नहीं भूला 31 अक्टूबर 1984 का वो दिन जब भारत ने खोई अपनी दुर्गा

Indira Gandhi 34th Death Anniversary

Indira Gandhi 34th Death Anniversary : 80 बोतल खून चढ़ाने के बाद भी इंदिरा गाँधी की हालत नाजुक बनी हुई थी

Indira Gandhi 34th Death Anniversary : 31 अक्टूबर 1984 को सुबह7.30 तक इंदिरा गाँधी तैयार हो गयीं थीं, उन्होंने उस दिन केसरिया रंग की साड़ी पहनी थी जिसका बॉर्डर लाल था.

उस दिन इंदिरा कुछ परेशान थी और पिछली रात ठीक से सोई भी नहीं थीं, सुबह  भी बेहद हल्का नाश्ता किया और निकल गयीं अपने काम पर….
इंदिरा गाँधी का उस दिन 3 अहम लोगों से मिलना था  
इंदिरा गाँधी को उस दिन सबसे पहले पीटर से मिलना था जो उनके ऊपर फिल्म बना रहे थे. उनका दूसरा अपॉइंटमेंट ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री से था और रात का भोजन ब्रिटेन की राजकुमारी के साथ था.
…लकिन निकलने से पहले जब मेकअप आर्टिस्ट उनका मेकअप कर रहा था तभी उनका डॉक्टर वहां आया. डॉक्टर के साथ इंदिरा ने कुछ बातें की और दोनों ने अमेरिकी राष्ट्रपति के 80 वर्ष में काले बालों को लेकर मज़ाक भी किया.
9 बजकर 10 मिनट पर इंदिरा गांधी बाहर आयीं और….

Indira Gandhi 34th Death Anniversary

उस दिन थोड़ी धूप थी जिसकी वजह से उनके साथ नारायण सिंह नामक सिपाही छाता लेकर चल रहा था और पीछे थे सुरक्षा अधिकारी सब इंस्पेक्टर रामेश्वर दयाल.
जब इंदिरा गांधी एक अकबर रोड को जोड़ने वाले विकेट गेट पर पहुंची तो वो धवन से बात कर रही थीं कि कैसे उन्हें आज का पूरा दिन बिताना है.
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इसी बीच वो हुआ जिसने बदल दिया इतिहास 
जब इंदिरा गाँधी और धवन बात कर थे तभी सुरक्षाकर्मी बेअंत सिंह ने अपनी रिवाल्वर से इंदिरा गाँधी पर गोली चला दी जो सीधा उनके पेट में लगी. बचने के लिए इंदिरा ने हाथ उठाया ही था कि बेअंत ने और गोलियां चला दीं.
यह गोलियां इंदिरा गाँधी के सीने में और बगल में लगीं लेकिन इतना काफी नहीं था, बेअंत ने चिल्लाकर पीछे खड़े  सतवंत सिंह को अपनी टॉमसन ऑटोमैटिक कारबाइन चलाने को कहा.
सतवंत ने जब फायरिंग की तो इंदिरा गांधी वहीं ढेर हो गयीं और पीछे  चल रहे उनके सुरक्षाकर्मी आगे आ पहुंचे लेकिन तबतक देर हो गई थी.

Indira Gandhi 34th Death Anniversary

“हमें जो कुछ करना था हमने कर दिया. अब तुम्हें जो कुछ करना हो तुम करो.”
अब सतवंत और बेअंत हथियार डाल चुके थे, उन्होंने कहा “हमें जो कुछ करना था हमने कर दिया. अब तुम्हें जो कुछ करना हो तुम करो.” दोनों को तभी घेर लिया गया और इंदिरा गांधी को अस्पताल ले जाने की तयारी होने लगी.
 मम्मी, मम्मी कहती दौड़कर आयी सोनिया गाँधी
वैसे तो वहां हर समय एम्बुलेंस रहती थी लेकिन उस दिन उसका ड्राइवर वहां नहीं था इसीलिए इंदिरा गाँधी को एक अम्बेस्डर की पिछली सीट पर लिटाया गया.
आगे की सीट पर धवन, फ़ोतेदार और ड्राइवर बैठे ही थे कि पीछे से आवाज आई मम्मी,मम्मी और सोनिया गाँधी एक गाउन में ही बाहर आ गयीं. वो तुरंत पीछे सीट पर अपनी सास के सर को गोदी में रखकर लेट गयीं.

Indira Gandhi 34th Death Anniversary

AIIMS पहुंचे सभी लोग 
AIIMS में इंदिरा गाँधी के ब्लड ग्रुप पर्याप्त मात्रा में तो था लेकिन जब AIIMS पहुंचें तो वहां कोई स्ट्रेचर नहीं था. 9 बजकर 32 मिनट पर Aiims में प्रवेश करने के बाद करीब 3 मिनट में स्ट्रेचर का इंतज़ाम हुआ और इंदिरा गाँधी को अंदर ले जाया गया.
इसके बाद फ़ोन कर एम्स के वरिष्ठ कार्डियॉलॉजिस्ट को इसकी सूचना दी. मिनटों में वहाँ डॉक्टर गुलेरिया, डॉक्टर एमएम कपूर और डॉक्टर एस बालाराम पहुंच गए.
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80 बोतल खून चढ़ाने के बाद भी इंदिरा गाँधी की हालत नाजुक थी 
दिल की धड़कनों के आलावा इंदिरा गाँधी के शरीर  में किसी प्रकार की गतिविधि नहीं थी, ऐसे में उन्हें 80 बोतल खून चढ़ाया गया और जल्द से जल्द सांस पहुँचाने के लिए उनके गले में एक नली डाली गयी.
डॉक्टर गुलेरिया बताते हैं कि मुझे तो देखते ही लग गया था कि वो इस दुनिया से जा चुकी हैं. उसके बाद हमने इसकी पुष्टि के लिए ईसीजी किया.
फिर मैंने वहाँ मौजूद स्वास्थ्य मंत्री शंकरानंद से पूछा कि अब क्या करना है? क्या हम उन्हें मृत घोषित कर दें? उन्होंने कहा नहीं फिर हम उन्हें ऑपरेशन थियेटर में ले गए.”
पहले ही मिली गयी थी इंदिरा गाँधी को उनकी मौत की सूचना 
इंदर मल्होत्रा, जिन्होंने इंदिरा गाँधी के जीवन पर किताब लिखी वो  बताते हैं कि ख़ुफ़िया एजेंसियों ने आशंका प्रकट की थी कि इंदिरा गाँधी पर इस तरह का हमला हो सकता है.
उन्होंने इंदिरा की सिक्योरिटी में तैनात सभी सिख कर्मचारियों को भी हटाने की मांग की थी लेकिन इंदिरा ने साफ़ मना कर दिया.

PC- Bluestar

ऑपरेशन ब्लू स्टार का लिया गया बदला 
सतवंत सिंह और बेअंत ने बड़ी  ही चलाकी  से गेट के पास ड्यूटी लगवाई जिसके बाद दोनों ने इंदिरा गाँधी को मारकर ऑपरेशन ब्लू स्टार का बदला लिया.
लोकल न्यूज़ सूत्रों से इस घटना के बारे में पूरे देश को शाम 2 बजे करीब बताया और सरकारी पुष्टि शाम 6 बजे के बाद आयी. 
इस तरह 31 अक्टूबर को भारत ने अपनी शक्तिशाली प्रधानमंत्री को खो दिया, जिसे विपक्ष भी मां दुर्गा का अवतार मानते थे.