क्या था 2003 का सीजफायर समझौता, जिसे फिर से अमल में लाकर सीमा पर शांति बनाना चाहते हैं भारत-पाक

indian air force surgical strike

India Pakistan 2003 Ceasefire Agreement : 2003 में दोनों देशों के प्रधानमंत्री ने इस समझौते पर जताई थी सहमति

India Pakistan 2003 Ceasefire Agreement : पाकिस्तान की तरफ से भारतीय सीमा पर सीजफायर का उल्लंघन कर गोलीबारी करना अब कोई नई बात नहीं रह गई है.

मगर हद तो तब हो गई जब रमजान के इस पाक महीने में भी पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है,वो भारतीय सीमा से लगे गांवों और बीएसएफ की चौकियों पर भारी गोलीबारी और मॉर्टार से लगातार हमला कर रहा है.
हालांकि हमारी भारतीय सेना भी जवाबी कार्यवाही करते हुए उसके हर वार का करारा जवाब दे रही है जिससे अब वो थोड़ा सहम गया है.
यही वजह है कि इस गोलीबाारी को रोकने के लिए पाक ने भारत को DGMO स्तर की बातचीत का न्यौता दिया था जो कल संपंन्न हुई.
बता दें कि दोनों तरफ के डीजीएमओ ने सीजफायर के उल्लंघन और आतंकी गतिविधियों सहित कई मुद्दों पर चर्चा करी और भारत पाक सीजफायर 2003 समझौते पर बनी रहने की सहमति जताई.
यह भी पढ़ें – भगवा आतंक की बात करने वाले क्या कभी पचा पाएंगे स्वामी असीमानंद की रिहाई
क्या होता है सीजफायर उल्लंघन
सीजफायर दो देशों के बीच शांति कायम रखने के लिए एक समझौता होता है जिसे दोनों देशों के सैनिकों को बार्डर पर मानना होता है. यूं समझे कि सीजफायर या युद्धविराम किसी भी युद्ध को अस्‍थायी तौर पर रोकने का एक जरिया होता है.
इसके तहत हुए समझौते में दो पक्ष सीमा पर आक्रामक कार्रवाई न करने का वादा करते हैं.
भारत – पाक 2003 सीजफायर समझौता
भारत से हुई हर जंग में जबरदस्त शिकस्त झेलने के बाद भी पाकिस्तान मानों सीखने का नाम ही नहीं ले रहा.
करगिल युद्ध के बाद से इसने एक नई रणनीति के तहत सीधा जंग ना चाहते हुए सीमाओं पर आए दिन रूककर फायरिंग करने का एक नया पैटर्न शुरू कर दिया है.
इस कारण आए दिन भारत पाक के बीच तनाव बना रहता है जिसे एक बार सुलझाने के लिए अमेरिका और अन्य युरोपिय देशों ने इस मुद्दे में हस्तक्षेप किया था.
और फिर अटल बिहारी वायपेयी की पहल के बाद भारत और पाकिस्‍तान ने वर्ष 2003 में एलओसी पर शांति बनाए रखने के लिए सीजफायर समझौता पर हस्ताक्षर किया.
बता दें कि 25 नवंबर 2003 की आधी रात से भारत और पाकिस्‍तान के बीच हुए इस समझौते का मुख्य मकसद एलओसी पर 90 के दशक से जारी गोलीबारी को बंद करना था.उस समय भारत के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपाई थे और पाकिस्तान में परवेज मुशर्ऱफ का शासन था.
उस समय अंग्रेजी पत्रिका ने लॉस एंजिल्‍स टाइम्‍स ने लिखा था कि अमेरिका और यूरोप के दबाव में आकर भारत और पाकिस्‍तान दोनों युद्धविराम को रोकने के लिए राजी हुए हैं.
यह भी पढ़ें – गिलगिट-बाल्टिस्तान को अधिक अधिकार मिलने से भारत की बढ़ सकती है चिंताए, जानिए कैसे
 समझौते  के बाद कई बार हो चुका है उल्लंघन
बड़े अकसोस के साथ यह कहना पड़ता है की सीजफायर समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भी पाकिस्तान की हरकते काफी अप्रिय रही हैं.
अभी ये साल आधा भी नहीं बीता लेकिन पाकिस्‍तान की ओर से अब तक 1250 बार युद्धविराम को तोड़ा जा चुका है.
वहीं 2017 में कुल 971 ऐसी घटनाएं हुई थी जिसमें सैनिक और आम नागरिक मिलाकर 36 लोगों नें अपनी जान गंवाई और 120 से ज्यादा घायल हुए.
अगर पीछले 8 सालों का सीजफायर उल्लंघन का रिकार्ड उठाकर देखा जाए तो साल 2011 के बाद इसमें अप्रत्यशीत इजाफा देखने को मिला है.
साल 2011 में पाक की ओर से कुल 62 बार सीजफायर तोड़ा गया, वर्ष 2012 में 114 बार, वर्ष 2013 में 347 बार, वर्ष 2014 में 583 बार और वर्ष 2015 में 400 बार युद्धविराम तोड़ा जा चुका था.
आपको बता दें कि सितंबर 2016 में हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने सीजफायर के उल्लंघन में और तेजी ला दी है, जिसे भारत ने कई बार विश्व पटल पर लाने की कोशिश भी की है.
अब एक बार फिर भारत और पाकिस्तान 2003 के संघर्ष विराम समझौते को मानने के लिए राजी हुए हैं.
मंगलवार को हुई DGMO लेवर की मीटिंग में दोनों देशों ने यह तय किया है कि वो भविष्य में किसी भी मुद्दे का समाधान हॉटलाइन और फ्लैग मीटिंग जैसे मौजूदा तंत्रों के माध्यम से करेंगे.