Rameshwaram Tourism : रामेश्वरम, एक ऐसा शहर जिसकी धार्मिक और प्राकृतिक सुंदरता किसी रहस्य से कम नहीं

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Rameshwaram Tourism : हर पहलु पर खास है रामेश्ववरम

Rameshwaram Tourism : दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में बसा रामेश्वरम एक ऐसा शहर है जहां की सुंदरता किसी रहस्य से कम नहीं.

ऊपर नीला आसमान, दूर दूर तक शांत समंदर की लहरें और जमीन पर चारों तरफ नारियल के पेड़ों का दृश्य यहां आने वाले हर टूरिस्ट का मन मोह लेती हैं.
12 ज्योतिर्लिंगों में से एक रामेश्वरम में भी है जिसे खुद भगवान राम ने अपने हाथों से बनाया हुई है.
अभी तक आपके मन में रामेश्वरम की पहचान हिंदु समाज के एक धार्मिक शहर के रूप में हुई होगी, लेकिन जब आपका दीदार इसकी प्राकृतिक सुंदरता से होगा तो आप का मन इसकी अलग कहानी गढ़ने लगेगा.
यही कारण है कि रामेश्वर देश ही नहीं,बल्कि विदेशी सैलानियों की भी पहली पसंद में शुमार है. आइए जानते हैं आखिर क्यों खास है रामेश्वरम.
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श्री रामानाथ स्वामी मंदिर
अभी तक आप ताज महल और लाल किला जैसी ऐतिहासिक इमारतों को ही सबसे सुंदर मानते होंगे, लेकिन अगर आपने इस मंदिर के दर्शन कर लिए तो आपके सामने शायद ताजमहल की खूबसूरती भी फिकी पड़ जाए.
मंदिर की दीवारों में हुई ऐसी नक्काशी आपको शायद दुनिया के किसी कोने में देखने को न मिल पाए. आपको बता दें कि इस मंदिर के निर्माण में त्रावणकोर, मैसूर और पुडुकोट्टई शासकों का योगदान रहा है.
दक्षिण का बनारस
रामेश्र्वरम में आप बनारस की तर्ज पर जगह-जगह मंदिर और ‘तीर्थम‘ यानी पानी के कुंड, कुएं देख सकते हैं.
हर छोटे-बड़े मंदिर के प्रांगण में और घरों के बाहर इन कुंओं पर पानी भरते और नहाते, आते-जाते लोग नजर आ जाते हैं.इसी वजह से इसे दक्षिण का बनारस भी कहा जाता है.
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रामेश्वरम बीच
मान्यता है कि इस बीच में भगवान राम ने रावण की हत्या का पाप धोने के लिए स्नान किया था. यह बीच बहुत ही सुंदर हैं. यहां हर वर्ष लाखों की संख्या में देशी व विदेशी सैलानी आते हैं. यह बीच वाटर स्पोर्ट्स के लिए भी बहुत ही फेमस हैं, यहां वाटर स्केटिंग समेत कई वाटर स्पोर्ट्स खेले जाते हैं.
यहां बने बीच पर नारियल के पेड़ों के छाल और पत्तों से बनी झोपडियों में ठहरना भी एक रोमांचकारी अनुभव रहता है.
समुद्र का ऐसा नजारा दुनिया में और कहीं नहीं
यहां के समंदर का पानी बेहद साफ है. पारदर्शी समंदर के फर्श पर तैरती नावों को देखना किसी काल्पनिक दुनिया में खोने जैसा अनुभव देता है, कोई शोर-शराबा, भीड़भाड़ नहीं.
एंजल फिश, स्टारफिश, ऑक्टोपस जैसे दुर्लभ जल जीव आपको आसानी से यहां देखने को मिल जाएंगे.
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कलाम स्मारक
पेईकुरुंबू स्थित मस्जिद प्रांगण के निकट डीआरडीओ और रक्षा मंत्रालय के सहयोग से रिकॉर्ड समय में भारत के पूर्व दिवंगत राष्ट्रपति ए पी जे कलाम का स्मारक बनाया गया है.
