भारतीय कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले राजा राम मोहन राय की जयंति पर गूगल की सलामी

Raja Ram Mohan Roy Google Doodle

Raja Ram Mohan Roy Google Doodle : सती प्रथा को खत्म करने में निभाई थी बड़ी भूमिका 

Raja Ram Mohan Roy Google Doodle : गूगल आए दिन किसी विशिष्ठ व्यकित या कोई खास मौके पर डूडल बनाकर उसे सम्मान देना का ट्रेंड शुरू कर चुका है.

इसी क्रम में आज गूगल ने अपना डूडल भारत के समाज सुधारक के तौर पर सबसे प्रख्यात लोगों में से एक राजा राममोहन राय को समर्पित किया है.
बता दें कि भारत में ऐतिहासिक प्राचीन कुरुतियां से लड़कर उसके किलाफ कानून बनाने में राजा रामनोहराय का अहम योगदान रहा है. आज उनकी 246वीं जयंती है और इसी के मौके पर गूगल ने ये डूडल बनाया है.
इस डूडल को बहुत खूबसूरत तरीके से बनाया गया है, इसमें राजा राममोहन राय बीच में हैं और उनके एक हाथ में किताब है और वो दूसरे हाथ से ऊपर की तरफ इशारा करते नजर आ रहे हें. वहीं उनकी दाएं और बाएं तरफ कुछ लोग खड़े दिखाई दे रहे हैं.
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कौन थे राजा राम मोहन राय
राजा राम मोहन राय का जन्म 22 मई, 1772 को पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के राधानगर में एक ब्राहम्ण परिवार में हुआ था, उनके पिता का नाम रमाकांत राय था. वह अद्वैतवाद के समर्थक थे यही वजह थी की उन्होंने कट्टर हिंदू रीति रिवाजों और मूर्ति पूजा के खिलाफ बचपन से ही आवाज उठानी शुरू कर दी थी.
राजा राम मोहन राय बचपन से ही उस रास्ते पर चलते थे जो उन्हें सत्य का मार्ग लगता था.इसी रास्ते पर चलते हुए वो समाज में कुरीतियों और अंध विश्वास के खिलाफ लोगों को जागरुक करते रहे.
बता दें कि राजा राम मोहन ने ही उस दौर में भारतीय समाज में प्रचलित सती प्रथा के खिलाफ पहली आवाज उठाई थी. उनकी इस पहल का काफी विरोध भी हुआ लेकिन राममोहन राय इसके खिलाफ खड़े रहे और वो इसे कुरीति मानते हुए लोगों को समझाते रहे .
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इसी का नतीजा था कि आगे चलकर लंबी सामाजिक प्रक्रिया और कड़े विरोध के बाद वो अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानून के जरिए इस पर रोक लगाने में कामयाब रहे.
यह नहीं राजा साहब ने 1828 में एक ब्रह्म समाज की स्थापना की थी जिसे एक समाज सुधारक के रुप में भारतीय समाज के विकास के लिए हमेशा याद किया जाता है.
भारतीय सामाजिक और धार्मिक पुनर्जागरण के क्षेत्र में उनका विशिष्ट स्थान है.
ब्रह्म समाज के संस्थापक के अलावा वो भारतीय भाषायी प्रेस के प्रवर्तक, जनजागरण और सामाजिक सुधार आंदोलन के प्रणेता और बंगाल में नव-जागरण युग के पितामह थे.
27 सितम्बर 1833 को राजा राममोहन राय का निधन इंग्लैंड में हुआ.आज भी ब्रिटेन के ब्रिस्टल नगर के आरनोस वेल क़ब्रिस्तान में राय की समाधि है.

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