Toilet Problem In School: उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों के बच्चे खुले में शौच जाने को मजबूर

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Toilet Problem In School: लड़कियों को उठानी पड़ती है शर्मिंदगी

Toilet Problem In School: प्रधानमंत्री मोदी के 2022 तक देश को स्वच्छ बनाने के लक्ष्य को हासिल करने मे देश का हर नागरिक अपने स्तर पर जुटा हुआ है.

नेता हो या अभिनेता हर कोई खुद को इस मुहीम से जोड़कर जगह-जगह सफाई अभियान चला रहा है ताकि लोगों के बीच देश में स्वच्छता को लेकर जागरुकता और बढ़े .
मगर वहीं दूसरी तरफ देव भूमि उत्तराखंड के स्कूलों में शौचालयों के मौजूदा हाल स्वच्छता की कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं
खुले में शौच कर रहे स्कूली बच्चे
Toilet Problem In School: एक रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में 1172 ऐसे प्राथमिक विद्यालय हैं जहां अभी तक एक भी शौचालय का निर्माण नहीं हुआ.
ऐसे में इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं. इन बच्चों में स्कूली लडकियां भी शामिल हैं, जिन्हें विद्यालय में शौचालय ना होने की वजह से अक्सर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ता है. कई लड़कियों ने तो इसी कारण स्कूल तक छोड़ दिए.
इतना ही नहीं जिन 1313 विद्यालयों में शौचालय मौजदू हैं उनमें से भी 1596 शौचालय इतनी जर्जर स्थिति में हैं, जिनका प्रयोग करना भी जान से खेलने के बराबर है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि शौचालय विहीन इन स्कूलों में तुरंत शौचालय निर्माण की जरूरत है. इसके अलावा जर्जर पड़े शौचालयों की भी जल्द मरम्मत कर उसे उपयोग करने लायक बनाने की आवश्यकता है.
प्रधानमंत्री मोदी की मुहिम को मुख्यमंत्री लगा रहे पलीता
Toilet Problem In School: आपको बता दें कि अभी तक की तमाम उत्तराखंड की सरकारें 2 हजार से अधिक स्कूलों को शौचालय तक नहीं दे पाई हैं, इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनकी स्वच्छता को लेकर असल सोच क्या रही होगी.
वहीं रिपोर्ट में शौचालय ना बनाने का जो कारण बताया गया है वो काफी हैरान करने वाला है. सरकार से जब इस रिपोर्ट में सामने आए शौचालयों के आकड़ों के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था कि प्रदेश सरकार के पास शौचालय निर्माण के लिए पैसा नहीं है, जिसके कारण वो शौचालय बनाने में असमर्थ हैं.
गौरतलब है कि इस समय उत्तराखंड में भाजपा के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की सरकार है. अब देखना यह होगा कि मौजूदा राज्य के मुखिया स्कूलों में शौचालय बनाने के प्रति कितनी संजिदगी दिखाते हैं.
बच्चे ही कर सकते हैं स्वच्छ भारत का सपना साकार
भले ही हमारे देश में साफ-सफाई को लेकर कितने ही अभियान चलें मगर यह भी सच है कि कुछ लोगों का स्वच्छता को लेकर हमेशा से ही उदासीन रवैया रहा है. लाख समझाने के बाद भी वो सफाई के प्रति गंभीर होंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं है.
ऐसी सोच वालों से स्वच्छ भारत में सहयोग की उम्मीद करना खुद को अंधेरे में रखने जैसा होगा.
ऐसे में हमारे पास एक ठोस विकल्प यही बचता है कि हम भावी पीढ़ियों को शुरू से ही स्वच्छता के प्रति इतना जिम्मेदार बना दें,कि वह खुद से देश और समाज को स्वच्छ रखने का बीड़ा उठाए. और यह तभी मुमकिन है जब खुद सरकार की तरफ से भी छोटी कक्षाओं में विशेष कार्यक्रम चलाया जाए.
बाल आयोग में आई रिपोर्ट से हुआ खुलासा
दरअसल, एडवोकेट राजेंद्र प्रसाद ने उत्तराखंड बाल अधिकार संरक्षण आयोग में सरकारी स्कूलों में शौचालय की स्थिति की जानकारी मांगी थी.
इस पर आयोग ने सक्षम अधिकारी को रिपोर्ट अवगत कराने को कहा था. जिसके बाद जुलाई 2017 में अपर राज्य परियोजना निदेशक की ओर से आयोग को यह रिपोर्ट सौंपी गई. जिसमें स्कूली शौचालय के बारे में चौंकाने वाली स्थिति का पता चला है.
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