सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले कक्षा 8वीं के छात्र ने बनाई गरीबों की वाशिंग मशीन

MP School Kid Innovated Electricity Free Washing Machine

MP School Kid Innovated Electricity Free Washing Machine : इसे ना ही बिजली की आवश्यकता है और ना ही किसी बड़े बजट की

MP School Kid Innovated Electricity Free Washing Machine : तकनीक की दुनिया में कपड़े धोने वाली वाशिंग मशीन आजकल एक आम घरेलू उपकरण बन गया है, ऐसा लगता है कि इसके बिना कोई घर पूरा नहीं हो सकता.

लेकिन आज भी अधिकांश भारतीयों के लिए इस मशीन का सुख भोगना किसी सपने के सच होने जैसा है . या तो इस वजह से की वह मंहगी है या फिर अपने घर में बिजली की आपूर्ति की कमी के चलते.
लेकिन इन लोगों की मजबूरियों को कक्षा 8 के एक छात्र ने बखूबी समझा है और एक ऐसी वॉशिंग मशीन बनाई है जिसके लिए ना ही बिजली की आवश्यकता है और ना ही किसी बड़े बजट की.
 एलबीएस बॉयज़ सरकारी मिडिल स्कूल, पंढरना, मध्य प्रदेश के दर्शन कोहे ने पुराने साइकिल(बिना पहिए की) और एक प्लास्टिक के कंटेनर की मदद से इस वाशिंग मशीन को तैयार किया है.
पढ़ें – बिहार के 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले आर्यन ने बनाए तीन ऐप, गूगल ने स्वीकारा
इस मशीन की खास बात है कि इसे चलाने के लिए किसी बिजली या अन्य प्रकार के ईंधन की जरूरत नहीं पड़ती बस सिर्फ पैडल मारने के साथ ही ये “वाशिंग मशीन” अपना काम करना शुरू कर देती है.

वीडियो में देखें – 

बता दें कि इसाइकिल का पिछला चक्का एक कंटेनर से जुड़ा होता है जिसके अंदर एक ग्रिल जाल अटैच रहता है जो पैडल मरने से अंदर घूमता है.इस कंटेनर में पानी और सर्फ को एक साथ लोड किया जा सकता है.
इसके बाद कपड़ों को जाल के अंदर लोड किया जाता है जो बैरल में साबुन के पानी से घिरा हुआ होता है. ध्यान दें कि डिवाइस को कपड़े धोने के लिए पैडल के माध्सम से चक्र को घूमाने की आवश्यकता होती है.
यही नहीं किसी भी अन्य कपड़े धोने की मशीन की तरह, इसके अंदर भी सुखाने का विकल्प मौजूद है.इसके लिए केवल एक बार पानी के बैरल को खाली करना रहता है और जाल को स्पिन करना पड़ता है.
पढ़ें IIT इंजीनियरों ने दुर्घटना के समय एयरबैग की तरह फूल जाने वाला हेलमेट बनाया
यह कपड़े से अतिरिक्त पानी निकाल देता है जो आपको लगभग पूरी तरह से मशीन से धुले कपड़े जैसा अनुभव देता है.
गौरतलब है कि दर्शन ने आईआईटी दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर के प्रेरणा पुरस्कार प्रतियोगिता में भी डिवाइस का प्रदर्शन किया, जहां अंतरराष्ट्रीय लोगों ने भी उसके इस तकनीक को सराहा.
दर्शन जैसे लड़के एक अच्छा उदाहरण हैं उनके लिए जो ये समझते हैं कि प्राइवेट स्कूल के बच्चों के अंदर ही सिर्फ क्रिएटिविटी रहती है.