Facebook Data Leak : जानें कैसे, फेसबुक हमारे निजी डाटा में सेंध लगाकर सियासी दलों को पहुंचा रहा फायदा

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Facebook Data Leak : 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा थर्ड पार्टी को किया गया एक्सेस 

Facebook Data Leak : फेसबुक एक ऐसा प्लेटफार्म है जिस पर दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी अधिकतर समय बिताती है. यही नहीं लोग इस सोशल प्लेटफार्म पर अपनी निजी जानकारी भी साझा करते हैं.

ऐसे में फेसबुक द्वारा यूजर्स का डाटा एक्सेस कर उसे इस्तेमाल करना हैरान करने वाली बात है.
आपको बता दें कि कैंब्रिज एनालिटिका को लेकर हुए स्टिंग ऑपरेशन के बाद फेसबुक आलोचनाओं से बुरी तरह घिर चुका है. गौरतलब है कि कैंब्रिज एनालिटिका एक पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म है जिसने करीब 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स का डेटा एक थर्ड पार्टी ऐप के जरिए एक्सेस कर दिया.
फेसबुक पर हुई इतनी बड़ी धोखाधड़ी को लेकर मार्क जकरबर्ग के पास भी कोई जवाब नहीं है.हालांकि कुछ घंटो पहले उन्होंने आधारिक तौर पर माना कि उनकी कंपनी से गलती हुई है.
जाहिर है कि ये पहली बार नहीं है जब यूजर्स का डाटा उनकी इजाजत के बिना इस्तेमाल किया गया है लेकिन इस बार चोरी हुआ डाटा फेसबुक के इतिहास का सबसे बड़ा डाटा लीक स्कैम माना जा रहा है.
वहीं इस धोड़ाधड़ी से और अपनी निजी जानकारी लीक होने से लोगों में भी काफी आक्रोश देखने को मिल रहा है, यही नहीं फेसबुक पर यूजर सेक्योरिटी भंग होने से इसका विरोध #deletefacebook कैंपेन के जरिए किया जा रहा है.
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जानिए कैसे होता है डाटा लीक का पूरा खेल
इस मामले में सबसे पहले आपको ये समझना होगा कि जब यूजर ऑनलाइन होता है तो उस पर कम से कम तीन अलग-अलग तरह से नजर रखी जाती है. ये नजरें आपके द्वारा की गई हर सर्च की जानकारी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, होस्ट वेबसाइट और फेसबुक तक पहुंचाती हैं.
यही तरीका है जिसके जरिए आपके द्वारा फेसबुक पर की गई हर एक्टिविटी और क्लिक की जानकारी फेसबुक को मिल जाती है और फेसबुक के लिए किसी भी यूजर का डेटा पाने का सबसे आसान बन जाता है.
साथ ही कुछ खास तरह के ऑनलाइन गेम भी थर्ड पार्टी वेबसाइट्स हमारी निजी जानकारी एक्सेस करके डाटा चुराने में मदद करते हैं.
इसके अलावा फेसबुक पर कुकिज़(Cookies) के जरिए भी हमारा पर्सनल डाटा आसानी से लीक किया जाता है.
आपको बता दें कि कुकिज़ एक ऐसा शब्द है जो यूजर्स के ऑनलाइन होते ही उसकी एक्टिविटी और उसके सर्च से जुड़ी जानकारी इकट्ठा कर लेता है. कुकिज़ डेटा का छोटा सा हिस्सा होता है जो यूजर के ब्राउजिंग से जुड़ी जानकारी वेबसाइट को रिकॉर्ड के तौर पर भेजता है.
इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा कि फेसबुक न सिर्फ आपकी चैट और आपके लाइक, शेयर की एक्टिविटी पर नजर रखता है बल्कि थर्डपार्टी वेबसाइट से साझा भी करता है.
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चुनाव में पार्टियों को मिला फायेदा
हाल ही में कैम्ब्रि‍ज एनालिटिका ने फेसबुक से लीक हुए डाटा को लेकर दावा किया है कि थर्ड पार्टी द्वारा साझा किया जा रहा डाटा चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल किया जाता है.
यह डाटा क्लाइंट को चुनाव में जीतने के लिए मददगार साबित होता है. राजनैतिक पार्टीज यूजर्स के इस लीक डाटा को बड़े पैमाने पर हासिल कर वोटर्स के व्यवहार का अध्ययन करती हैं और सोशल मीडिया तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपने विज्ञापनों और अभियानों से उन्हें प्रभावित करने की भी कोशिश करती हैं.
आपको बता दें कि सीए यानि कैम्ब्रिज एनालिटिका भारत सहित कई देशों में सक्रिय है. सीए की ही मदद से ही फेसबुक से लीक हुए डाटा का पता चला और साथ ही यह सामने आया कि कैसे अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी के लिए काम आया और डोनाल्ड ट्रंप को जीत में मदद मिली.
वहीं अमेरिकी राजनीति के लिए ही नहीं सीए ने इस लीक हुए डाटा का सीधा कनेक्शन भारत के साथ भी उजागर किया.
कंपनी ने दावा करते हुए कहा कि साल 2010 के बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार को भारी जीत दिलाने में फेसबुक डाटा ने सबसे बड़ी मदद की थी.