Uttarakhand Flood Disaster : भीषण जल प्रलय के मुहाने पर एक बार फिर खड़ा उत्तराखंड

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Uttarakhand Flood Disaster : केदारनाथ से चार गुना बड़ी हो सकती है ये आपदा

Uttarakhand Flood Disaster : उत्तराखंड की 2013 की केदारनाथ आपदा तो आपको याद होगी ही, जिसने केदारनाथ बाबा के दर्शन करने की इच्छा पाले हजारों भक्तों की जीवनलीला समाप्त कर दी थी.

अब एक बार फिर वैज्ञानिकों द्वारा उत्तराखंड में एक-दो साल के भीतर भीषण आपदा आने की संभावना जताई जा रही है.
और यह आपदा केदारनाथ से भी चार गुना भयंकर हो सकती है. लेकिन इस बार इसका गवाह केदारघाटी नहीं बल्कि गंगोत्री बनेगा.
जी हां, आपको यह जानकर ऐसा लग रहा होगा कि यह कोई भविष्यवाणी हो. लेकिन हम आपको साफ तौर पर बता देतें हैं कि यह कोई भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि केंद्रीय वाडिया संस्थान हिमालयन भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की सरकार को एक चेतावनी है.
मलबे के कारण बन रही झील
खतरे से आगाह करने वाला यह वही वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान है, जिसने 2004 में ही केदारघाटी के निकट किसी बड़ी आपदा की आशंका सरकार के सामने व्यक्त की थी.
अब इस बार संस्थान के भू-विज्ञानियों ने कहा है कि गोमुख में बन रही झील के कारण एक बार फिर राज्य एक बड़ी त्रासदी का शिकार हो सकता है.
आपको बता दें कि केदारधाम में 2013 से पहले भी इसी तरह कि एक झील बन गई थी जिसे वैज्ञानिकों ने बाद में आपदा का मुख्य कारण माना था.
संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पीएस नेगी ने बताया कि इसी वर्ष जुलाई में आई बाढ़ के बाद गोमुख में झील का बनना शुरू हो गया है.
उन्होंने कहा कि बाढ़ के कारण धारा के मुहाने पर करीब 30 मीटर ऊंचे मलबे का ढेर लग गया है और वहां पानी का प्रवाह सुचारू रूप से नहीं हो पा रहा है.
जिस वजह से वहां करीब 4 मीटर गहरी झील बन गई है. पहले जो धारा सीधे बहती थी, वह अब दायीं तरफ से बहने लगी है.
अगर कभी यह बहाव भी रुक गया तो यहां 30 मीटर ऊंची, 50-60 मीटर लंबी और करीब 150 मीटर चौड़ी झील बन जाएगी.
ऐसे में 30 मीटर ऊंचा मलबे का ढेर, जो बोल्डर, रेत और आइस ब्लॉक से बना है, एक झटके में टूट जाएगा और झील में एकत्र पानी तेजी से नीचले इलाकों में आना शुरू हो जाएगा. जो राज्य में एक विक्राल जल तबाही मचा सकता है.
अबकि बार नहीं चेते तो प्रदेश हो जाएगा तबाह
अब एक बार फिर वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वैज्ञानिकों की ओर से प्रदेश एवं केंद्र सरकार को आगाह किया गया है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि अबकि बार आई आपदा के नतीजे केदारनाथ से भी चार गुना भीषण होने की संभावना है.
जल्द कदम उठाने की जरूरत
वैज्ञानिक डॉ. नेगी कहते हैं कि उच्च हिमालयी क्षेत्र होने के कारण मलबे के ढेर से छेड़छाड़ करना उचित नहीं है.
उन्होंने बताया कि इसका एक ही उपाय है कि ऐहतिहात के तौर पर गोमुख के निचले क्षेत्रों जैसे गंगोत्री आदि में खतरे का आकलन कर सुरक्षा के सभी इंतजाम पहले से ही पुख्ता कर लिए जाएं.

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