बलात्कार के खिलाफ स्वाती मालीवाल का आठवें दिन भी अनशन जारी, आखिर कब तक पीएम मोदी करेंगे अनसुना

Swati Maliwal Women Safety Protest
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Swati Maliwal Women Safety Protestमहिलाओं के खिलाफ दिल दहलाने वाली वारदातों को रोकने के लिए कठोर कानून की है मांग

Swati Maliwal Women Safety Protest : हमारा देश महिलाओं के खिलाफ होने वाली हिंसा में दुनियाभर में नंबर वन होता जा रहा है, खासकर बलात्कार जैसी वारदातों से आए दिन हमारा भारत शर्मसार हो रहा है.

बीते कुछ सालों के आकड़ों पर नजर डाले तो हर दिन देश के किसी न किसी कोने से बड़ी संख्या में महिलाएं से बलात्कार के मामले सामने आते रहे हैं.
जबकि सच्चाई यह है कि इनमें से कई केस घर के बाहर आते ही नहीं, और जो अगर आ भी जाएं तो आरोपी को सजा दिलाने में इतना समय लग जाता है कि पीड़ित महिला खुद को ही दोषी मान लेती है, रेपकेस की हमारे देश में यहीं सच्चाई है.
इसी सिस्टम को सुधारने के लिए दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवास पिछले सात दिनों से अनशन पर बैठी हैं.
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हफ्तेभर से स्वाती मालीवास कर रही है अनशन
आज यानि की शुक्रवार को स्वाती मालीवास के अनशन का आठवां दिन है. स्वाती ने 13 अप्रैल से दिल्ली के राजघाट पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर अपने अनशन की शुरूआत करी थी.
स्वाती की मुख्य मांग रेप के मामलों में जल्द से जल्द फास्ट ट्रैक अदालत स्थापित करने और छह महीने के भीतर मामले का निपटारा करने की है जिससे पीड़ित महिला को शीघ्र इंसाफ मिल सके.
कठुआ में हुआ दिल दहलाने वाली वारदात
देश में बलात्कार जैसी वारदात तो हमेशा होती रहती है लेकिन कश्मीर के कठुआ में हुए 8 साल की बेटी के साथ रेप और फिर मर्डर ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया.
इस केस के बाद पूरे देश में रेप को लेकर एक बार फिर कठोर कानून की मांग शुरू हो गई है जिसे लेकर स्वाती ने अनिश्चितकालिन अनशन शुरू कर दिया है.
बता दें कि स्वाती के इस अनशन को दिल्ली पुलिस ने रोकना चाहा जिसके बाद स्वाती ने ट्वीट कर सीएम केजरीवाल से मदद मांगी.
सीएम ने स्वाती की मदद की हामी भरी जिसके बाद मनीष सीसोदिया और कई अन्य आप पार्टी के नेता स्वाती के साथ मंच पर भी साथ देते दिखे.
गौरतलब है कि स्वाति को अनशन पर बैठे आज 8 दिन हो गए है मगर सरकार की तरफ से कोई बी प्रतिनिधि उनकी मांगो को सुनने के लिए नहीं गया, ऐसा लग रहा मानो उन्हें इस अनशन के बारे में कई खबर ही ना हो.
वहीं दूसरी तरफ हमारे देश की मीडिया भी अब तक स्वाती के अनशन को उतनी कवरेज नहीं दी जितना वो डिजर्व करती हैं. यहां हम आपसे पूछना चाहते हैं कि क्या स्वाती जो महिलाओं और छोटी बच्चियों से होने वाले बलात्कार के खिलाफ लड़ रही हैं वो क्या गलत है.
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पीएम मोदी देश से हैं बाहर
पीएम मोदी अभी स्वीडन और ब्रिटेन के दौरे को लेकर देश से बाहर हैं वहीं हफ्तेभर से अऩशन कर रही स्वाती की हालत अब काफी खराब होती दिख रही है. स्वाती अपने अनशन के सांतवे दिन व्हीलचेयर पर राजघाट पहुंची.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार डीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष स्वाती का पीएम मोदी को लेकर कहना है कि वह देश के लोगों की ‘मन की बात’ समझने में असफल हैं, आज देश प्रधानमंत्री से कार्रवाई चाहता है न कि भाषण या बयानबाजी.
स्वाती ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री जिद्दी हैं तो मैं भी कम जिद्दी नहीं हूं ,मैं तब तक अनशन समाप्त नहीं करूंगी जब तक वह मेरी मांग स्वीकार नहीं कर लेते इसके लिए मैं किसी भी तरह की कुर्बानी देने के लिए तैयार हूं.
हमारे देश का ये कड़वा सच है कि बलात्कार जैसी धिनौनी वारदात के बाद भी हमारे यहां आरोपी खुले तौर पर बाहर घुमता है और कोई उसका कुछ नहीं बिगाड़ पाता. शायद हमारे सामाज की यही सच्चाई बन गई है.
हालांकि बलात्कार को लेकर पहले से भी कई दंड के विधान है मगर पुरूष प्रधान वाले इस देश में उन कानूनों को कोई खौफ नहीं है.यही वजह है कि आज भी रेप के बाद गलती लड़की की मानी जाती है.
मगर अब बस बहुत हुआ समय आ गया है कि बलात्कार से निपटने के लिए सिर्फ कानुनी नहीं बल्कि समाजिक तौर पर भी कठोर कार्यवाही की शरुआत की जाए, ताकि आरोपी को पता चला कि किसी की इज्जत को शर्मशार करना कितना बड़ा क्राइम है.
इसके लिए सबसे पहले हमे लड़कियों को लेकर अपनी सोच बदलनी पड़ेगी तभी जाकर इस घिनौने अपराध का खात्मा संभव है.