शानदार कामयाबी और संघर्षशील जीवन, 6वीं बार विश्व चैंपियन बनी ‘मैरीकॉम’ का कुछ ऐसा है सफर

6th Time World Champion Mary Kom Life Story

6th Time World Champion Mary Kom Life Story : छोटे से गांव में देखा गया मैरा का सपना आज करोड़ों लोगों के लिए बन गया प्रेरणादायक

6th Time World Champion Mary Kom Life Story : शनिवार को दिल्ली में वो हुआ जिसे जानकार हर भारतवासी काफी गौरवान्वित महसूस कर रहा होगा, दरअसल कल भारत की महिला मुक्केबाज मैरीकॉम ने छठवीं बार वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर एक नया इतिहास रच दिया है.

मैरीकॉम ने 48 किलोग्राम भारवर्ग में यूक्रेन की हना ओखोटा को हराकर ये उपलब्धि हासिल की. फाइनल मैच में उन्होंने ओखोटा को 5-0 से एकतरफा मुकाबले में हराकर अपने देश को ये जीत दिलाई.
बता दें कि मैरीकॉम इस वक्त 35 वर्ष की हैं जबकि उनकी विरोधी ओखोटा की उम्र 22 वर्ष है यानी दोनों की उम्र में 13 वर्ष का अंतर है. लेकिन मैरीकॉम ने उम्र में इतना फर्क होते हुए भी ओखोटा को तीनों राउंड में ही अपने उपर हावी होने का कोई मौका नहीं दिया.
ज्ञात हो मणिपुर में जन्मी मैरीकॉम ने पहली बार 16 वर्ष पहले अपना पहला गोल्ड मेडल जीता था और अब दिल्ली में अपने देशवासियों के सामने 6वां अंतराष्ट्रीय गोल्ड जीतते हुए ये साबित कर दिया कि उनके अंदर अभी भी जीतने का उतना ही जुनून है.
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कड़े संघर्ष करते हुए पाई मंजिल
मैंगते चंग्नेइजैंग उर्फ मैरीकॉम का जीवन उनकी आज की उपलब्धियों की तरह इनता शानदार नहीं था उन्हें अपनी जिंदगी में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
गरीब परिवार में जन्म लेने के कारण उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन इस मुकाम पर पहुंचेगी.
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वह गांव में अपने परिवार के साथ रहती थी और कम संसाधनों के बावजूद भी उन्होंने अपने आप को सफल मुक्केबाज बनाने में कोई सकर नहीं छोड़ी.
बता दें कि मुक्केबाजी के प्रति उनका लगाब डिंको सिंह की वजह से बढ़ा था जब उन्होंने 1998 में एशियाई खेलों में गोल्ड मेडल जीता था वहीं से मेरी कॉम को भी बॉक्सिंग का चस्का लग गया.
जानकर हैरानी होगी कि काफ़ी समय तक तो उनके माँ-बाप को पता ही नहीं था कि मेरी कॉम बॉक्सिंग कर रही है.
साल 2000 में अख़बार में छपी स्टेट चैंपियन की फोटो से उन्हें पता चला कि उनकी बेटी एक पेशेवर मुक्केबाज बन गई है.
हालांकी इस खबर को जानने के बाद उनके पिता को ये डर सताता रहता कि अगर बॉक्सिंग में मैरीकॉम को चोट लगी तो इलाज कराना मुश्किल होगा और शादी में भी दिक्कत आएगी.
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सुपरमॉम मैरी
मैरीकॉम को ‘सुपरमॉम’ के नाम से भी जाना जाता है क्योंकी तीन बच्चे होने के बावजूद उन्होंने बॉक्सिंग करना नहीं छोड़ा. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह वह अपने पति के आनलुर कोम को मानती हैं.
कई इंटरव्यूह में उन्होंने बताया कि उनके पति ने हर मोड़ पर उनका बखूबी साथ दिया और कभी भी बॉक्सिंग और परिवार में कुछ चुनने को नहीं कहा. वह परिवार की देखरेख के साथ साथ मैरी की ट्रेनिंग में भरपूर हिस्सा लेते हैं.
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इसमें कोई शक नहीं कि मैरीकॉम अपनी फिटनेस के लिए काफी कड़ी मेहनत करती हैं.
आपको जानकर काफी गर्व महसूस होगा कि मैरी कॉम ने कल की अपनी जीत के बाद विश्व चैंपियनशिप के इतिहास में छह खिताब जीतने के विश्व रिकॉर्ड (महिला और पुरुष) की बराबरी भी कर ली है.
अभी तक छह बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव सिर्फ क्यूबा के पुरुष मुक्केबाज फेलिक्स सेवोन के नाम था.
मिल चुके हैं कई सम्मान
युवा मामलों और खेल मंत्रालय ने उन्हें मुक्केबाजी के लिए राष्ट्रीय पर्यवेक्षक के रूप में भारतीय मुक्केबाज अखिल कुमार के साथ नामित किया और हाल ही में उन्हें वीरांगना पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया.
इन सबके अलावा चार साल पहले उनके संघर्ष को आधार बनाकर उन पर बायोपिक फिल्म ‘मैरी कॉम’ बनीं.
वहीं पांच बार की विश्व चैंपियन मुक्केबाज एमसी मैरीकॉम को पिछले दिनों ही ट्राइब्स इंडिया का ब्रांड एंबेस्डर भी बनाया गया जो जनजातीय मामलों के मंत्रालय की पहल है.
भारत की बॉक्सिंग में पहचान धूमिल न हो इसके लिए मैरी कॉम ने बॉक्सिंग अकेडमी की शुरूआत की है जिसमें ज्यादातर वह गरीब बच्चे शामिल हैं जो बॉक्सिंग में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं.
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मैरी कॉम की उपलब्धियां
2012 के ओलंपिक में कांस्य पदक
एशियन महिला मुक्केबाज़ी प्रतियोगिता में 5 स्वर्ण और एक रजत पदक
एशियाई खेलों में 2 रजत और 1 स्वर्ण पदक
मैरी कॉम को साल 2003 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
2006 में पद्मा श्री, 2013 में पद्मा भूषण और 2009 में राजीव गाँधी खेल रत्न अवार्ड

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आज बच्चा बच्चा जानता है मैरीकॉम को
मैरीकॉम ने ना सिर्फ अपना और देश का नाम रोशन किया है बल्किआज वो उन लोगों के लिए भी एक आइडल बन गई हैं जो अपने अंदर की प्रतिभा को निकालने के लिए मौके तलाशते रहते हैं.
इनके जीवन के संघर्षों को जानकर आज देश का हर युवा ये सपना देख सकता है कि भले ही इस समय उसके जीवन में कितनी ही परेशानियां क्यों ना हो लेकिन अपने मजबूत हौसले और जुनून से वो उस चीज को हासिल कर सकता है जिसके लिए वो मेहनत कर रहा है.