Homai Vyarawala : जानिए कौन हैं होमी व्याराला, जिन्हें आज गूगल ने डूडल बनाकर किया याद

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Homai Vyarawala : भारत की पहली महिला फोटो पत्रकार हैं होमी

Homai Vyarawala : हम अगर आज हर क्षेत्र में महिलाओं को पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते हुए देख रहे हैं तो इससें कहीं ना कहीं उन महिलाओं का विशेष योगदान है, जिन्होंने अपने समय में समाज की रूढीवादी सोच को नकारते हुए अपनी खुद की सहभागित दर्ज कराने की पहल की.

मगर बदलते वक्त के साथ शायद हमने इन महिलाओं को याद करना मुनासिब ना समझा.
लेकिन पीछले कुछ समय से विश्व के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल ने ऐसे लोगों को उनके जन्मदिन पर याद करने का अनोखा तरीका निकाला है.
इसी सिलसिले में आज गूगल ने भारत की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट होमी व्यारावाला को उनके 104 वें जन्मदिन के मौके पर डूडल बनाकर याद किया है.
होमी व्याराला ने भारत में उस समय फोटो जर्नलिस्म की शुरूआत की थी जिस समय हमारे समाज में महिलाओं को पर्दे के अंदर रखने की प्रथा थी.
मगर होमी ने अपने कभी ना झुकने वाले इरादों के दम पर उस प्रथा की बेड़ियों को तोड़ते हुए फोटो जर्नलिस्म में अपना करियर बनाया और वह भारत की पहली महिला फोटो पत्रकार बन गईं.
आज गूगल के इस डूडल के जरिए वो सभी लोग भी होमी को जान जाएंगे जिन्होंने शायद इनका नाम पहले कभी ना सुना हो.

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आइए जानते हैं होमी के जिंदगी के कुछ किस्से
होमी व्यारावाल का जन्म 9 दिसंबर 1913 को गुजरात के नवसारी में एक मिडिल क्लास पारसी परिवार में हुआ था. उनके पिता की एक थिएटर कंपनी थी जिसका संचालन मुंबई से होता था. इस वजह से होमी अपने परिवार के साथ मुंबई में ही रहती थी और अपनी पढ़ाई भी उन्होंने यहीं से की .
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक होमी ने अपने करियर की शुरूआत सन् 1930 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान किया.
उन्होंने सबसे पहले बॉम्बे स्थित द इलस्ट्रेटेड वीकली ऑफ़ इंडिया पत्रिका के लिए काम करना शुरू किया हालांकि शुरूआत के समय में वहां उन्हें कोई नहीं जानता था उनकी फोटो को भी उनके पति के नाम के साथ प्रकाशित की जाती थी.
आपको बता दें कि होमी ने टाइम्स ऑफ इंडिया में अकाउंटेंट और फोटोग्राफर मानेकशॉ जमशेदजी व्यारावाला से शादी की थी.
दिल्ली में मिली पहचान
हामी व्याराला को राष्ट्रीय पहचान मिली साल 1942 में जब उन्हें ब्रिटिश सूचना सेवा में काम करने का मौका मिला और वह परिवार के साथ दिल्ली आकर शिफ्ट हो गई.
जहां उन्होंने हो ची मिन्ह, अमेरिकी राष्ट्रपतियों आइजनहॉवर और जॉन एफ कैनेडी जैसे नेताओं की फोटो के साथ साथ मैमी आइजनहॉवर और जैकलिन केनेडी की भी फोटो खींची.
इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रपति भवन में लॉर्ड माउंटबेटन को सलामी लेते हुए, पंडित जवाहर लाल नेहरू एवं उनकी बहन विजय लक्ष्मी की गले मिलते फोटो खींची है.
यहीं नहीं उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के अंतिम संस्कार को भी उन्होंने अपने कैमरे में कैद किया है.
पति की मृत्यु के बाद छोड़ी फोटोग्राफी
होमी ने साल 1970 में अपने पति की मृत्यु के बाद हमेशा के लिए फोटोग्राफी छोड़ने का फैसला किया. होमी व्यारवाला को फोटो जर्नलिस्म के क्षेत्र में उनके अद्भुत योगदान को देखते हुए साल 2011 में भारत सरकार उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित कर चुकी है.
15 जनवरी 2012 में उनका देहांत कैंसर की बिमारी के कारण हुआ था . आज गूगल ने उनके जन्मदिन के मौके पर उन्हें ‘फर्स्ट लेडी ऑफ द लेंस‘ के तौर पर सम्मानित करते हुए उनके ढेर सारे पुराने चित्रों को सहेजकर एक कोलाज का रूप दिया है.