दोस्ती याद दिलाने रूस पहुंचे पीएम मोदी की पुतिन से अनौपचारिक बातचीत रहेगी असरदार !

Modi Visit Russia 2018

Modi Visit Russia 2018 : जानिए क्या है इस यात्रा का उद्देश्य

Modi Visit Russia 2018 : रूस और भारत की दोस्ती के चर्चे तो आम है, इन देशों की मित्रता इतनी पुरानी और गहरी है कि दोनों मुल्कों के बच्चे बच्चे तक को इसकी जानकारी है.

इन्हीं रिश्तों को और मजबूत बनाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अनौपचारिक दौरे पर 2 दिन के लिए रूस पहुंचे हुए है. युं तो कहने के लिए ये अनौपचारिक मुलाकात है मगर इसे लेकर विश्व राजनीतिक पटल पर इसे लेकर गहमा-गहमी तेज है.
बता दें कि रूस के निमंत्रण पर पीएम मोदी ने सोमवार को सोचि में पुतिन से मुलाकात की है. मीडिया रिपोर्टस के अनुसार दोनों नेताओं के बीच चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और रूस के संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की है.
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भारत और रूस का रिश्ता
भारत और रूस का रिश्ता शुरू से ही मैत्रीपुर्ण रहा है, इस मुलाकात के दौरान पीएम ने कहा कि भारत को शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (SCO) में स्थायी सदस्यता दिलाने में रूस की बड़ी भूमिका रही है जिसके लिए वो उसका धन्यवाद करते हैं.
साथ ही उन्होंने कहा कि हम इंटरनैशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपॉर्ट कॉरिडोर (INSTC) और BRICS के लिए मिलकर काम कर रहे हैं. गौरतलब है कि भारत औऱ पाक पिछले वर्ष ही इस संघ में शामिल हुए हैं.
आपको बता दें कि पीएम मोदी ऐसे समय में रूस की यात्रा पर गए हैं जब अमेरिका और रूस के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के कारण एक बार फिर US प्रतिबंधों का दौर शुरू हो गया है. इसके अलावा अमेरिका और भारत के बीच भी आयात शुल्क को लेकर ट्रेड वार शुरू होने की संभावना है.
पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी का हुआ जिक्र
पीएम मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन के इस अनौपचारिक मुलाकात में पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी याद किए गए.
दरअसल, पीएम मोदी ने 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ रूस की अपनी पहली यात्रा को याद करते हुए कहा कि पुतिन दुनिया के पहले नेता थे जिनसे वह गुजरात का मुख्यमंत्री बनने के बाद मिले थे.
पीएम ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री वाजपेयी और राष्ट्रपति पुतिन ने ‘रणनीतिक साझेदारी’ के जो बीज बोये थे, वे अब ‘विशिष्ट विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ में बदल गए हैं जो अपने आप में दोनों देशों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है.
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आखिर क्या है इस मुलाकात का उद्धेश्य
ग्‍लोबल हालात में दो पुराने दोस्‍तों का इस तरह मिलना राजनीतिक, कूटनीतिक, सामरिक समेत कई लिहाज से अहम है. जानकारों की मानें तो इस मुलाकात का मुख्य लक्ष्य भविष्‍य के साझा मुद्दों पर बातें करना हैं.
दरअसल, हाल के दिनों में रूस के सबंध चीन और पाकिस्‍तान दोनों के साथ सुधरे हैं,  चीन और पाकिस्तान के साथ भारत की हमेशा से ही तनातनी रही है.
इन दोनों देशों के साथ संबंध सही करने के लिए रूस, भारत के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है.
बता दें कि आने वाले दिनों में पीएम मोदी और रूसी राष्‍ट्रपति पुतिन के बीच 2 बड़ी मुलाकातें होनी है पहली मुलाकात शंघाई सहयोग संगठन में जो की अगले महीने होनी है और दूसरी पुतिन के भारत आगमन के बाद.
यही वजह थी कि इन दोनों मुलाकातों के बारे में बातें करने के लिए एक अनौपचारिक मुलाकात जरूरी थी.
मोदी और पुतिन की इस मुलाकात के बाद पूरे विश्व में यह संदेश तो फैल चुका है कि दोनों देशों के बीच मैत्रीपुर्ण रिश्ते अब बी कायम हैं. अब देखना यह है कि ये संदेश भारत के लिए विश्व पटल पर भविष्य में कितना मददगार साबित होने वाला है.
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