देश की बेटियों ने किया शोध, अब दिवारों पर नहीं दिखेगा पान की थूक का निशान

Girl Students Develop Paan Stainer Eraser
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Girl Students Develop Paan Stainer Eraser : अपने शोध की वजह से अमेरिका में लड़कियों ने जीता इनाम

Girl Students Develop Paan Stainer Eraser : भारत में पिछले चार सालों से स्वच्छ भारत अभियान को लेकर देश भर में जागरुकता फैलाई जा रही है.

रेलवे स्टेशन,बस स्टैंड,पार्क,चौराहे से लेकर सरकारी संस्थानों के अंदर हर जगह लागों के भीतर स्वच्छ भारत को लेकर जागरूकता बढ़ाई जा रही है.
अक्सर आपने रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंड की दीवारों पर कुछ अस्वच्छ मानसिकता के पीड़ित लोगों द्वारा पान या गुटखा खाकर दिवाल पर लाल रंग की पीक के निशान देखे होंगे.
हालांकी इस समस्या का हल निकालना मुश्किल है क्योंकि इसके लिए सफाई से ज्यादा लोगों का ऐसा ना करने के लिए रोकना जरूरी होता है.
लेकिन स्वच्छ भारत से प्रेरित होकर मुंबई के रामनारायण रूया कॉलेज की कुछ इंजीनियरिंग की लड़कियों ने सार्वजनिक जगहों को बदसूरत करने वाले पान के दागों को मिटाने के एक कॉस्ट इफेक्टिव तरीका ढूंढ निकाला है.
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दरअसल एमआईटी यूनिवर्सिंटी द्वारा हर साल इंटरनेशनल जिनेटकली इंजीनियर्ड मशीन नामक विश्वव्यापी शोध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है.
इस प्रतियोगता में उच्च दर्जे के शोध को जगह दी जाती है. रिपोर्ट के अनुसार इस साल भी स्पर्धा में 300 से अधिक टीमों ने हिस्सा लिया था.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पान की पीक के दाग मिटाने वाली शोध के लिए लड़कियों की इस टीम को बॉस्टन(अमेरिका) में जेनेटिकली इंजीनियर्ड मशीन्स 2018 में गोल्ड मेडल जीता.
साथ ही ईनामी राशि के तौर पर बॉयोटेकनोलॉजी डिपार्टमेंट की तरफ़ से 10 लाख रुपये भी दिये गये.
क्या और कैसे किय शोध
लड़कियों ने पान बेचने वालों से बात कर पता किया कि पान का ये लाल-भूरा रंग कहां से आता है. उन्हें पता चला कि पान में डाले जाने वाले चूने और कत्थे की वजह से ये रंग आता है.
इसके बाद उन्होंने ऐसे माइक्रोब्स और एन्जाइम्स तैयार किए जो पान के लाल रंग को एक हानिरहित रंगहीन पदार्थ में बदल सकते हैं.
शोध करने वाली एक लड़की ने इस बारे में बताया कि उन्होंने इस पदार्थ को एक जेल के रूप में तैयार किया जिसका इस्तेमाल कई भी व्यक्ति पान की लाक पीक को साफ करने के लिए कर सकता है.
उन्होंने अपने प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए सफाईकर्मियों से भी बात की और जानने की कोशिश करी कि पान के दाग साफ करने में क्या दिक्कत आती है.
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उन्होंने क्लीनिंग प्रॉडक्ट्स बनाने वाली कंपनियों से भी बात करके ये पता लगाया कि वो किस तरह के क्लीनिंग एजेंट्स इस्तेमाल करते हैं.
टीम को अपनी रिसर्च में पता चला कि रेलवे हर रोज ट्रेनों से पान के दाग साफ करने के लिए 60,000 लीटर पानी रोज इस्तेमाल करती है. टीम के इस प्रॉडक्ट के चलते पानी की बचत भी होगी.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस शोध में शामिल सभी लड़कियां जिनमें अंजली वैद्य, ऐश्वर्या राजूरकर, कोमल परब, श्रृतिका सावंत, निष्ठा पांगे, मैथिली सावंत, मीताली पाटील और सानिका आंबरे से मुलाक़ात की और उनके काम की प्रशंसा की.
इसके साथ ही इन सभी स्टूडेंट्स को सम्मानित भी किया. इस शोध के अलावा छात्राओं ने सोशल मीडिया पर #PaanSePareshan मुहिम भी चला रखी है, ताकि लोगों को जागरुक किया जा सके.