Transgender In Indian Politics : हर तरह से सक्षम है ट्रांसजेंडर, राजनीतिक पार्टियां भी मान रही लोहा

Transgender In Politics
गुलशन बिंदु

Transgender In Indian Politics : अयोध्या से गुलशन बिंदु को मिला मेयर का टिकट

Transgender In Indian Politics : समाजवादी पार्टी ने रविवार को उत्तर प्रदेश में होने वाले निकाय चुनावों में मेयर पद के प्रत्याशियों की सूची जारी कर दी है.

इस बार पार्टी ने पहली बार नगर निगम बनी अयोध्या-फैजाबाद के मेयर पद का उम्मीदवार एक किन्नर को बनाकर सबको चौंका दिया है.
आपको बता दें कि गुलशान बिंदु नाम की इस किन्नर की पहचान अयोध्या फैजाबाद में एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में है.
लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब बिंदु चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाने जा रही हैं, इससे पहले भी वह विधायकी और पालिका अध्यक्ष पद के लिए निर्दलीय चुनाव लड़ चुकी हैं.
लेकिन हर बार महज कुछ वोटों से उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा है.
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कौन है गुलशन बिंदु
दिल्ली के एक ब्राह्मण परिवार में जन्मी 40 वर्षीय किन्नर बिंदु मूलरूप से बिहार के सीतामणि की रहने वाली हैं.
पांच साल की उम्र में किन्नर समाज ने उन्हें गोद ले लिया. जिसके बाद लंबे समय तक दिल्ली में रहने के बाद उन्होंने अयोध्या का रुख किया और यहीं अपने पेश से अलग सामाजिक कार्यों के जरिए अयोध्यावासियों के दिलों में घर कर गई.
गुलशन कहती हैं कि वह सीता के मायके से हैं, और फिलहाल अपने जीजा (राम) (अयोध्या) के यहां हैं. इस वजह से उन्हें यहां किसी भी चीज की कोई परेशानी नहीं है.
और शायद यही वजह है कि चुनाव के मैदान में गुलशन दिग्गज पार्टी के प्रतिद्वंदियों को कई बार कांटे की टक्कर दे चुकी है.
खैर आज ट्रॉसजेंडरों का चुनाव लड़ना कोई अचंभा नहीं माना जा सकता. वक्त के साथ आए बदलावों के बीच ट्रांसजेंडरों ने खुद को हर जगह साबित किया है.
वह हर तरीके से हर कार्य को करने में सक्षम है. समाज के हर क्षेत्र में इन लोगों ने जिस तरह कठीन परिश्रम और लोगों के तानों के बीच अपने सपनों को सच कर दिखाया है वो वाकई काबिले तारीफ है.
ऐसे ही दो नाम और हैं जिन्होंने राजनीति में किन्नर समुदाए का डंका बजाया है. और अपनी मेहनत और दिमाग से ना ही सिर्फ एक सीमित क्षेत्र का भला किया बल्कि अपने समुदाए के लोगों की तरफ समाज के देखने का नजरिया भी बदल दिया.
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शबनम मौसी
 1. शबनम मौसी – शबनम “मौसी” बानो (शबनम मौसी) देश की पहली किन्नर विधायक, जो सीधा जनता के द्वारा चुनकर विधानसभा पहुंची थी.
1998 से 2003 तक मध्य प्रदेश राज्य के शहडोल-अनुपपुर जिले के सोहागपुर निर्वाचन क्षेत्र से वो एमएलए रहीं.
शबनम मौसी का जन्म पुलिस में एक अधीक्षक के घर पर हुआ था. मगर समाज में खुद की बदनानी के डर से उन्होंने शबनम को त्याग दिया था.
शबनम मौसी ने एमएलए रहते हुए विधानसभा में हिजरों के भेदभाव और लोगों के बीच एचआईवी / एड्स के बारे में जागरूकता बढ़ाने संबंधित कई मुद्दों को जोर से उठाया.
शबनम मौसी ही वो पहली किन्नर हैं जिन्होंने भारत में बहुत सारे हिजरों को राजनीति में शामिल किया और समाज की मुख्यधारा की गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित भी किया.
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मधु बाई
2. मधु बाई किन्नर –  मधु बाई किन्नर छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले की पहली ट्रांसजेंडर मेयर चुनी गई हैं.
छत्तीसगढ़ के रायगढ़ शहर की जनता ने पहली बार साल 2015 में एक किन्नर को शहर का मुखिया बनाकर इतिहास रच दिया है.
शबनम मौसी की तरह मधु बाई को भी बचपन में घर से निकाल दिया गया था. जिसके बाद अपना पेट भरने के लिए उन्होंने शादी-बारात और अन्य अवसरों पर नाचने का काम किया.
रायगढ़ में मेयर के चुनावों में जब वह खड़ी हुईं तो लोगों ने उनका खूब मजाक उड़ाया.
लेकिन आखिरकार उन्होंने बीजेपी के प्रत्याशी को 4 हजार 537 वोटों से हराकर मेयर का चुनाव जीत लिया था.
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दुनिया भर में मिल रहे हैं ट्रांसजेंडरों को हक
देश हो या विदेश आज हर जगह ट्रंसजेंडर समुदाए के लोगों के अंदर उत्साह है और अपने लिए समाज को जागरूक करने का हौसला भी.
और हो भी क्यों ना विश्व का शायद ही कोई ऐसा देश हो जिसने इन लोगों को समाज में बराबरी का हक दिलाने के लिए कोई नीति ना तैयार की है.
आज न सिर्फ इस समुदाय की बड़ी संख्या है बल्कि इनके कई सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर ग्रुप भी हैं जो विभिन्न सोशल साइट्स पर अपनी पहुंच बनाए हुए हैं.
यही नहीं इन्हें आज के दौर से जोड़ने के लिए कई तरह की योजनाओं का शुभारंभ भी किया जा रहा है.
जैसे कि भारत के कोयंबटूर में देश का पहला ट्रांसजेंडर स्पा खोला गया है, वहीं दिल्ली में देश की पहली ट्रांसजेंडर मॉडल एकेडमी स्थापित की गई.
जर्मनी में भी एक कानून बनाया गया है जिसमें बच्चे के जन्म प्रमाण पत्रों या अन्य दस्तावेजों पर लिंग लिखना जरूरी नहीं होगा. ताकि बच्चे बड़े होकर खुद ही अपना लिंग तय कर सकें.
इसके अलावा 2015 में पाकिस्तान के मुफ्तियों ने एक फतवे के तहत ट्रांसजेंडरों के निकाह को इस्लामी कानून के मुताबिक वैध ठहराया है.
उनका मानना है कि ऐसे लोग जिनमें शारीरिक रूप से पुरुषों के अंग मौजूद हैं, वह स्त्रियों के अंग वाले दूसरे व्यक्ति से निकाह कर सकते हैं.

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