उत्कृष्ट ने दीवार के पार देखने की कहानी को कर दिखाया सच, ईजाद की 3डी लेजर तकनीक

Indian Engineer Invent 3D Laser Technique
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Indian Engineer Invent 3D Laser Technique : गाजियाबाद के उत्कृष्ट ने दिवार के पार देखने वाली तकनीक की करी खोज

Indian Engineer Invent 3D Laser Technique : कुछ कर गुजरने का जुनून कभी बेकार नहीं जाता, ये सिर्फ कहावत नहीं है. कड़ी मुश्किलों को पार करते हुए मांझी का पहाड़ तोड़कर रास्ता बनाना ही ले लो.
सिर्फ एक नहीं ऐसे कई और जोश व जुनून से भरे महान कामों को अंजाम देने वाले लोगों की कहानियों से इतिहास भरा पड़ा है.
इसी क्रम में युवा पीढ़ी के लिए नए प्रेरणादायक के रूप में तकनीक की दुनिया में उभरे गाजियाबाद के 30 वर्षीय उत्कृष्ट गुप्ता शामिल हो गए हैं.
दरअसल उत्कृष्ट गुप्ता ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जिसके जरिए दीवारों के पार किसी भी ऑब्जेक्ट को देखना संभव हो सकेगा.
बता दें कि उत्कृष्ट एक 3डी प्रोजेक्टिव डिस्प्ले के लिए एल्गोरिदम डिजाइन पर भी काम कर रहे हैं, जो लेज़र तकनीक के जरिए और ईंट या कंक्रीट की दीवार के पार देखने का काम आसान कर देगा.
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कौन हैं उत्कृष्ट गुप्ता
उत्कृष्ट गुप्ता गाजियाबाद के लोहिया नगर के रहने हैं जिन्होंने अमेरिका के मैसाच्युसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआइटी) से कम्प्युटेशनल फोटोग्राफी एल्गोरिदम में पीएचडी की है.
बता दें अमेरिका जाने से पहले उत्कृष्ट ने IIT दिल्ली से ग्रेजुऐशन की है और साल 2009 में उन्होंने 9.6 स्कोर के साथ आईआईटी में भी टॉप किया था. इसके साथ ही उन्होंने CAT में 99.4 हासिल किए और यूपीटेक एंट्रेंस भी टॉप कर चुके हैं.
यही नहीं उनकी काबिलियत को देखते हुए उन्हें प्रेसिडेंशियल गोल्ड मेडल से भी नवाज़ा जा चुका है.
उत्कृष्ट के पिता जो कि एक डॉक्टर ने बताया कि उनका बेटा बचपन से ही काफी मेधावी रहा है.
दैनिक जागरण पर छपि खबर के मुताबिक उत्कृष्ट गूगल और लिंक्डइन जैसे बड़े सोशल प्लेटफार्म में भी काम कर चुके हैं है.
गूगल में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर रहते हुए उन्होंने मई 2013 से अगस्त 2014 तक ध्वनि प्रतिक्रियाओं की गुणवत्ता में सुधार के लिए काम किया और व्हाट्स ऑन क्रोमकास्ट जैसी क्रियाओं को विकसित किया.
वहीं लिंक्डइन में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के पद पर काम करते हुए उन्होंने अल्ट्राफास्ट खोज कर आर्किटेक्ट के काम को आसान बनाया.
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क्या है दीवार के पार देखने की तकनीक
फोटॉन (सूर्य के प्रकाश के कण) किसी भी चीज से टकराकर इधर-उधर छिटकते रहते हैं. इन्हीं छिटके हुए फोटॉन की गति और दिशा को जानकार एडवांस ऑप्टिक्स के जरिए उस चीज़ की 3-डी इमेज बन जाती है, जिससे टकराकर प्रकाश के कण बिखर जाते हैं.
इसी की मदद से आसानी से दीवार के पीछे चलते-फिरते किसी भी निर्जीव वस्तु की लंबाई, चौड़ाई और उंचाई का पता लगाया जा सकता है.
जानकारों की मानें तो इस तकनीक से आतंकवादी घटनाओं से जुड़ी गतिविधियों में काफी हद तक जान-माल के नुकसान में कमी लाई जा सकती है.
यही नहीं यदि कोई बंधक बनाने वाली स्थिति में है तो ये तकनीक काफी कारगर सिद्ध हो सकती है. इसके अलावा भूकंप या आग लगने पर या इसी तरह के अन्य बचाव अभियानों में ये पता लगाया जा सकता है कि लोग कहां फंसे हुए हैं और कैसे उन्हें बाहर निकाला जा सकता है.
हालांकि इस लेजर तकनीक को आम लोगों के लिए 10 साल बाद उपलब्ध कराया जाएया.