क्या है शंघाई सहयोग संगठन जिसमें हिस्सा लेने हमारे प्रधानमंत्री हुए रवाना

Shanghai Coorperation Organisation
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Shanghai Coorperation Organisation : दो दिवसीय इस बैठक में पीएम मोदी हुए चीन रवाना

Shanghai Coorperation Organisation : भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के चिंगदाओ शहर में आज से शुरू हो रहे दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) में हिस्सा लेने के लिए रवाना हो चुके हैं.

बता दें कि शंघाई संगठन में पूर्ण सदस्यता मिलने के बाद यह पहली बार है जब भारत के प्रधानमंत्री इसमें शामिल होंगे.
चीन रवाना होने से पहले अपनी फेसबुक पोस्ट में पीएम मोदी ने कहा कि वो देश के पूर्ण सदस्य के तौर पर समूह की पहली बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने को लेकर काफी रोमांचित हैं.
पीएम ने कहा कि इस शिखर सम्मेलन में आतंकवाद,अलगाववाद, अतिवाद के साथ साथ व्यापार को बढावा देना,आपसी सहयोग, सीमा शुल्क, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण संरक्षण जैसे कई विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होगी.
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क्या है शंघाई सहयोग संगठन ?
इस संगठन की नींव अप्रैल 1996 में चीन के शंघाई शहर में हुई एक बैठक में रखी गई थी.
जहां चीन, रूस, कज़ाकस्तान, किर्गिस्तान और तजाकिस्तान आपस में एक-दूसरे के नस्लीय और धार्मिक तनावों से निपटने के लिए एक साथ सहयोग करने पर राज़ी हुए थे, जिसे उस समय शंघाई फ़ाइव कहा गया था.
इसके बाद जून 2001 में इसमें उज़बेकिस्तान के शामिल होने के बाद इसे शंघाई सहयोग संगठन का नाम दिया गया.
वहीं 2005 में कज़ाकस्तान के अस्ताना में हुए सम्मेलन में भारत, ईरान, मंगोलिया और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने भी इस संगठन की बैठक में पहली बार हिस्सा लिया.
उस समय मेजबान कजाकस्तान के तत्कालिन राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेफ़ ने कहा था कि, “इस वार्ता में शामिल देशों के नेता मानवता की आधी जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करते हैं.
बता दें कि इस संगठन में शामिल देशों को मुख्य उद्देश्य मध्य एशिया में सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर आपसी सहयोग को बढ़ाना है. जबकि पश्चिमी मीडिया का ऐसा मानना है कि एससीओ का मुख्य मकसद नाटो के बराबर ताकत हासिल करना है.
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भारत का सफर
गौरतलब है कि पहली बार पर्यवेक्षक सदस्य बनने के बाद से ही रूस भारत को स्थाई सदस्य के तौर पर जुड़ने के लिए प्रेरित कर रहा था. वहीं दूसरी ओर चीन की भी हमेशा से यही मंशा थी कि भारत इस संगठन में स्थाई सदस्यता हासिल कर ले.
बहरहाल मोदी सरकार बनने के बाद भारत ने 2014 मे शंघाई सहयोग संगठन की सदस्यता हासिल करने के लिए पहली बार आवेदन किया था जिसे 2016 में मंजूर कर लिया गया.
इसके अलावा पाकिस्तान भी शुरू में इस संगठन का पर्यवेक्षक सदस्य ही था जिसे भी 2016 में भारत के साथ ही स्थाई सदस्य घोषित किया गया.
वहीं ऐसी खबर है कि अमेरिका ने भी 2005 में इस संगठन में पर्यवेक्षक सदस्य बनने के लिए आवेदन किया था जिसे नकार दिया गया था.