रोहिंग्या चरमपंथियों ने ही किया था हिंदुओं का नरसंहार, लेकिन प्रियंका का कैंप जाना भी कोई गलत नहीं

Rohingya Militant Killed Hindus
PC- Observerbd

Rohingya Militant Killed Hindus : रोहिंग्या मुस्लिमों से मिलने पर घिरी प्रियंका, लोग कर रहे विरोध

Rohingya Militant Killed Hindus : रोहिंग्या मुस्लिमों का मुद्दा कुछ महीनों से काफी शांत पड़ा हुआ था, लेकिन एक बार फिर यह मुद्दा गरमाता नजर आ रहा है.

इस बार इसका सीधा जुड़ाव भारत से है क्योंकी रोहिंग्या मुस्लिमों पर 99 हिंदूओं की हत्या का आरोप है.
इस बात की पुष्टी मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी जांच में भी करी है.एमनेस्टी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि रोहिंग्या मुस्लिम चरमपंथि संगठन आरसा ने पिछले साल अगस्त में कई हिंदू नागरिकों की हत्या करी थी.
रिपोर्ट के मुताबिक ये हत्याएं उस समय करी गई थी जब म्यांमार में वहां की सेना के खिलाफ़ इन लोगों ने विद्रोह की शुरुआत करी थी.
हालांकि आरसा ने इस तरह के किसी हमले को अंजाम देने से साफ इनकार किया है.
यह भी पढ़ें – रोहिंग्या मुस्लिमों से अलग नहीं है हमारे कश्मीरी पंडित भाईयों की पीड़ा
क्या है रोहिंग्या मुस्लिम विवाद
दरअसल, म्यंमार एक बौद्ध बहुसंख्यक देश है जहां करीब 10 लाख रोहिंग्या मुसलमानों की आबादी बहुसंख्यक के रूप में रहती थी.
इन मुसलमानों के बारे में कहा जाता है कि वे मुख्य रूप से अवैध बांग्लादेशी प्रवासी हैं. यही वजह है कि यहां की सरकार ने इन्हें नागरिकता देने से इनकार कर दिया जबकि ये वहां पीढ़ियों से रह रहे हैं.
इसी बात को लेकर म्यांमार के रखाइन स्टेट में साल 2012 से संप्रदायिक माहौल खराब चल रहा था जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की जानें जा चुकी हैं. गौरतलब है कि म्यांमार की सेना पर इन मुस्लिमों के साथ अत्याचार करने का आरोप है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक म्यांमार में पिछले साल अगस्त के बाद से 7 लाख रोहिंग्या और अन्य को हिंसा के कारण पलायन करना पड़ा था. हिंसा के डर से आज लाखों की संख्या में ये लोग बांग्लादेश के जर्जर कैंपों में रहने को मजबुर हैं.
99 हिंदूओं की हत्या का आरोप
हिंदूओं की हत्या की जांच करने वाली मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी ने कहा कि उसने बांग्लादेश और रखाइन में कई इंटरव्यू किए जिनसे पुष्टि हुई है कि अराकान रोहिंग्या सैलवेशन आर्मी (आरसा) ने दर्जनों हिंदूओं की हत्याएं की है.
यह नरसंहार अगस्त 2017 के आख़िर में पुलिस चौकियों पर हमले के वक्त ही उत्तरी मौंगदा कस्बे के पास किए गए थे.
एमनेस्टी ने इस नरसंहार का शिकार हुए हिंदू गांव अह नौक खा मौंग सेक के कई लोगों से बातचीत करी और जाना की कैसे इन लोगों ने इतनी बड़ी संख्या में लोगों को मौत के घाट उतारा.
इस हमले में ज़िंदा बचे हिंदुओं ने एम्नेस्टी ने कहा है कि उन्होंने या तो रिश्तेदारों को मरते हुए देखा या फिर उनकी चीखें सुनीं.
बता दें कि ये वही गांव है जहां पिछले साल सितंबर में सामूहिक कब्रों से 45 हिंदूओं के शव निकाले गए थे.
यह भी पढ़ें – गिलगिट-बाल्टिस्तान को अधिक अधिकार मिलने से भारत की बढ़ सकती है चिंताए, जानिए कैसे
रोहिंग्या मुस्लिमों से मिलने पर घिरी प्रियंका
कुछ रोज पहले बॉलीवुड अभिनेत्री और युनिसेफ की गुड विल एंबेसडर प्रियंका चोपड़ा बांग्लादेश के रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में वहां के लोगों का हाल चाल जानने पहुंची थी.
जहां उन्होंने कई रोहिंग्या मुस्लिमों के छोटे बच्चों से मिलकर उनके साथ ली गई तस्वीर को अपने इस्टांग्राम पर शेयर की.
इसके बाद से प्रियंका चोपड़ा का विरोध शुरू हो गया और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोगों ने उन्हें जमकर ट्रोल किया.
बीजेपी सांसद विनय कटियार ने तो प्रियंका चोपड़ा को देश छोड़ने तक की हिदायत दे ड़ाली. उन्होंने कहा कि प्रियंका चोपड़ा जैसे लोग इन रोहिंग्या मुस्लिमों की हकीकत नहीं जानते.
रोहिंग्या मुस्लिमों को देश में रहने की इजाजत नहीं दी जा सकती क्योंकी उन्होंने हमारे हिंदूओं भाईयों की हत्या करी है और इनसे जो लोग हमदर्दी रखते हैं उन्हें भी इस देश में नहीं रहने देना चाहिए.
वहीं कुछ यूजर्स ने ट्रोल करते हुए उन्हें कहा कि भारत में भी ऐसे शरणार्थी कई सालों से हैं उनकी खबर
लेने तो आजतक प्रियंका नहीं गई.
खैर, रोहिंग्या मुद्दा को लेकर भारत का स्टैंड कुछ भी हो लेकिन यह भी सोचने वाली बात है कि प्रियंका
चोपड़ा यूसिसेफ की गुड विल एंबेसडर है और वहां वो इसी पद के हैसियत से गई थी.
ऐसे में पूरी तरह प्रियंका को देषी बनाना काफी हद तक सही नही हो सकता है और वैसे भी कुछ सड़े दिमाग के रोहिंग्या चरमपंथियों ने हिंदूओं को मारा है इसमें पूरे कौम को दोष देना वाजिब तो नहीं.
इस कैंप में वो बच्चे भी थे जिनका बचपन हिंसा की आग मेंं जल चुका है शायद उनके लिए अब दोबारा से उपर उठ पाना किसी बड़ी मुश्किल से कम नहीं.
इसी बात को प्रियंका ने अपने पोस्ट में भी लिखा है कि  बच्चे चाहे जहां के हो या जिसके भी हों, वे एक बेहतर भविष्य के हकदार हैं.