कॉमनवेल्थ में संजीता ने देश को दिलाया दूसरा गोल्ड, इस वजह से खुद को करना चाहतीं थी साबित

Sanjita Chanu Wins CWG Gold
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Sanjita Chanu Wins CWG Gold : 2009 में मिली पहली पहचान

Sanjita Chanu Wins CWG Gold : ऑस्ट्रेलिया में खेले जा रहे गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ खेलों से सुबह सुबह एक बार फिर खुशखबरी आई .मीराबाई चानू के बाद संजीता चानू ने भी भारत को वेटलिफ्टिंग में दूसरा गोल्ड दिला दिया है.

नार्थ ईस्ट राज्य इम्फाल की रहने वाली संजीता चानू इस बार बदली हुई कैटेगरी में उतरी थी इसके बावजूद उन्होंने अपने पिछले कॉमनवेल्थ खेलों के प्रदर्शन को जारी रखते हुए वह कर दिखाया जिसकी उनसे उम्मीद की गई थी.
बता दें कि शुक्रवार को संजीता चानू ने गोल्ड जीत कर भारत को पदक तालिका में तीसरे नंबर पर पहुंचा दिया है.
संजीता चानू ने सिल्वर मेडल जीतने वाली पपुआ न्यूगिनी की खिलाड़ी को 10 किलोग्राम के अंतर से हराया.
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2009 में मिली पहली पहचान
संजीता चानू ने 53 किलोग्राम भार वर्ग की वेटलिफ्टिंग में गोल्ड मेडल जीता है. 24 साल की संजीता ने स्नैच के तीन प्रयासों में क्रमश: 81, 83 और 84 किलोग्राम का भार उठाया.
जबकि ‘क्लीन एंड जर्क’ में उन्होंने 104, 108 का भार उठाया जबकि तीसरी बार में उन्होंने 112 किलो उठाने का प्रयास किया था जिसमें वह असलफल रहीं थी.
राष्ट्रमंडल खेलों में अपने दमदार प्रदर्शन के बल पर भारत को गोल्ड से नवाजने वाली संजीता चानू मूल रूप से मणिपुर की रहने वाली हैं.
2009 में सीनियर नैशनल में गोल्ड जीतने के बाद वह लोगों की नजर में पहली बार आईं. इसके बाद 2011 में एशियन वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल और 2012 में कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप्स में गोल्ड मेडल जीता.
2014 के ग्लास्गो कॉमनवेल्थ में उन्होंने सिर्फ 20 साल की उम्र में गोल्ड मेडल हासिल किया था जबकि इन्हीं खेलों में मीराबाई ने सिल्वर मेडल हासिल किया था.
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हक की लडाई के लिए पहुंची हाईकोर्ट
बता दें कि संजीता के जीवन में एक ऐसा पल भी आया जब वह अपने देश की खेल मंत्रालय से बगावत कर बैठीं.
दरअसल संजीता का नाम 2017 में अर्जुन पुरस्कार पाने वालों की सूची में नहीं शामिल किया गया था जिसे लेकर उन्होंने दलील दी थी कि दो साल लगातार बेहतरीन परफॉर्मेंस देने के बावजूद आखिर कैसे उनको अर्जुन पुरस्कार के लिए नहीं चुना गया.
उनका कहना था कि खेल मंत्रालय के मानकों के मुताबिक उनसे कमतर प्रदर्शन करने वाले एथलीट्स को इस पुरस्कार के लिए नामित किया गया है लेकिन उन्हें नहीं.
हालांकि यह तब की बात है जब संजीता चानू भारत के लिए कई मेडल जीत चुकी थी.
इसके खिलाफ संजीता ने अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया मगर इसके बाद भी उन्हें अवॉर्ड नहीं मिला.
लेकिन आज संजीता ने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 53 किलो वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर खेल मंत्रालय को यह सोचने पर मजबूर कर दिया होगा कि वास्तव में वो अर्जुन अवार्ड की हकदार थी.