे का कॉरिडोर खोल देगा जिसके बाद भारतीय श्रद्धालु वहां आसानी से दर्शन कर सकेंगे”
पढ़ें – तीन तलाक पर मोदी सरकार ने लागू किया अध्यादेश, अब बोले तो गए 3 साल के लिए जेल
विदेश मंत्री की क्या रही प्रतिक्रिया 
सिद्धू द्वारा दिए गए बयान और पाकिस्तान की ओर से वायरल हो रही इस खबर के बाद सुषमा स्वराज ने इस खबर को सिरे से नकारते हुए इसे झूठ बताया है.
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ना तो कॉरिडोर को लेकर कोई बातचीत कर रहा है ना ही उसने ऐसा कोई बयान दिया है.
सुषमा ने  लिखा कि करतारपुर साहिब तक हिंदू श्रद्धालुओं की पहुंच के लिए आपका लिखा खत मुझे 13 सितंबर 2018 को मिला, ( यह केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल  को लिखा था )  सरकार इस मामले पर पाकिस्‍तान से बात कर रही है.
जबकि पाक अब तक 1974 के द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत न तो गुरुद्वारा करतारपुर साहिब में हिंदू पर्यटकों के आने पर हामी भरी है और न ही कॉरिडोर स्‍थापित करने को लेकर किसी अधिकारी को भेजा है.

Gurdwara Darbar Sahib Kartarpur Pakistan

सिखों के लिए क्या मायने रखता है करतारपुर गुरुद्वारा ?  
दरअसल कहा जाता है कि सिखों के सबसे पहले गुरु नानक जी यही रहा करते थे और उनके जीवन का अंत भी यही हुआ था.
इसी कारण इस जगह को काफी महत्व दिया गया है आपको बता दें भारत में रहने वाले लोग अभी इस गुरुद्वारे के दर्शन दूरबीन की मदद से करते हैं
भारतीय फौज ने बनाया श्रद्धालुओं के लिए स्थल
 इस गुरुद्वारे की मान्यता इतनी ज्यादा है कि पूरे भारत के सिख समुदाय के लोग यहां आकर दूरबीन की मदद से गुरुद्वारे के दर्शन करते हैं.
जिस जगह से लोग गुरुद्वारे के दर्शन करते हैं वहां भारतीय सेना तैनात रहती है और उन्होंने उस जगह को एक तीर्थ स्थल के रूप में बना दिया है.
पढ़ें – कौन हैं चांद पर जाने वाले दुनिया के पहले प्राइवेट पैंसेजर ? GK का प्रश्न है जान लीजिए
 मुसलमान भी मानते हैं इस गुरुद्वारे का महत्व 
 कहा जाता है कि जब गुरु नानक ने इस जगह समाधि ले ली तो उसके कुछ समय बाद उनकी लाश वहां से गायब हो गई और वहां पर कुछ फूल पड़े हुए थे.
इन फूलों में से कुछ को तो सिख समुदाय के लोग अपने साथ ले गए और बाकी के फूल मुसलमानों ने अपने पास रख लिए तभी से इस गुरुद्वारे में मुसलमान और सिख दोनों आते हैं. 
गुरु नानक की समाधि और कब्र दोनों है मौजूद
गुरु नानक की लाश की जगह मिले फूलों को सिख समुदाय के लोगों ने तो जला दिया तो वही मुस्लिम समुदाय के लोगों ने उन फूलों को वही दफना दिया इसके बाद से आज तक उस गुरुद्वारे में समाधि और कब्र दोनों मौजूद है.