Women Rights In Islamic Countries : इस्लामिक देश भी समझने लगे महिला अधिकारों की बात

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Women Rights In Islamic Countries : सउदी अरब के ताजा फैसले हैं बड़े उदाहरण

Women Rights In Islamic Countries : समाज में स्त्रियों की शिक्षा तक पहुंच का अभाव उनके स्वास्थ्य सामाजिक जीवन पर उलट प्रभाव डालता है.

महिलाओं का शिक्षित ना होना उन्हें जरूरी जानकारियों और बुनियादी हक़ों तक पहुँचने में असमर्थ कर उनके मौलिक अधिकारों का हमेशा से हनन करता आया है.
इस कारण वे सांस्कृतिक कुप्रथाओं और विकृत धार्मिक उपदेशों का शिकार बन जातीं है.
ये समस्या ख़ासतौर पर मुस्लिम देशों में अधिक है, जहाँ 40 प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 65 फीसदी महिलाएं अनपढ़ हैं.
इस्लामिक देशों और लड़कियों की शिक्षा का ज़िक्र हो तो नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला युसुफ़ज़ई का नाम कैसे पीछे रह सकता है.
पाकिस्तान की एक ऐसी लड़की जिसने 14 साल की उम्र में शिक्षा के अपने अधिकारों के लिए रूढ़ीवादी तालिबानियों की गोलियों से तक न घबराई.
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महिलाओं को शिक्षा के बुनियादी हक से अवगत कराने के प्रयास में जुटी मलाला का मानना है कि “यदि आप आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आपको अपनी लड़कियों को शिक्षित करना होगा क्योंकि जब आप लड़कियों को शिक्षित करते हैं, तो आप पूरे समुदाय को स्वतः बदलते हैं”.
इस वाक्य में जिस बदलाव की मलाला बात कर रही हैं उसकी हल्की सी झलक आपको सउदी सरकार के ताज़ा फैसलों में देखने को मिल सकती है.
हाल ही में सउदी सरकार ने जिस तरह महिलाओं की ड्राइविंग और स्टेडियम के अंदर जाने पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाकर एक ऐतहासिक कदम उठाया है, वो वाकई काबिले तारीफ है.
इस सुधार का पूरा श्रेय सउदी प्रिंस सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ को जाता है जिनकी आधुनिक सोच के कारण ये सब मुमकिन हो सका है.
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गौरतलब है कि पुरुष और महिलाओं के बीच लैंगिक भेदभाव तो सउदी में कम होता दिख रहा है लेकिन लैंगिग असमानता अब भी वहां बड़ा मुद्दा है.
संयुक्त राष्ट्र की अरब मानव विकास रिपोर्ट के अनुसार लैंगिग असमानता की उच्च दर महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों की कमी पैदा कर रही है.
जिस कारण अरब देशों में महिला श्रमिक भागीदारी 24 प्रतिशत से भी कम है, जबकि अन्य विकासशील देशों में ये आंकड़ा 50 फीसदी है.
वहीं ग्लोबल जेंडर इंडेक्स 2016 की रिपोर्ट के मुताबिक लैंगिक अंतर के मामले में 23 इस्लामिक देश सूची में सबसे नीचे हैं. जिसका सीधा प्रभाव उन मुल्कों की जीडीपी पर पड़ता है.
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महिलाओं के प्रति कड़े दकीयानुसी कानून और शिक्षा से उनकी दूरी मुस्लिम राष्ट्रों की जड़ों में काफी अंदर तक है. जिसे शायद इतनी तेजी से खत्म नहीं किया जा सकता.
लेकिन सउदी अरब के प्रिंस सलमान जैसे लोगों की युवा सोच और मलाला युसुफ़ज़ई जैसी लड़कियों का अपने हक के लिए आवाज उठाना इस्लामिक राष्ट्रों में महिलाओं की स्थिति को परिवर्तित कर रहा है.

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