तकरीबन 300 से अधिक मजदूरों की सुबह 7 से रात 9 बजे तक की कड़ी मेहनत से इसे 2 साल पहले तैयार किया गया था. यहां के सेंट्रल हॉल के ऊपर बना गुंबद दूर से ही सबका ध्यान खींचता है.
यहां कलाम के उन सभी उल्लेखनीय कार्यों की प्रतिकृतियां रखी गई हैं, जो उन्होंने अपने डीआरडीओ के कार्यकाल में पूरे किए थे.
यहां कलाम की सात फीट ऊंची कांस्य की प्रतिमा भी है. इसके अलावा यहां 45 फीट लंबे और चार टन वजन के अग्नि-2 मिसाइल की प्रदर्शनी भी रखी गई है, जिसे इस स्मारक का खास आकर्षण माना जाता है.
इसका मुख्य द्वार दिल्ली के इंडिया गेट से प्रेरित है. लगभग 27,000 वर्ग फीट के क्षेत्र में बना यह स्मारक रामेश्ववरम के पारंपरिक आकर्षण को निश्चित रूप से नया आयाम दे रहा है.
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धनुषकोडि
प्रकृति के रौद्र रूप की गवाही है धनुषकोडि
चारों तरफ समुद्र ही समुद्र और एक से बढ़कर एक प्राकृतिक सौंदर्य के नजारे दिल को सुकून तो बहुत पहुंचाते हैं, लेकिन प्रकृति का ये वरदान कभी कभी अभिशाप भी साबित होता है.
रामेश्वरम शहर से 15 किलोमीटर की दूरी पर धनुषकोटि इलाका है, जहां आज भी टूटे मकान, दुकानें, रेल लाइनें, पोस्ट आफिस, चर्च अपनी दुखभरी कहानी को बयां करते हैं.
1964 में यहां आया भयंकर चक्रवात तूफान पूरे क्षेत्र में तबाही का मंजर मचा दिया था, इसमें करीब 1800 लोग मारे गए थे.
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रामसेतु
रामसेतु
रामसेतु रामेश्वरम की खूबसूरती की ताकत है. हालांकि ये क्षेत्र धार्मिक इतिहास से जुड़ा होने के कारण यहां सैलानियों के प्रवेश पर पूर्ण रूप से रोक लगाई गई है.
भले ही आप रामसेतु बीच पर न जा पाएं, मगर धनुषकोडि में पहुंचकर आप रामसेतु की हैरान करने वाली सुंदरता को करीब से देख सकते हैं.
समुद्र के बीच में रामसेतु पुल आज भी भगवान राम के लंका में जाने के संपर्क मार्ग की तस्दीक कर रहा है.
गंधमादन पर्वत
ये पर्वत इस द्वीप का सबसे ऊंचा क्षेत्र है. यहां से पूरे रामेश्वरम का दीदार किया जा सकता है. इसी पर्वत के नाम पर पहले रामेश्वसरम को ‘गंधमाधनम’ कहा जाता था. यह शहर से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर है.
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दिलचस्प है संस्कृति
अगर आप में कोई रामेश्वरम गया होगा तो उसने शायद इस बात पर ध्यान दिया होगा कि वहां के मर्द अक्सर अपने पहनावे में धोती का उपयोग करते हैं. वहां के पुरुष अपनी लुंगी को घुटने तक चढ़ाकर रखते हैं. दिलचस्प बात ये भी है कि आफिस के कामों में भी लोग लुंगी ही पहनते हैं.
यहां के घरों में हरे, नीलेपीले रंग की ही पुताई देखने को मिलती है. वहीं यहां के हर घर में प्राचीन सभ्यता के अनुसार अल्पनाओं (नक्काशी) की गई है.
वहीं इन सबके अलावा रामेश्‍वरम की पहचान पर्यटक स्थल के साथ-साथ दक्षिण भारत के प्रमुख समुद्री भोजन केंद्र के रूप में भी की जाती है.

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