देश के बढ़ रहा प्रतिभा पलायन, क्या मोदी सरकार की नीतियों से होगा सुधार?

Indian Talent Migration
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Indian Talent Migration : युवा पीढ़ी की प्रतिभा का पलायन किसी भी देश के लिए हानिकारक साबित होता है

Indian Talent Migration : स्वदेश में बेहतर शिक्षा और रोजगार न मिल पाने के कारण पलायन कर रही युवा पीढ़ी विदेशों में अपनी प्रतिभा का हुनर दिखा रही है.

इससे बेशक हमारे देश के युवाओं के काम को दुनियाभर में सराहा जा रहा है लेकिन प्रतिभा पलायन से खुद के देश के भीतर आर्थिक और सांस्कृतिक छवि पर भी दोहरा प्रभाव पड़ रहा है.
भारत में लंबे समय से लेकर अब तक रोजगार के अच्छे अवसर और उच्च शिक्षा के लिए अधिक संख्या में लोग विदेशों की तरफ पलायन कर चुक हैं, जिसके चलते आज हमारे देश में हुनरमंद नौजवानों की कमी महसूस की जा सकती है.
हालांकि देश में प्रतिभा पलायान के बढ़ते संकट को गंभीरता से देखते हुए समय-समय पर बदलती सरकारों ने कई कोशिशें की हैं लेकिन किसी को भी इसे रोकपाने में कामयाबी हासिल नहीं हुई.
दरअसल युवाओं के बीच पलायन को ना रोक पाने का सबसे बड़ा कारण हमारे देश की व्यवस्था प्रणाली है जो बेमतलब की लेट-लतीफी, काम ना करने की आज़ादी और कार्यस्थल का माहौल और कम भत्ता उन्हें दूसरे देशों में अपना भविष्य तलाश करने के लिए मजबूर करता है.
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इसी विषय में हाल ही में जारी करोड़पतियों के विदेशों मे जा बसने को लेकर किए गए सर्वे के आकड़े देश का भविष्य अंधकार की तरफ बढ़ने की ओर इशारा करते हैं.
न्यू वर्ल्ड वेल्थ सर्वे की रिपोर्ट की मानें तो पिछले साल 2017 में करीब 7000 करोड़पति भारतीयों ने विदेशों में नए ठिकाने ढूंढे जो पिछले साल 2016 की तुलना में 16 प्रतिशत ज्यादा है.
रिपोर्ट के आंकड़े ये साफ करते हैं कि भारत में ऊंची आय वाले सात हजार भारतीयों ने अपना स्थायी घर किसी दूसरे देश में बना लिया है.
गौरतलब है कि प्रतिभा पलायन की तेजी से बढ़ती तादाद के कारण देश में प्रतिभाशील डॉक्टरर्स, इंजीनियरर्स, और शोधकर्ताओं की कमी और साथ ही देश के विकास की गुणवत्ता भी घट गई है.
हालांकि इन प्रवासी भारतीय समुदाय के जरिए 70 अरब डॉलर रेमिटेंस का देश को लाभ भी होता है.
यही नहीं पलायन कर चुका प्रवासी भारतीय भारत में कुछ स्तर तक अपना योगदान भी प्रदान करता है. मगर फिर भी किसी भी देश में प्रतिभाओं का पलायन होना आर्थिक और अन्य मोर्चे पर काफी नुकसान दायक ही साबित होता है.
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इसी संकट से देश के नौजवानों को उबारने के लिए हाल ही में मौजूदा मोदी सरकार ने भी एक बड़ी पहल की है.
पीएम मोदी ने भारत के भविष्य पर चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय सरकार के उच्च शिक्षा संस्थानों के छात्रों के लिए पीएम रिसर्च फेलोशिप (PMRF) को मंजूरी दी है.
इस फेलोशिप कार्यक्रम के तहत सरकार की तरफ से बड़े संस्थानों से पासआउट छात्रों को स्कॉलरशीप देने के लिए 1650 करोड़ रूपए की राशि भी आवंटित की है.
इसके अलावा पीएमआरएफ के लिए शॉर्टलिस्ट हुए आईआईटीज, आईआईएसईआर, आईआईआईटी और एनआईटी के बीटेक ग्रैजुएट्स आईआईटीज या आईआईएससी बेंगलुरु से सीधे पीएचडी भी कर सकते हैं.
बहरहाल, प्रतिभा पलायन के लिए चिंताए व्यक्त करना और इसे रोकने के लिए सरकारों का कई योजना बनाकर प्रयासरत रहने का ज़ोर भरना हमेशा ही होता है.
मोदी सरकार की मासिक स्कॉलरशिप योजना भी एक अच्छी पहल है.लेकिन समय-समय पर किए जा रहे इन प्रयासों से क्या सुधार आता है या ये योजनाएं कितनी सफल होती हैं ये भविष्य तय करेगा.