सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति में सरकार का कितना होता है दखल, जानिए

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सुप्रीम कोर्ट

Indian Collegium System : 1993 से कोलेजियम के तहत होता है जजों का चयन

Indian Collegium System : जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने की सिफ़ारिश को लेकर देश में कोहराम मचा हुआ है.

ये मामला इतना बढ़ गया कि संसद में विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मोदी सरकार को कटघरे में ला खड़ा किया है.
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार जानबूझकर उत्तराखंड के मुख्य न्यायधीश जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट का जज नहीं बना रही है जबकि कोलेजियम के तहत उसके पास इनका नाम भेजा गया था जिसे उसने लौटा दिया.
लेकिन यहां हम आपको बता दें कि देश की न्यायपालिका की सर्वोच्च संस्था सुप्रीम कोर्ट में जज की नियुक्ति के कुछ खास नियम हैं जो किसी पार्टी या सरकार द्वारा नहीं बल्कि संविधान के आधार पर तय होता है.
आइए आज हम आपको सु्प्रीम कोर्ट के जस्टिस बनाने के नियम को बताते हैं..
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क्या है कोलेजियम व्यवस्था
कोलेजियम पांच लोगों का समूह है इन पांच लोगों में भारत के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जज शामिल रहते हैं. कोलेजियम द्वारा जजों के नियुक्ति का प्रावधान संविधान में कहीं नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट के पांच वरिष्ठतम जजों की कमेटी (कोलेजियम) नियुक्ति व तबादले का फैसला करती है और इसकी सिफारिश मानना सरकार के लिए जरूरी होता है. यह व्यवस्था 1993 से लागू है.
कोलेजियम प्रणाली सुप्रीम कोर्ट की दो सुनवाई का नतीजा है पहला 1993 का और दूसरा 1998 का है, इसे बनाने के पीछे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने की मानसिकता रही है.
इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति के लिए संविधान में निहित प्रावधानों को दुबारा तय किया और वरिष्ठ जजो द्वारा नए जजों की नियुक्ति का अधिकार दिया है.
कोलेजियम किसी व्यक्ति के गुण-कौशल के अपने मूल्यांकन के आधार पर नियुक्ति करता है और अंत में सरकार के पास उस नियुक्ति को हरी झंडी देने के लिए नाम भेजा जाता है.
केएम जोसेफ को लेकर हो रहा है विवाद
केंद्र सरकार द्वारा उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ को पदोन्नति ना देकर सुप्रीम कोर्ट का जज ना बनाने के पीछे विवाद शुरू हो गया है.
दरअसल सरकार ने जोसेफ से पहले इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट का जज बनाने के नाम पर सहमति दे दी है जिसके बाद से यह एक बड़ा मुद्दा बन गया है. सरकार के इस फैसले से नाखुश सुप्रीम कोर्ट के ही कुछ पूर्व न्यायधीश तो इसे संविधान पर बड़ा हमला मान रहे हैं.
शीर्ष अदालत के मौजूदा न्यायाधीश कुरीयन जोसेफ ने कहा कि इतिहास में ऐसा कोई पूर्व उदाहरण नहीं है जब कॉलेजियम की सिफारिश वाले नामों को केंद्र द्वारा वापस भेजा गया हो.
बता दें कि सरकार ने शीर्ष अदालत के कॉलेजियम की ये सिफारिश लौटाते हुए गुरुवार को प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा को इस संबंध में विस्तृत पत्र लिखा जिसमें अपने निर्णय के बारे में कॉलेजियम को विस्तार से बताया गया है.
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विपक्ष का बवाल
कांग्रेस ने जस्टिस केएम जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट जज न बनाने की कालेजियम की सिफारिश को स्वीकार नहीं करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर तीखा हमला बोला है.
पार्टी ने यह भी सवाल किया कि क्या दो साल पहले उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन के खिलाफ फैसले की वजह से उनके नाम को मंजूरी नहीं दी गई?
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने ट्वीट कर कहा, ‘जस्टिस केएम जोसेफ की नियुक्ति क्यों रुक रही है? इसकी वजह उनका राज्य या उनका धर्म अथवा उत्तराखंड मामले में उनका फैसला है?’बता दें कि विपक्ष इंदू मल्होत्रा को जस्टिस पद पर आसीन करने के पक्ष में बिल्कुल नहीं थी

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