वकील से सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनी इंदु मल्होत्रा आज लेंगी शपथ, जानें क्या है इनका इतिहास

Supreme Court Woman Judge Indu Malhotra
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Supreme Court Woman Judge Indu Malhotra : जस्टिस जोसेफ को SC नहीं भेजने पर उठाए जा रहे हैं सवाल

Supreme Court Woman Judge Indu Malhotra : इंदु मल्होत्रा ने भारतीय न्यायपालिका में एक नया इतिहास रच दिया है, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकील से सीधे प्रथम महिला जज बनने का गौरव हासिल किया है.

बता दें कि अब आज यानि की शुक्रवार को इंदु मल्होत्रा देश के सर्वोच्च न्यायलय की महिला जज के रूप में अपने पद की शपथ लेने वाली हैं.
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आखिर कौन है ये इंदु मल्होत्रा
इंदु मल्होत्रा का जन्म 1965 में बंगलुरू में हुआ था, वे बहुत ही कम उम्र में दिल्ली आ गई थी. उनके पिता ओम प्रकाश मल्होत्रा एक वकील थे जो दिल्ली आकर अपनी प्रैक्टिस करने लगे थे.
बता दें कि वकालत शुरू करने से पहले कुछ समय के लिए इंदु ने दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज और विवेकानंद कॉलेज में एक अध्यापक के तौर पर पढ़ाया भी था.
इसके बाद 1988 में वे सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड चुनी गईं और फिर 2007 में इंदु मल्होत्रा को कोर्ट में वरिष्ठ वकील नियुक्त किया गया.

गौरतलब है कि जस्टिस लीला सेठ के बाद मल्होत्रा दूसरी महिला थीं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील नियुक्त किया.

मल्होत्रा ने सिक्योरिटीज एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी), दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए), वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) जैसे कई वैधानिक संस्थाओं का सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधित्व किया है.
यही नहीं उन्होंने द लॉ एंड प्रैक्टिस ऑफ आर्बिट्रेशन इन इंडिया किताब का सह-लेखन भी किया है.
बता दें कि इंदु मल्होत्रा पहली महिला वकील हैं जिन्हें सीधे सुप्रीम कोर्ट की जज बनाया जा रहा है वे आजादी के बाद से  कोर्साट की सातवीं महिला जज होंगी.
उनसे पहले जस्टिस एम फातिमा बीवी, जस्टिस सुजाता वी मनोहर, जस्टिस रूमा पाल, जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई और जस्टिस आर भानुमति सुप्रीम कोर्ट की जज बन चुकी हैं.
वहीं वर्तमान में जस्टिस आर भानुमति सुप्रीम कोर्ट की अकेली महिला जज हैं.
इंदु मल्होत्रा के नाम पर हुआ विवाद
दरअसल, इंदु मल्होत्रा को जज न बनाए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, इसके लिए इंदिरा जयसिंह और चीफ जस्टिस के बीच गर्मागर्म बहस भी हुई. लेकिन अंत में इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार कर दिया.
गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय की कोलेजियम ने 10 जनवरी को न्यायमूर्ति जोसेफ और सुश्री इन्दु मल्होत्रा को शीर्ष अदालत का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की थी.
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जस्टिस जोसेफ को SC नहीं भेजने पर उठाए जा रहे हैं सवाल
न्यायमूर्ति जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं देने के सरकार के निर्णय पर तीव्र प्रतिक्रिया शुरू हो गई है. उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष ने इसे परेशानी वाला बताया है.
वहीं दूसरी ओर उत्तराखंड न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के. एम. जोसेफ के नाम को मंजूरी नहीं दिए जाने को लेकर कांग्रेस ने गुरुवार (26 अप्रैल) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ‘बदले की राजनीति’ की राजनीति का आरोप लगाया है.
आपको जानकारी के लिए बता दें की जस्टिस केएम जोसेफ़ वहीं जज हैं जिन्होंने 2016 में उत्तराखंड में केंद्र के राष्ट्रपति शाशन के आदेश को रद्द कर दिया था.
सीनियर वकील इंदु मल्होत्रा के सीधे सुप्रीम कोर्ट में जज बनने के फैसले के बाद न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच एक बार फिर टकराव सामने आ गया है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस मसले पर विस्तार से चर्चा करने के लिए जजों ने गुरुवार को एक अहम मीटिंग बुलाई है, जिसमें सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार है.
शीर्ष अदालत के कई जजों का मानना है कि सरकार ने संविधान के खिलाफ काम किया है और ऐसा करके उसने न्यायपालिका की स्वतंत्रता के खिलाफ जाने की कोशिश की है.
अब देखना है कि न्याय व्यवस्था में मची ये उथल-पुथल किस दिशा में जाती है.

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