आखिर हम अपने स्मार्टफ़ोन के बिना क्यों नहीं जी पाते, शोध में सामने आई ये वजह

Live Without Smartphone
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Live Without Smartphone : 50 फीसदी वयस्क अपने स्मार्टफोन के बिना नहीं रह सकते हैं.

Live Without Smartphone : सुबह उठते ही अगर आपकी आधी खुली आँखें सबसे पहले बिस्तर पर अपने फोन को टटोलती हैं या फिर देर रात तक उंगलियाँ अगर आपके स्मार्टफ़ोन पर थिरकती हैं तो यकीनन आप अपने फोन के आदी या यूँ कहिये स्मार्टफोन के गुलाम बन गए हैं.

लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि हम अपने स्मार्टफोन के बिना क्यों नहीं जी पाते? आखिर क्यों स्मार्टफोन से दूर होते ही हमें अजीब सा लगने लगता है.
बता दें हमारे आपके इस सवाल का जवाब शोधकर्ताओं ने ढूंढ निकाला है.
हममें से ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को बार-बार देखते रहते हैं और काम हो चाहे ना हो उसे स्क्रॉल करते रहते हैं.
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इसी सन्दर्भ में हाल ही में एक शोध हुआ जिसके मुताबिक लगभग 50 फीसदी वयस्क अपने स्मार्टफोन के बिना नहीं रह सकते हैं.
बता दें कि ये शोध पीव रिसर्च सेंटर द्वारा किया गया है, यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना और यूनिवर्सिटी ऑफ वेन के शोधकर्ताओं ने टेकनोफेरेंस या स्मार्टफोन और अन्य टेक्नोलॉजी का हमारे सामाजिक जीवन में इंटरैक्शन विषय पर ये शोध किया है.
आज के समय में फोन सिर्फ हमारे रोजमर्रा के जीवन का ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का एक अहम हिस्सा बन चुका है.
आज जब हम अपने फोन से दूर रहते हैं, तो हमें ऐसा महसूस होता है जैसे कि हमारे व्यक्तित्व का एक हिस्सा छूट गया है और हमें लगातार ही एक अधूरेपन का एहसास होता है.
इसका शारीरिक और मानसिक असर भी होता है और ऐसी हालत में हम चाह कर भी अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते है.
जानिए इस शोध का क्या है नतीजा
इस शोध में इस बात को समझाया गया है कि आखिर क्यों हमारे स्मार्टफोन हमारी जिंदगी को इस कदर प्रभावित कर रहे हैं.
नतीजे में ये बात सामने निकल कर आई है कि ऐसा इंसान के विकासवादी इतिहास और इंसान के दूसरों के साथ जुड़ाव के कारण होता है.
इस शोध के मुताबिक, इंसान अपने विकासवादी इतिहास के कारण अपने नजदीकी रिश्तों पर भरोसा करता है.
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शोध में हिस्सा लेने वाले शोधकर्ताओं की माने तो, “इंसान अपने करीबी लोगों, परिवार और दोस्तों पर निर्भर रहता है. हमारे ये रिश्ते सच्चाई और सहयोग की नीव पर बने होते हैं. ऐसे में स्मार्टफोन के आने के बाद लोगों से ये जुड़ाव पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है और लोग पहले की तुलना में अब और ज्यादा आसानी से अपने करीबी लोगों से जुड़े रह पाते हैं. अब स्मार्टफोन की मदद से सोशल मीडिया के जरिए वे एक दूसरे को तत्काल रिप्लाई कर पाते हैं.”
यानी कि देखा जाये तो पहले के समय में किसी भी साधन के मुकाबले ये स्मार्टफोन कहीं ज्याद मजबूत किफायती और फायदेमंद है.
यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना के प्रोफेसर डेविड सबरा ने इस बारे में बात करते हुए बताया कि, “स्मार्टफोन का ये जुड़ाव हमारे दिमाग के पुराने मॉड्यूल से जुड़ा हुआ है, जो हमारे सर्वाइवल के लिए जिम्मेदार होती हैं. ये एक ऐसा जुड़ाव है जो हमें एक दूसरे पर निर्भर और जिम्मेदार बनाता है.
गौरतलब है की इस शोध में उदाहरण के लिए 143 वैवाहिक महिलाओं पर भी एक्सपेरिमेंट किया गया और इसके नतीजे में ये बात सामने आई कि इस शोध में हिस्सा लेने वाली 70 फीसदी महिलाओं का रिश्ता स्मार्टफोन की वजह से प्रभावित होता है.