तीन धर्मों का पवित्र स्थान यरुशलम इतिहास से लेकर अब तक आखिर क्यों बना रहता है हिंसा का गढ़

Israel Palestinian Jerusalem Conflict

Israel Palestinian Jerusalem Conflict : इतिहास में भी यरुशलम को लेकर रहा है विवाद

Israel Palestinian Jerusalem Conflict :  इज्राइल देश की कथित राजधानी यरुशलम हमेशा से ही काफी विवाद भरा स्थान रहा है, एक बार फिर इस विवादित स्थान की धरती लोगों के खून से लाल हो गई है.

बता दें कि एक नहीं तीन-तीन धर्मों के लिए पवित्र जगह के रूप में जाना जाने वाला यह स्थान सोमवार को फिर बड़ी संख्या में लोगों की कब्रगाह बन गया है.
चलिए हम आपको पीछले दिनों भड़की इस हिंसा का मूल कारण बताते हैं…..
क्यूं भड़की है हिंसा
इजराइल देश में इस बार हिंसा की वजह अमेरिका द्वारा यरूशलम में अपने दूतावास के उद्धघाटन का माना जा रहा है.
दरअसल कुछ महीनों पहले अमेरिका ने यरूशलम को इजरायल की राजधानी की मान्यता देते हुए तेल अवीव से अपना दूतावास यरुशलम में खोलने की बात कही थी, जिसके बाद से  फिलिस्तीन और मुस्लिम समर्थित देश अमेरिका के इस फैसले के किलाफ हो गए थे .
इसी को लेकर जब सोमवार को अमेरिका के इस दूतावास का उद्धाटन था तो फिलिस्तीनी लोग इजरायली सैनिकों से भिड़ गए जिसमें इजरायली सेना की कार्यवाही में 37 फिलीस्तीन मारे गए हैं और 1600 से ज्यादा घायल हो गए हैं.
इजरायल रक्षा बल (आईडीएफ) ने बताया है कि इस वारदात को फिलीस्तीनी आतंकवादियों समूह हमास ने किया है. उन्होंने एक अनुमान के मुताबिक बताया कि सोमवार को लगभग 35,000 लोग गाजा और इजराइल के बीच लगी सीमा पर 12 अलग-अलग स्थानों पर इकट्ठे हुए थे और ये हिंसक कारनामे इनके ही सोची समझी साजिश थी जिसे नाकाम कर दिया गया.
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शुरू से ही यरुशलम को लेकर रहा है विवाद
आपको बता दें कि यरुशलम की आबादी 8.82 लाख है और इस शहर का क्षेत्रफल 125.156 वर्ग किमी है. शुरू से ही इस सुंदर शहर को इजरायल और फिलीस्तीन अपनी -अपनी राजधानी बनाना चाहते थे, जिसे लेकर कई बार इन दोनों के बीच हिंसक लड़ाईयां भी हो चुकी हैं.
यही कारण है कि जब इजरायल ने आधिकारिक तौर पर इसे अपनी राजधानी मानना शुरू कर दिया तो दोनों देशों के बीच विवाद और भड़क गया.
तीन धर्मों का पवित्र स्थान है यरूशलम
आपको यह बात जानकर आश्चर्य़ होगा कि यरूशलम किसी एक धर्म के लिए ही नहीं बल्कि 3 धर्मों के लिए पवित्र स्थान है. यह सुंदर शहर ईसाइयों, मुस्लिमों और यहूदियों के दिल में बसता है.
हिब्रू में इसे येरुशलाइम और अरबी में अल-कुद्स के नाम से जाना जाता है, वहीं इसे दुनिया के सबसे पुराने शहरों में से एक माना जाता है.
इतिहास में इस पर कब्जे को कई लड़ाईयां हुई जिसमें ये अनेकों बार तबाह हुआ, लेकिन हमेशा ही यह पहले की तरह उठ खड़ा होता है.
इसका ज़र्रा ज़र्रा इसे इसकी अतीत की पहचान से जोड़ता है, इस शहर में 64 फीसद यहूदी, 35 फीसद अरबी और एक फीसद अन्य धर्मों के लोग रहते हैं.
यहूदियों की ज्यादा संख्या की वजह से इजरायल इस पर अपना अधिकार मानता है और अब तो इसे वो अपनी राष्ट्रीय राजधानी भी घोषित कर चुका है.
वहीं दूसरी तरफ फिलिस्तीनी लोग यरूशलम के एक हिस्से को अपनी भविष्य की राजधानी मानते हैं.
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चीन ने इसरायल को लगाई फटकार
यरुशलम में हुई हिंसा को लेकर चीन ने इसरायल को फटकार लगाई है, चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ली कांग ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि हम इजरायल द्वारा नागरिकों के खिलाफ हिंसा की निंदा करते हैं और दोनों पार्टियों, खास तौर से इसरायल से संयम बनाए रखने व तनाव बढ़ाने से बचने का आह्वान करते हैं.
उन्होंने कहा कि यरुशलम को राजाधानी का दर्जा ही वर्तमान तनाव की वजह है और यह अत्यधिक संवेदनशील मुद्दा है, जिससे राष्ट्रवादी और धार्मिक भावनाएं शामिल हैं. लू ने कहा कि हम अपने वैध अधिकारों और हितों को फिर से बहाल करने के फिलिस्तीन का समर्थन करते हैं.
बता दें कि दूनिया के सबसे प्राचीन शहर यरुशलम का हिंसा से पुराना रिश्ता रहा है. अमेरिका का यरुशलम में अपना दूतावास शिफ्ट करना इस बात का प्रूफ है कि फिलिस्तीन के साथ बातचीत और शांति की कोशिशें नाकाम हो चुकी हैं.
गौरतलब है कि इस मामले में अल कायदा आतंकी अयमान-अल-जवाहिरी ने भी रविवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है जिसमें अमरीका को जेहाद की धमकी दी गई है.